इंदौर हनीट्रैप कांड में छत्तीसगढ़ के DIG का नाम चर्चा में: 4 राज्यों तक फैला नेटवर्क, नेताओं-अफसरों के 100 से ज्यादा वीडियो मिलने से मचा हड़कंप
इंदौर में हनी ट्रैप-2 का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और दिल्ली के राजनीतिक व प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस को नेताओं, अफसरों और उद्योगपतियों के 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए हैं।
मध्य प्रदेश के इंदौर में सामने आए हनीट्रैप-2 मामले ने एक बार फिर 2019 के चर्चित सेक्स स्कैंडल की यादें ताजा कर दी हैं। इस बार मामला मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और दिल्ली तक पहुंच गया है।
मध्य प्रदेश के इंदौर से सामने आए चर्चित हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बीच अब छत्तीसगढ़ पुलिस के एक डीआईजी रैंक अधिकारी का नाम भी चर्चाओं में आ गया है। हालांकि अभी तक किसी अधिकारी की आधिकारिक पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन मामले से जुड़े खुलासों ने पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हलचल बढ़ा दी है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक इस नेटवर्क से नेताओं, वरिष्ठ अधिकारियों और बड़े कारोबारियों से जुड़े 100 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो और डिजिटल रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ नए तथ्य सामने आ रहे हैं, जिससे यह मामला केवल इंदौर तक सीमित नहीं बल्कि बहु-राज्यीय नेटवर्क के रूप में उभर रहा है।
चार राज्यों तक फैला था हनीट्रैप नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित हनीट्रैप गिरोह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और दिल्ली तक सक्रिय था। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाकर उन्हें जाल में फंसाया और बाद में वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग कर बड़ी रकम वसूली।
जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का संचालन भोपाल से किया जा रहा था। आरोप है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों तक पहुंच बनाता था और फिर निजी संबंधों का इस्तेमाल कर उन्हें फंसाने की कोशिश की जाती थी।
मामले में गिरफ्तार आरोपियों में श्वेता विजय जैन, रेशू चौधरी और अलका दीक्षित के नाम सामने आए हैं। पुलिस का दावा है कि इनमें से कुछ आरोपी लंबे समय से नेटवर्क का हिस्सा थे और अलग-अलग जिम्मेदारियां संभाल रहे थे।
बताया जा रहा है कि रेशू चौधरी कथित तौर पर टारगेट लोगों से संपर्क साधने और उन्हें विश्वास में लेने का काम करती थी, जबकि अन्य लोग पूरे ऑपरेशन के संचालन और पैसों के लेनदेन को संभालते थे।
डिजिटल डिवाइस से मिले वीडियो और डेटा
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस जब्त किए हैं। इन्हीं डिवाइसों की जांच में बड़ी संख्या में वीडियो और रिकॉर्डिंग मिलने की बात सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार कई वीडियो में प्रभावशाली लोग दिखाई देने की आशंका है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक किसी व्यक्ति की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही किसी नाम को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया है।
पुलिस अब वीडियो की प्रामाणिकता, रिकॉर्डिंग की समयावधि और इनके इस्तेमाल के पैटर्न की जांच कर रही है। फॉरेंसिक जांच के जरिए यह भी पता लगाया जा रहा है कि वीडियो वास्तविक हैं या उनमें किसी प्रकार की एडिटिंग की गई है।
करोड़ों की ब्लैकमेलिंग का आरोप
जांच एजेंसियों का दावा है कि वीडियो के जरिए कई लोगों से करोड़ों रुपए की उगाही की गई। अधिकारियों के अनुसार ब्लैकमेलिंग का यह नेटवर्क काफी समय से सक्रिय हो सकता है।
जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि दिल्ली के एक नेता से करीब 4 करोड़ रुपए की मांग या वसूली की साजिश रची गई थी। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी अभी साझा नहीं की गई है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि डिजिटल साक्ष्यों की पुष्टि होती है तो यह प्रदेश के हालिया वर्षों के सबसे बड़े ब्लैकमेलिंग मामलों में शामिल हो सकता है।
कारोबारी की शिकायत के बाद खुला मामला
पूरे मामले का खुलासा इंदौर के कारोबारी हितेंद्र उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत के बाद हुआ।
कारोबारी ने आरोप लगाया कि 28 अप्रैल को सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में उनके साथ मारपीट की गई। साथ ही कथित आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उनसे पैसे मांगे गए।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और कई लोगों को हिरासत में लिया। इसके बाद कार्रवाई का दायरा बढ़ता गया और पूरे नेटवर्क के संकेत मिलने लगे।
पुलिस जांच के दौरान गिरफ्तार आरोपियों में जयदीप, लाखन चौधरी, पत्रकार जितेंद्र पुरोहित और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा के नाम भी सामने आए हैं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा क्या उन्हें किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा था।
प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण की जांच
मामले के सामने आने के बाद पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं इस नेटवर्क को किसी प्रशासनिक या राजनीतिक संरक्षण का लाभ तो नहीं मिला।
जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि इतने बड़े स्तर पर संचालित कथित नेटवर्क लंबे समय तक सक्रिय कैसे रहा और क्या इसके पीछे प्रभावशाली लोगों की मदद थी।
यदि जांच में संरक्षण या मिलीभगत के संकेत मिलते हैं तो कार्रवाई का दायरा और बढ़ सकता है।
छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में बढ़ी हलचल
इंदौर हनीट्रैप मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस के डीआईजी स्तर के अधिकारी का नाम चर्चा में आने के बाद वहां के पुलिस महकमे में भी हलचल तेज हो गई है।
विभागीय स्तर पर अधिकारी की पहचान को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, लेकिन अब तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जांच एजेंसियां फिलहाल डिजिटल साक्ष्य, संपर्क सूत्रों और पैसों के लेनदेन की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि केवल चर्चाओं के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
आगे और खुलासों की संभावना
जांच एजेंसियों का कहना है कि जब्त डिवाइसों और बैंकिंग ट्रांजैक्शन की जांच अभी जारी है। कई मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, चैट और वित्तीय दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में मामले में और बड़े खुलासे संभव हैं। यदि जांच में नए नाम सामने आते हैं तो कार्रवाई का दायरा चार राज्यों से आगे भी बढ़ सकता है।
फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने और यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर कितने लोग इस कथित ब्लैकमेलिंग गिरोह का शिकार बने और इसके जरिए कितनी रकम वसूली
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस