ट्विशा शर्मा के शव का AIIMS में दूसरा पोस्टमॉर्टम शुरू,छावनी बना भोपाल AIIMS, अब सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई
ट्विशा शर्मा मौत मामले में कड़ी सुरक्षा के बीच रविवार को एम्स भोपाल में एम्स दिल्ली की एक उच्च-स्तरीय फोरेंसिक टीम की ओर से शव का दूसरी बार पोस्टमार्टम किया जा रहा है।
ट्विशा शर्मा मौत मामले पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई होगी. कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है. उससे पहले रविवार को ट्विशा की बाॅडी का दूसरी बार पोस्टमार्टम एम्स दिल्ली की चार सदस्यीय टीम कर रही है.
ट्विशा शर्मा केस: AIIMS भोपाल में दूसरे पोस्टमॉर्टम से जांच तेज, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बढ़ी पारदर्शिता
भोपाल में सामने आए ट्विशा शर्मा मौत मामले ने पूरे प्रदेश में गंभीर चर्चा छेड़ दी है। इस संवेदनशील प्रकरण में अब जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है, क्योंकि रविवार को एम्स भोपाल में दूसरी बार पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया शुरू की गई। यह पूरा कार्य उच्च सुरक्षा व्यवस्था और न्यायिक निगरानी के बीच किया जा रहा है।
एम्स दिल्ली की विशेषज्ञ फोरेंसिक टीम, फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख के नेतृत्व में, शनिवार देर शाम विशेष विमान से भोपाल पहुंची थी। यह टीम सीधे AIIMS Delhi से भेजी गई है, जिसे उच्च न्यायालय के आदेश के बाद गठित किया गया है।
कड़ी सुरक्षा में पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया
एम्स भोपाल परिसर, जो कि AIIMS Bhopal के अंतर्गत आता है, रविवार को पूरी तरह छावनी में तब्दील नजर आया। सुरक्षा एजेंसियों ने अस्पताल परिसर में प्रवेश और आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी।
चार सदस्यीय मेडिकल बोर्ड, जो AIIMS Delhi के निदेशक की निगरानी में गठित किया गया है, शव का पुनः परीक्षण कर रहा है। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की पारदर्शिता पर सवाल न उठ सके।
मामला कैसे शुरू हुआ
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा को 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में उनके ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में फंदे से लटका हुआ पाया गया था।
परिजनों का आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि एक गंभीर आपराधिक घटना है। उनका कहना है कि शादी के कुछ ही महीनों बाद से ही ट्विशा पर दहेज को लेकर दबाव और मानसिक प्रताड़ना की जा रही थी।
लगभग पांच महीने पहले ट्विशा की शादी वकील समर्थ सिंह से हुई थी। परिवार का आरोप है कि विवाह के बाद से ही परिस्थितियां लगातार बिगड़ती गईं।
परिजनों के आरोप और मांग
ट्विशा के परिवार ने शुरुआत से ही निष्पक्ष जांच और दूसरे पोस्टमॉर्टम की मांग की थी। उनका कहना है कि पहले किए गए पोस्टमॉर्टम से वे संतुष्ट नहीं थे और कई अहम सवालों के जवाब अधूरे रह गए थे।
ट्विशा के पिता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस बार जांच में पूरी सच्चाई सामने आएगी और न्याय मिलेगा। वहीं परिवार के अन्य सदस्यों ने भी कहा कि वे अंतिम निर्णय पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर ही लेंगे।
आरोपी पक्ष और पुलिस कार्रवाई
इस मामले में ट्विशा के पति समर्थ सिंह पर गंभीर आरोप लगे हैं। वह कुछ दिनों तक फरार रहने के बाद हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुका है। अदालत ने उसे पुलिस रिमांड पर भेज दिया है ताकि पूछताछ की जा सके।
इसके अलावा समर्थ की मां गिरिबाला सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय घर में क्या परिस्थितियां थीं और क्या किसी प्रकार की साजिश या दबाव का मामला था।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी
इस पूरे मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच लिया है। Supreme Court of India ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इसे “ससुराल में हुई संदिग्ध मौतों में संस्थागत पक्षपात और प्रक्रियागत खामियों” से जुड़ा मामला मानते हुए अपने रिकॉर्ड में दर्ज किया है। अदालत ने संकेत दिया है कि ऐसी घटनाओं में जांच प्रक्रिया की गंभीर समीक्षा की आवश्यकता है।
कोर्ट की एक विशेष पीठ 25 मई को इस मामले की सुनवाई करेगी। इस सुनवाई से जांच की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रशासन का कहना है कि पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से की जा रही है, ताकि किसी भी तरह का संदेह न रहे।
परिवार की उम्मीदें और भावनात्मक स्थिति
ट्विशा के भाई, जो भारतीय सेना में मेजर हैं, ने कहा कि परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है और अंतिम संस्कार का निर्णय पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद लिया जाएगा।
परिजनों ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे कठिन समय है, लेकिन उन्हें न्याय व्यवस्था पर भरोसा है। परिवार का मानना है कि इस बार सच्चाई सामने आना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
आगे की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरा पोस्टमॉर्टम इस मामले में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। इससे यह स्पष्ट होने की संभावना है कि मौत आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या किसी आपराधिक घटना का परिणाम।
अब सभी की निगाहें Supreme Court of India की आगामी सुनवाई और एम्स की फॉरेंसिक रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।
ट्विशा शर्मा मामला केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं बल्कि एक बड़े सामाजिक और न्यायिक सवाल की ओर इशारा करता है। यह केस यह भी दिखाता है कि कैसे पारदर्शी जांच और वैज्ञानिक पोस्टमॉर्टम न्याय प्रणाली में विश्वास बहाल कर सकते हैं।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह मामला किस दिशा में जाता है, लेकिन फिलहाल पूरा देश इस केस पर नजर बनाए हुए है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस