पार्षद पुलिस अफसरों के पैरों में गिरे, बोले- “साहब पानी दिलवा दो, जनता मर जाएगी”-इंदौर में पानी के लिए सड़क पर उतरी जनता

शहर में गहराते पानी संकट को लेकर रविवार को पालदा क्षेत्र में कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी का अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. पानी की मांग को लेकर पार्षद ने सड़क पर चक्का जाम किया और मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों के पैरों में गिरकर पानी की गुहार लगाई.

पार्षद पुलिस अफसरों के पैरों में गिरे, बोले- “साहब पानी दिलवा दो, जनता मर जाएगी”-इंदौर में पानी के लिए सड़क पर उतरी जनता

आक्रोशित जनता अब सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रही है। शहर के अलग-अलग चौराहों पर कांग्रेस पार्षदों के नेतृत्व में रहवासियों ने उग्र प्रदर्शन और चक्काजाम किया।

इंदौर में भीषण गर्मी के बीच गहराते जल संकट ने अब राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। शहर के कई इलाकों में पानी की किल्लत से परेशान लोग सड़क पर उतर आए हैं। रविवार को पालदा क्षेत्र में उस समय भावुक और असामान्य दृश्य देखने को मिला, जब कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी ने पानी की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों के पैरों में गिरकर गुहार लगाई। उन्होंने जमीन पर दंडवत होकर रेंगते हुए अधिकारियों तक पहुंचकर कहा, “सर पानी नहीं है, पानी दिलवा दो… जनता मर जाएगी।”

पानी संकट को लेकर पालदा चौराहा आंदोलन का केंद्र बन गया, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय रहवासी खाली बर्तन और मटके लेकर पहुंचे। लोगों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से इलाके में जल संकट बना हुआ है, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर चक्का जाम कर दिया, जिससे कुछ देर तक यातायात भी प्रभावित रहा।

प्रदर्शन के दौरान पार्षद कुणाल सोलंकी ने पुलिस अधिकारियों के सामने भावुक अपील की। वे अधिकारियों के पैरों में बैठ गए, पैर पकड़कर पानी की मांग करने लगे और कहा कि क्षेत्र की जनता पानी के अभाव में परेशान है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के सामने मटके रखकर प्रतीकात्मक विरोध भी दर्ज कराया। इस दौरान मौजूद स्थानीय लोगों ने भी अधिकारियों से जल्द पानी सप्लाई शुरू कराने और टैंकर व्यवस्था बढ़ाने की मांग की।

उधर, शहर के दूसरे हिस्से सुखलिया चौराहा पर भी जल संकट को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ। यहां कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में रहवासियों और कार्यकर्ताओं ने सड़क पर बैठकर चक्काजाम किया। दोनों स्थानों पर प्रदर्शन के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और शहर की रफ्तार कुछ समय के लिए थम गई।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पहले से चल रही जल वितरण व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। कई बस्तियों में नियमित सप्लाई बंद हो गई है, जिससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों पर संकट बढ़ गया है। लोगों का आरोप है कि वे निजी टैंकरों से पानी खरीदने की स्थिति में नहीं हैं और सरकारी व्यवस्था भी समय पर राहत नहीं दे पा रही।

जल संकट को लेकर नगर निगम की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि निगम ने इस बार जल संकट का सही आकलन नहीं किया। आमतौर पर अप्रैल के पहले पखवाड़े में गर्मी और संभावित जल संकट से निपटने की तैयारी शुरू हो जाती है, लेकिन इस वर्ष मई के मध्य तक कोई ठोस रणनीति तैयार नहीं हुई।

बताया जा रहा है कि मार्च और अप्रैल में जल संकट की तैयारी नहीं होने से हालात बिगड़ते चले गए। मौसम विभाग पहले ही भीषण गर्मी की चेतावनी दे चुका था, लेकिन समय रहते वैकल्पिक जल आपूर्ति, टैंकर प्रबंधन और बोरिंग व्यवस्था पर पर्याप्त काम नहीं हुआ। मई के मध्य तक जब गर्मी चरम पर पहुंची, तब तक शहर के कई इलाकों में बोरिंग सूख चुके थे और पानी की समस्या गंभीर रूप ले चुकी थी।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जल संकट के दौरान पार्टी के कुछ नेता अपने खर्च से टैंकरों के जरिए लोगों को पानी उपलब्ध करा रहे थे, लेकिन अब नगर निगम ने इन टैंकरों को पानी देना भी बंद कर दिया है। इससे संकट और बढ़ गया है।

दिलचस्प बात यह है कि पानी के मुद्दे पर सिर्फ विपक्ष ही नहीं, सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों ने भी नाराजगी जताई है। भाजपा विधायक और पार्षद भी जल वितरण व्यवस्था पर सवाल उठा चुके हैं। विधायक महेंद्र हार्डिया ने नगर निगम पर असमान जल वितरण का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी थी कि यदि हालात नहीं सुधरे तो वे महापौर निवास के बाहर धरना देंगे।

इसी तरह वार्ड 26 के रहवासी भाजपा पार्षद लालबहादुर वर्मा के साथ पानी की मांग को लेकर विधायक रमेश मेंदोला के घर तक पहुंच गए थे और “पानी दो-पानी दो” के नारे लगाए थे।

प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने टैंकर व्यवस्था बढ़ाने, पानी सप्लाई सुधारने और नर्मदा लाइन से जुड़े समाधान पर काम करने का भरोसा दिया। इसके बाद लोगों ने प्रदर्शन समाप्त किया और स्थिति सामान्य हो सकी।

हालांकि कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में जल संकट का समाधान नहीं हुआ और पानी आपूर्ति नियमित नहीं की गई, तो शहरभर में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

भीषण गर्मी के बीच इंदौर का जल संकट अब सिर्फ पानी की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक तैयारी, जल प्रबंधन और शहरी व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है। जनता अब राहत नहीं, स्थायी समाधान की मांग कर रही है।