मूलचन्द मेधोनिया को मध्यप्रदेश कांग्रेस स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार प्रकोष्ठ का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया, सामाजिक न्याय और इतिहास संरक्षण पर दिया जोर
नरसिंहपुर जिले के चीचली क्षेत्र के मूलचन्द मेधोनिया को मध्यप्रदेश कांग्रेस के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार प्रकोष्ठ का प्रदेश उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश और वरिष्ठ पदाधिकारियों की सहमति से की गई।
प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर मूलचन्द मेधोनिया की नियुक्ति
जीतू पटवारी के निर्देश में हुआ संगठनात्मक फैसला
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार प्रकोष्ठ में नई जिम्मेदारी
पत्रकार, समाजसेवी और साहित्यकार के रूप में पहचान
शहीद मनीराम अहिरवार के वंशज हैं मूलचन्द मेधोनिया
चीचली (नरसिंहपुर)। मध्यप्रदेश की राजनीति और सामाजिक संगठनों से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। नरसिंहपुर जिले की चीचली विधानसभा (गाडरवारा क्षेत्र) के वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी और साहित्यकार मूलचन्द मेधोनिया को मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अंतर्गत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार प्रकोष्ठ में प्रदेश उपाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया है। इस नियुक्ति को पार्टी संगठन में सामाजिक प्रतिनिधित्व और ऐतिहासिक योगदानों को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह नियुक्ति मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देशानुसार तथा प्रदेश महामंत्री डॉ. संजय कामले के अनुमोदन के उपरांत की गई। वहीं, प्रकोष्ठ के प्रभारी एवं विभागीय अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र सिंह चौहान द्वारा आधिकारिक रूप से मेधोनिया को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
संगठन ने दी बड़ी जिम्मेदारी, सामाजिक कार्यों को मिला सम्मान
मूलचन्द मेधोनिया लंबे समय से पत्रकारिता, समाजसेवा और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाते आ रहे हैं। उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है जो समाज के वंचित, गरीब और पिछड़े वर्गों की आवाज को विभिन्न मंचों पर उठाते रहे हैं।
उनकी सक्रियता केवल लेखन या पत्रकारिता तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने सामाजिक आंदोलनों, ऐतिहासिक शोध और जनजागरूकता अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कांग्रेस संगठन ने उनकी इन्हीं सामाजिक गतिविधियों और योगदान को देखते हुए उन्हें यह दायित्व सौंपा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार प्रकोष्ठ का उद्देश्य स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े परिवारों के योगदान को संरक्षित करना और उनके उत्तराधिकारियों को सामाजिक और राजनीतिक मंच प्रदान करना है। इस दृष्टि से मेधोनिया की नियुक्ति को संगठनात्मक रूप से अहम माना जा रहा है।
शहीद परिवार से जुड़ा ऐतिहासिक गौरव
मूलचन्द मेधोनिया का संबंध एक ऐतिहासिक परिवार से बताया जाता है। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और शहीद मनीराम अहिरवार जी के सुपौत्र हैं, जिन्होंने वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के आह्वान पर अंग्रेजी शासन के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई थी।
स्थानीय जानकारी के अनुसार, शहीद मनीराम अहिरवार ने अपने समय में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया और आंदोलन में भाग लेते हुए देश की आज़ादी के लिए अपना योगदान दिया। हालांकि, उनके योगदान को लंबे समय तक इतिहास में उचित स्थान नहीं मिल सका, जिसे लेकर परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं में असंतोष भी रहा है।
मेधोनिया ने अपने पूर्वजों के योगदान को पुनः स्थापित करने और इतिहास में उन्हें सम्मान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने कई शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और विद्वानों के साथ मिलकर शहीद मनीराम अहिरवार के योगदान को उजागर करने में भूमिका निभाई है।
सामाजिक न्याय और ऐतिहासिक पहचान पर फोकस
नियुक्ति के बाद मीडिया से बातचीत में मूलचन्द मेधोनिया ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य समाज के उन महापुरुषों और क्रांतिकारियों को उचित पहचान दिलाना है, जिनका योगदान समय के साथ उपेक्षित कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और वंचित समाज से जुड़े अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान दिया, लेकिन कई बार उनके नाम और कार्य इतिहास के पन्नों में पर्याप्त रूप से दर्ज नहीं हो पाए।
मेधोनिया ने यह भी कहा कि वे अपने जीवन का लक्ष्य इसी दिशा में समर्पित कर चुके हैं कि ऐसे सभी महान व्यक्तित्वों को सम्मान मिले और उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके।
कांग्रेस संगठन की अपेक्षाएं और जिम्मेदारी
कांग्रेस संगठन के भीतर इस नियुक्ति को संगठन विस्तार और सामाजिक संतुलन के दृष्टिकोण से भी देखा जा रहा है। पार्टी का मानना है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवारों के प्रतिनिधित्व से संगठन को ऐतिहासिक आधार और सामाजिक जुड़ाव दोनों मजबूत होंगे।
प्रदेश नेतृत्व का मानना है कि मेधोनिया जैसे सामाजिक रूप से सक्रिय और जागरूक व्यक्तियों को जिम्मेदारी देने से प्रकोष्ठ की गतिविधियों में तेजी आएगी और जमीनी स्तर पर प्रभाव बढ़ेगा।
भव्य स्मारक और प्रेरणा केंद्र का संकल्प
नियुक्ति के बाद मूलचन्द मेधोनिया ने एक महत्वपूर्ण संकल्प भी सार्वजनिक किया है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो वे शहीद मनीराम अहिरवार की जन्मस्थली पर एक भव्य स्मारक, प्रतिमा और सामाजिक प्रेरणा केंद्र स्थापित कराने का प्रयास करेंगे।
उनके अनुसार यह केंद्र केवल एक स्मारक नहीं होगा, बल्कि यह युवाओं के लिए प्रेरणा स्थल के रूप में कार्य करेगा, जहां स्वतंत्रता संग्राम की गाथाओं और सामाजिक न्याय के संदेशों को प्रदर्शित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रयास केवल एक व्यक्ति या परिवार का नहीं बल्कि पूरे समाज के गौरव को स्थापित करने की दिशा में होगा।
स्थानीय स्तर पर खुशी का माहौल
चीचली और नरसिंहपुर क्षेत्र में इस नियुक्ति को लेकर स्थानीय स्तर पर खुशी का माहौल देखा जा रहा है। समर्थकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह निर्णय क्षेत्रीय नेतृत्व और सामाजिक योगदान को मान्यता देता है।
कई लोगों ने इसे वंचित समाज की आवाज को राजनीतिक मंच पर मजबूत प्रतिनिधित्व मिलने के रूप में भी देखा है। सोशल मीडिया पर भी मेधोनिया को बधाइयों का दौर जारी है।
राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से अहम कदम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्ति केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि सामाजिक संदेश देने वाली भी है। यह कदम कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है जिसमें विभिन्न वर्गों और समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर संगठन को व्यापक आधार देने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि स्वतंत्रता सेनानी परिवारों से जुड़े व्यक्तियों को जिम्मेदारी देने से पार्टी को ऐतिहासिक वैचारिक मजबूती मिलती है और जमीनी स्तर पर जुड़ाव बढ़ता है।
मूलचन्द मेधोनिया की यह नियुक्ति न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को सम्मान देने और सामाजिक न्याय की भावना को आगे बढ़ाने का प्रतीक भी मानी जा रही है। आने वाले समय में उनकी भूमिका से प्रकोष्ठ की गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि वे अपने संकल्पों को किस तरह धरातल पर उतारते हैं और शहीद मनीराम अहिरवार के योगदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में कितने सफल होते हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस