कांग्रेस विधायकों की बाड़ाबंदी: क्रॉस वोटिंग के डर से 62 विधायक बेंगलुरु रवाना, राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

विधायकों को विशेष विमान से कर्नाटक भेजेंगे, कांग्रेस ने अतिरिक्त सतर्कता अपनाई, 18 जून तक बाहर ही रहेंगे विधायक

कांग्रेस विधायकों की बाड़ाबंदी: क्रॉस वोटिंग के डर से 62 विधायक बेंगलुरु रवाना, राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

मध्यप्रदेश के कांग्रेस विधायकों की बाड़ेबंदी की तैयारियां पूरी हो गई। कांग्रेस ने विधायकों के लिए 180 सीटर स्पेशल प्लेन बुक किया है। दोपहर करीब 1 बजे के आसपास स्पेशल प्लेन से बेंगलुरु के लिए उड़ान भरेंगे। 18 जून को राज्यसभा सदस्य के लिए चुनाव होगा। तब तक सभी प्रदेश से बाहर रहेंगे।

भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। भारतीय जनता पार्टी द्वारा तीसरी राज्यसभा सीट पर उम्मीदवार उतारने के बाद मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस को अपने विधायकों में संभावित क्रॉस वोटिंग और टूट-फूट का खतरा नजर आ रहा है। इसी आशंका के चलते पार्टी ने अपने सभी 62 विधायकों को कर्नाटक भेजने का फैसला किया है। कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक में विधायकों को शिफ्ट कर पार्टी उन्हें एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है।

मंगलवार को कांग्रेस विधायक नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के भोपाल स्थित सरकारी निवास पर एकत्र हुए। यहां से सभी विधायक एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए, जहां से उन्हें विशेष विमान द्वारा बेंगलुरु भेजा गया। कांग्रेस ने इस उद्देश्य के लिए 72 सीटों वाला विशेष विमान बुक किया है। राज्यसभा चुनाव 18 जून को होना है और तब तक सभी विधायक प्रदेश से बाहर रहेंगे।

राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने महेश केवट को मैदान में उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है। भाजपा के इस कदम के बाद कांग्रेस ने अपने विधायकों की निगरानी और एकजुटता सुनिश्चित करने के लिए बाड़ाबंदी की रणनीति अपनाई है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस को अपने सभी विधायकों पर पूरा भरोसा है, लेकिन भाजपा की राजनीति को देखते हुए सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का जहां शासन है, वहां विधायकों को ले जाना स्वाभाविक है। भाजपा लगातार तोड़-फोड़ और प्रलोभन की राजनीति करती रही है, इसलिए पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।

भोपाल एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए सिंघार ने दावा किया कि कांग्रेस के सभी 62 विधायक पूरी तरह एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने निर्धारित वोटों से भी अधिक समर्थन मिलने की उम्मीद है। भाजपा द्वारा विधायकों को प्रभावित करने के प्रयासों का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है।

इस बीच कांग्रेस के कई विधायक अपने परिवारों के साथ एयरपोर्ट पहुंचे। विधायक चंदा गौर, झूमा सोलंकी और अनुभा मुंजारे अपने परिवार के सदस्यों के साथ बेंगलुरु रवाना हुईं। कांग्रेस के कुछ विधायकों ने आरोप लगाया कि भाजपा की ओर से उन्हें बड़े-बड़े ऑफर दिए जा रहे हैं। विधायक दिनेश जैन मुनमुन और सोहन वाल्मिकी ने भी भाजपा पर खरीद-फरोख्त की राजनीति करने का आरोप लगाया।

हालांकि सभी विधायकों को एक साथ भेजने की योजना में कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। कई विधायकों के परिवारों की यात्रा संबंधी पूरी जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके चलते कांग्रेस को अपनी योजना में बदलाव करना पड़ा और विधायकों को दो चरणों में बेंगलुरु भेजने का निर्णय लिया गया। पहला विमान दोपहर में रवाना हुआ, जबकि दूसरा विमान शाम तक उड़ान भरने की तैयारी में रहा।

कांग्रेस के भीतर इस पूरी कवायद को लेकर लगातार बैठकें और रणनीतिक चर्चा जारी है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में एक-एक वोट की अहमियत है और किसी भी तरह की टूट या क्रॉस वोटिंग चुनावी समीकरण बदल सकती है। इसी कारण विधायकों को चुनाव तक एक साथ रखने का फैसला लिया गया है।

उधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा सार्वजनिक मंचों पर महिला आरक्षण और महिला सशक्तिकरण की बात करती है, लेकिन अब एक महिला उम्मीदवार को हराने की साजिश में जुटी हुई है। पटवारी ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है।

जीतू पटवारी ने कांग्रेस विधायकों की एकजुटता पर भरोसा जताते हुए कहा कि पार्टी पूरी मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी और मीनाक्षी नटराजन की जीत सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा को लोकतंत्र में विश्वास होना चाहिए, न कि विधायकों को प्रभावित करने की कोशिशों में।

उमंग सिंघार ने भी स्पष्ट किया कि यदि किसी विधायक का मन बदलना होता तो वह कांग्रेस के साथ बेंगलुरु जाने की तैयारी नहीं करता। उन्होंने कहा कि सभी विधायक कांग्रेस की विचारधारा और नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। पार्टी के भीतर किसी तरह की नाराजगी या असंतोष नहीं है।

राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की यह बाड़ाबंदी प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बनी हुई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपनी-अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं। जहां भाजपा तीसरी सीट जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है, वहीं कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखकर किसी भी राजनीतिक जोखिम से बचना चाहती है।

अब 18 जून को होने वाले मतदान पर सबकी निगाहें टिकी हैं। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि कांग्रेस की बाड़ाबंदी की रणनीति कितनी सफल रही और भाजपा की राजनीतिक चालें कितना असर दिखा पाती हैं। फिलहाल मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव ने नया रोमांच और सियासी तनाव पैदा कर दिया है।