राज्यसभा चुनाव से पहले एमपी में सियासी घमासान: सज्जन सिंह वर्मा का BJP पर हमला, बोले- बाहरी नेताओं को भेजकर कार्यकर्ताओं की अनदेखी
मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भाजपा पर हमला बोलते हुए बाहरी नेताओं को एमपी से राज्यसभा भेजने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि जॉर्ज कुरियन और मुरुगन जैसे नेताओं को भेजकर भाजपा स्थानीय और मेहनती कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही है। वर्मा ने मध्य प्रदेश के जमीनी नेताओं को राज्यसभा भेजने की मांग की।
राज्यसभा चुनाव से पहले सज्जन सिंह वर्मा का भाजपा पर हमला
‘बाहरी नेताओं को एमपी से न भेजा जाए’, स्थानीय चेहरों की वकालत
जॉर्ज कुरियन और मुरुगन का नाम लेकर साधा निशाना
भाजपा पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
18 जून को मध्य प्रदेश की तीन सीटों पर होगा मतदान
दिग्विजय सिंह, जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह का कार्यकाल खत्म
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनावी समीकरणों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वर्मा ने कहा कि राज्यसभा जैसे महत्वपूर्ण और गरिमामयी सदन के लिए ऐसे नेताओं को भेजा जाना चाहिए जो प्रदेश की जमीन, समाज और राजनीतिक परिस्थितियों को समझते हों। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी मध्य प्रदेश को राजनीतिक प्रयोगशाला की तरह इस्तेमाल कर रही है और स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर बाहरी नेताओं को आगे बढ़ा रही है।
सज्जन सिंह वर्मा का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं और दोनों प्रमुख दलों में दावेदार सक्रिय हो चुके हैं। प्रदेश की राजनीति में अब “स्थानीय बनाम बाहरी” का मुद्दा भी जोर पकड़ने लगा है।
“मध्य प्रदेश को चारागाह की तरह इस्तेमाल कर रही भाजपा”
सज्जन सिंह वर्मा ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी को “हॉर्स ट्रेडिंग” की आदत पड़ चुकी है और अब वह मध्य प्रदेश को राजनीतिक चारागाह की तरह इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव पूरी पारदर्शिता और राजनीतिक नैतिकता के साथ होना चाहिए क्योंकि यह सदन देश की नीतियों और कानूनों को दिशा देता है।
वर्मा ने कहा कि भाजपा नेतृत्व प्रदेश के मेहनती और लंबे समय से संगठन में काम कर रहे कार्यकर्ताओं को पर्याप्त सम्मान नहीं देता। उनका आरोप था कि स्थानीय नेताओं को किनारे कर ऐसे चेहरों को आगे किया जाता है जिनका प्रदेश की राजनीति से कोई सीधा संबंध नहीं होता।
उन्होंने कहा कि भाजपा के हजारों कार्यकर्ता वर्षों से संगठन के लिए मेहनत करते हैं, लेकिन जब राज्यसभा जैसी जिम्मेदारियों की बात आती है तो बाहर से नेताओं को लाकर मौका दिया जाता है। इससे कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ती है।
जॉर्ज कुरियन और मुरुगन का जिक्र कर साधा निशाना
सज्जन सिंह वर्मा ने अपने बयान में विशेष रूप से भाजपा नेताओं जॉर्ज कुरियन और एल. मुरुगन का नाम लेते हुए सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं का प्रदेश की राजनीति से सीधा जुड़ाव नहीं है या जो अपने राज्यों में चुनावी संघर्ष का सामना कर चुके हैं, उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजना उचित नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में भाजपा के पास मजबूत संगठन और बड़ा कैडर है। ऐसे में राज्यसभा के लिए प्राथमिकता प्रदेश के उन नेताओं को मिलनी चाहिए जिन्होंने लंबे समय तक जनता और संगठन के बीच काम किया है।
वर्मा ने कहा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा जाने वाला प्रतिनिधि ऐसा होना चाहिए जो प्रदेश के किसानों, युवाओं, उद्योग, रोजगार, आदिवासी क्षेत्रों और विकास से जुड़े मुद्दों को प्रभावी तरीके से संसद में उठा सके।
18 जून को होगा मतदान, तीन सीटों पर चुनाव
मध्य प्रदेश में इस बार राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। इन सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिसके बाद नए प्रतिनिधियों का चुनाव किया जाएगा।
