मध्यप्रदेश में जलसंकट पर सरकार अलर्ट: CM मोहन यादव के निर्देश पर पेयजल विभाग कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द, कलेक्टरों को रोज मॉनिटरिंग के आदेश
जिला स्तर पर पेयजल टैंकर सप्लाई की पारदर्शी की निगरानी की जाएगी। शहरी क्षेत्रों में पानी वितरण में भेदभाव जैसी स्थिति न बने इस पर ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था के लिए 1500 करोड़ रुपए जारी किए गए। 10 हजार रुपए तक के पेयजल के काम तुरंत कराने के अधिकार पंचायतों को सौंपे गए हैं।
मध्य प्रदेश के सभी नगरीय निकाय और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभागों के अफसर-कर्मचारियों की छुट्टियों को एक महीने के लिए रद्द कर दिया गया है।
भोपाल। मध्यप्रदेश में लगातार गहराते पेयजल संकट को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। गर्मी के बढ़ते प्रभाव और कई जिलों में जलस्रोतों के कमजोर होने के बीच मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने प्रदेशभर में पेयजल व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि लोगों तक पानी की आपूर्ति में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी के तहत पेयजल व्यवस्था से जुड़े विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की आगामी एक माह की छुट्टियों पर रोक लगा दी गई है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रशासनिक स्तर पर युद्धस्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। राज्य सरकार ने जिलों में पेयजल संकट से निपटने के लिए निगरानी, त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही की व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। अधिकारियों को रोजाना समीक्षा और फील्ड स्तर पर निगरानी सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
रविवार शाम मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टरों, जिला पंचायत सीईओ, नगर निगम आयुक्तों, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) और जल निगम अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रदेश के ग्रामीण और मैदानी इलाकों में बढ़ते जल संकट की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में सामने आया कि कई क्षेत्रों में जलस्तर गिरने से पेयजल संकट गंभीर होता जा रहा है। बड़े शहरों में भी इसका असर दिखाई देने लगा है। विशेष रूप से इंदौर समेत कुछ शहरी क्षेत्रों में पानी की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन और जनआंदोलन सामने आए हैं।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, वहां तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था लागू की जाए और किसी भी गांव या बस्ती में पेयजल आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए।
सभी कलेक्टरों को सेंट्रल कंट्रोल रूम बनाने के निर्देश
राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले में सेंट्रल कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टरों को स्वयं जल आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी करने और रोज सुबह समीक्षा बैठक आयोजित करने के लिए कहा गया है।
सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर लगातार मॉनिटरिंग से समस्याओं की पहचान जल्दी होगी और उनका समाधान भी तेजी से किया जा सकेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आने वाली जलसंकट संबंधी खबरों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा CM हेल्पलाइन पर आने वाली पेयजल शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
खराब हैंडपंप, मोटर और पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत के आदेश
बैठक में पेयजल स्रोतों की तकनीकी स्थिति पर भी विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों से कहा गया कि जहां हैंडपंप खराब हैं, मोटर बंद हैं या पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है, वहां तत्काल मरम्मत कराई जाए।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पानी की सप्लाई में तकनीकी बाधाएं लंबे समय तक नहीं रहनी चाहिए। जिन क्षेत्रों में टैंकरों से पानी पहुंचाना आवश्यक है, वहां वितरण व्यवस्था पारदर्शी और निष्पक्ष रखी जाए।
प्रशासन को यह भी निर्देश दिए गए कि पानी वितरण के दौरान किसी प्रकार की शिकायत या पक्षपात की स्थिति सामने नहीं आनी चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 1500 करोड़ रुपए जारी
ग्रामीण इलाकों में पेयजल व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने 1500 करोड़ रुपए की राशि जारी की है। यह राशि जल उपलब्धता बढ़ाने, मरम्मत कार्यों और वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर खर्च की जाएगी।
सरकार ने पंचायतों को भी अधिक अधिकार दिए हैं ताकि स्थानीय स्तर पर तुरंत काम हो सके। पंचायतों को पेयजल संबंधी 10 हजार रुपए तक के कार्य सरल प्रक्रिया के तहत तुरंत कराने की अनुमति दी गई है।
नई एसओपी और संशोधित एसओआर लागू होने के बाद पंचायतें स्वयं जल संरक्षण और पेयजल उपलब्धता से जुड़े छोटे कार्य कर सकेंगी।
वित्त आयोग की राशि का भी होगा उपयोग
मुख्य सचिव ने बताया कि 15वें और 16वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग भी पेयजल व्यवस्था मजबूत करने में किया जा सकता है। इसके अलावा राज्य वित्त आयोग, मूलभूत मद, केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदान तथा पंचायतों की स्वयं की आय से भी जल प्रबंधन पर खर्च किया जा सकेगा।
इस कदम का उद्देश्य स्थानीय निकायों को अधिक वित्तीय लचीलापन देना है ताकि वे जरूरत के अनुसार तुरंत कार्य कर सकें।
जल स्रोतों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश
अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी जल स्रोतों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए। उन्होंने कहा कि प्रशासन पहले से आकलन करे कि कहीं किसी स्रोत में पानी की कमी तो नहीं हो रही।
इसके साथ ही वैकल्पिक जल स्रोतों की पहचान और तैयारी पहले से करने को कहा गया है ताकि संकट की स्थिति में तत्काल व्यवस्था की जा सके।
दूषित पानी को लेकर सरकार सख्त
मुख्यमंत्री ने दूषित पेयजल से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भी गंभीर रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि कहीं दूषित पानी की वजह से स्वास्थ्य संबंधी समस्या सामने आती है और उसमें प्रशासनिक लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का फोकस केवल पानी की उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना भी प्राथमिकता में शामिल किया गया है।
प्रदेश में बढ़ते जल संकट के बीच सरकार के इस कदम को बड़े प्रशासनिक हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इसका असर जमीनी स्तर पर पेयजल व्यवस्था में दिखाई देने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस