नेपानगर नगर पालिका में कांग्रेस की कलह खुलकर सामने आई: 5 पार्षदों ने नपाध्यक्ष से वापस लिया समर्थन, BJP से मिलकर काम करने के लगाए आरोप

बुरहानपुर के नेपानगर में कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी सामने आई है। पार्टी के पांच पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष भारती विनोद पाटील से अपना समर्थन वापस ले लिया है।

नेपानगर नगर पालिका में कांग्रेस की कलह खुलकर सामने आई: 5 पार्षदों ने नपाध्यक्ष से वापस लिया समर्थन, BJP से मिलकर काम करने के लगाए आरोप

नेपानगर नगर पालिका में कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर आई सामने

5 कांग्रेस पार्षदों ने नपाध्यक्ष भारती पाटील से वापस लिया समर्थन

PCC चीफ Jitu Patwari को भेजा शिकायत पत्र

नपाध्यक्ष पर BJP समर्थित पार्षदों से मिलकर काम करने के आरोप

बुरहानपुर। मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के नेपानगर नगर पालिका में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आ गई है। नगर पालिका अध्यक्ष भारती विनोद पाटील के खिलाफ पार्टी के ही पांच कांग्रेस पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। इन पार्षदों ने न केवल नपाध्यक्ष से अपना समर्थन वापस लेने की घोषणा की है, बल्कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष Jitu Patwari को पत्र लिखकर पूरे मामले की शिकायत भी की है।

इस घटनाक्रम ने नेपानगर की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। स्थानीय स्तर पर इसे कांग्रेस की बढ़ती गुटबाजी और संगठनात्मक संकट के रूप में देखा जा रहा है। पार्षदों का आरोप है कि नगर पालिका अध्यक्ष पार्टी की विचारधारा के विपरीत काम कर रही हैं और भाजपा समर्थित पार्षदों के साथ मिलकर निर्णय ले रही हैं।

पांच महिला पार्षदों ने वापस लिया समर्थन

नगर पालिका अध्यक्ष भारती पाटील के खिलाफ समर्थन वापस लेने वाले पार्षदों में योगिता राजू पाटील, सपना कैलाश पटेल, वर्षा शांताराम ठाकरे, अनीषा राजेश पटेल और रूपाली जितेंद्र सावकारे शामिल हैं। सभी पार्षदों ने संयुक्त रूप से PCC चीफ को पत्र भेजकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई है।

पत्र में पार्षदों ने आरोप लगाया कि नपाध्यक्ष भारती पाटील नगर पालिका के कामकाज में पार्टी के निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनदेखी कर रही हैं। उनका कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता नहीं है और कई मामलों में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है।

पार्षदों के अनुसार, उनके वार्डों में विकास कार्यों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही, जबकि अन्य क्षेत्रों में तेजी से काम कराया जा रहा है। इससे जनता के बीच पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है।

BJP समर्थित पार्षदों से मिलकर काम करने का आरोप

विवाद का सबसे बड़ा कारण नपाध्यक्ष पर लगाया गया वह आरोप है, जिसमें कहा गया है कि वे भाजपा समर्थित पार्षदों के साथ मिलकर काम कर रही हैं।

पार्षदों का कहना है कि नगर पालिका के कई फैसले कांग्रेस संगठन की विचारधारा और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया से हटकर लिए जा रहे हैं। उनका दावा है कि इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों में असंतोष बढ़ रहा है।

उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि यदि समय रहते संगठन स्तर पर हस्तक्षेप नहीं किया गया तो इसका असर भविष्य की राजनीति और पार्टी संगठन पर पड़ सकता है।

दो महीने से जारी है खींचतान

नगर पालिका अध्यक्ष और कांग्रेस पार्षदों के बीच विवाद कोई नया नहीं है। पिछले करीब दो महीनों से दोनों पक्षों के बीच तनातनी चल रही है।

इससे पहले भी चार महिला पार्षदों ने अपने वार्डों में विकास कार्य नहीं होने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। नाराज पार्षदों ने करीब 10 दिनों तक धरना देकर अपनी मांगें उठाई थीं।

उस समय मामला काफी चर्चा में रहा था और संगठन स्तर पर भी इस पर बातचीत हुई थी। विवाद बढ़ने के बाद नगर पालिका की तत्कालीन पीआईसी (प्रेसिडेंट इन काउंसिल) को भंग कर नई पीआईसी का गठन किया गया था।

हालांकि नई व्यवस्था बनने के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी और अब समर्थन वापसी तक मामला पहुंच गया है।

22 मई की बैठक बनी विवाद की नई वजह

राजनीतिक तनाव के बीच 22 मई को हुई नगर पालिका की बैठक ने विवाद को और बढ़ा दिया।

जानकारी के अनुसार, इस बैठक में नगर पालिका अध्यक्ष ने 19 ऐसे प्रस्ताव पारित कराए, जिन्हें पहले हटाए जा चुके पीआईसी सदस्यों ने 23 अप्रैल की बैठक में अस्वीकार कर दिया था।

इसी मुद्दे को लेकर असंतुष्ट पार्षदों की नाराजगी और बढ़ गई। उनका आरोप है कि जिन प्रस्तावों को पहले खारिज किया जा चुका था, उन्हें दोबारा मंजूरी देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया और सामूहिक निर्णय व्यवस्था के खिलाफ है।

विपक्षी गुट का कहना है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में पार्षदों को विश्वास में नहीं लिया गया।

कांग्रेस संगठन ने कहा- प्रदेश स्तर पर होगा फैसला

पूरा मामला सामने आने के बाद कांग्रेस संगठन की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है।

नगर कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश सिंह बैस ने कहा कि यह फिलहाल व्यक्तिगत मामला प्रतीत होता है और उन्हें अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि यदि मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचा है तो निर्णय भी वहीं से लिया जाएगा। संगठन स्तर पर जो निर्देश आएंगे, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।

वहीं ग्रामीण कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष जगमीत सिंह जॉली शहर से बाहर बताए जा रहे हैं, जिसके चलते उनकी प्रतिक्रिया सामने नहीं आ सकी।

नपाध्यक्ष ने साधी चुप्पी

पूरा विवाद सामने आने के बाद नगर पालिका अध्यक्ष भारती विनोद पाटील ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पांच पार्षदों का समर्थन वापस लेने का फैसला कायम रहता है तो नगर पालिका की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है।

कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी पहले ही कई जिलों में चर्चा का विषय बनी हुई है और अब नेपानगर का यह मामला भी संगठन के लिए चुनौती बनता दिख रहा है।

संगठन के सामने बड़ी चुनौती

नेपानगर नगर पालिका का यह विवाद सिर्फ स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस संगठन के भीतर समन्वय और नेतृत्व की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।

एक तरफ पार्षद नेतृत्व के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व के लिए असंतुष्ट नेताओं को साथ रखना भी चुनौती बन गया है।

अब नजरें PCC नेतृत्व पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को किस तरह सुलझाता है और क्या संगठन स्तर पर कोई हस्तक्षेप किया जाता है या नहीं।