जिन नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है उनमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह, भाजपा के जॉर्ज कुरियन और भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी शामिल हैं। इन तीनों सीटों पर 18 जून को मतदान कराया जाएगा।
चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद राजनीतिक दलों के भीतर गतिविधियां बढ़ गई हैं। संभावित उम्मीदवार सक्रिय हो गए हैं और पार्टी स्तर पर भी समीकरण बनाए जाने लगे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने उम्मीदवारों को लेकर रणनीति तैयार कर रहे हैं।
कांग्रेस की नजर एक सीट पर, भाजपा को दो सीटों का गणित
मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा संख्या बल को देखें तो राज्यसभा चुनाव के समीकरण काफी हद तक स्पष्ट माने जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार तीन सीटों में से दो सीटें भाजपा के खाते में जाती दिखाई दे रही हैं, जबकि कांग्रेस एक सीट जीतने की स्थिति में मानी जा रही है।
सज्जन सिंह वर्मा ने भी कहा कि कांग्रेस अपनी एक सीट पूरी मजबूती और राजनीतिक ईमानदारी के साथ जीतना चाहती है। वहीं भाजपा दो सीटों पर मजबूत स्थिति में है।
हालांकि उम्मीदवारों के नाम सामने आने से पहले राजनीतिक बयानबाजी और आंतरिक खींचतान तेज होने की संभावना है। राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनता मतदान वाला चुनाव नहीं होता, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत दूरगामी माने जाते हैं।
भाजपा में भी बढ़ी दावेदारी
राज्यसभा चुनाव की आहट के साथ भाजपा के भीतर भी दावेदार सक्रिय हो गए हैं। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और संगठन से जुड़े चेहरे राज्यसभा के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हुए हैं।
प्रदेश भाजपा में लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वाले नेताओं के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी स्थानीय चेहरे को प्राथमिकता देती है या फिर राष्ट्रीय रणनीति के तहत किसी अन्य नेता को मौका मिलता है।
इसी मुद्दे को लेकर सज्जन सिंह वर्मा ने भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि यदि पार्टी फिर बाहरी चेहरों को आगे करती है तो यह प्रदेश के कार्यकर्ताओं के साथ न्याय नहीं होगा।
बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा बना राजनीतिक बहस
राज्यसभा चुनाव से पहले अब “बाहरी बनाम स्थानीय” का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस इस मुद्दे के जरिए भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह मुद्दा सिर्फ राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आगामी राजनीतिक समीकरणों और संगठनात्मक फैसलों पर भी असर डाल सकता है।
प्रदेश में लंबे समय से काम कर रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा पहले भी उठती रही है कि राज्यसभा में स्थानीय प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
12 राज्यों की 26 सीटों पर होंगे चुनाव
चुनाव आयोग ने देश के 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर चुनाव कराने की घोषणा की है। इन सीटों पर 18 जून को मतदान होगा।
राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो इस चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की नजरें टिकी हुई हैं। राजनीतिक आकलनों के अनुसार इस चुनाव में एनडीए को एक सीट का नुकसान हो सकता है, जबकि विपक्षी गठबंधन को कुछ सीटों पर लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
इन सीटों में विभिन्न राज्यों की रिक्त हो रही सीटें शामिल हैं और चुनाव परिणाम राज्यसभा के भविष्य के समीकरणों पर असर डाल सकते हैं।
मध्य प्रदेश की तीन सीटों पर होने वाला चुनाव भी राष्ट्रीय राजनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां उम्मीदवार चयन और राजनीतिक संदेश दोनों पर नजर रहेगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा और कांग्रेस किन चेहरों पर भरोसा जताती हैं और क्या स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा उम्मीदवार चयन को प्रभावित कर पाएगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस