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मोदी सरकार की दूसरी पारी का आज आखिरी पूर्ण बजट, देश को ये 5 बड़ी उम्मीदें।

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 देश का आम बजट 2023 (Union Budget 2023) पेश होने में महज कुछ घंटों का समय बाकी रह गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) सुबह 11 बजे वित्त वर्ष 2023-24 का वित्तीय लेखा-जोखा पेश करेंगी. पूरे देश की निगाहें बजट में की जाने वाली घोषणाओं पर लगी हैं. दरअसल, ये बजट मौजूदा केंद्र सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है. इस लिहाज से लोगों की उम्मीदें भी इससे अधिक है कि सरकार उन्हें क्या तोहफा देने जा रही है? आइए बजट से जुड़ी बड़ी उम्मीदों पर नजर डालते हैं... Taxpayers को छूट की आस सबसे पहले और सबसे बड़ी उम्मीद देश के टैक्सपेयर्स को रहती है कि सरकार उन्हें कुछ छूट देगी. बीते साल के बजट में टैक्स छूट को लेकर कोई ऐलान नहीं किया गया था, ऐसे में टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि अगले साल होने वाले 2024 आम चुनाव से पहले अपने आखिरी पूर्ण बजट में वित्त मंत्री के पिटारे से टैक्स छूट का तोहफा निकलेगा, जो उन्हें मंहगाई से राहत देने वाला साबित होगा. बता दें साल 2014 में अंतिम बार तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने टैक्स छूट की सीमा बढ़ाई थी. 8 साल से टैक्स की सीमा नहीं बढ़ाई गई है और इस बार टैक्स स्लैब

मंदी के साये में दुनिया, अब RBI के फैसले से तय होगा भारत का भविष्य!

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 अमेरिका के सेंट्रल बैंक फेड रिजर्व द्वारा लगातार तीसरी बार ब्याज दर बढ़ाए जाने के बाद अब लगभग तय मान लिया गया है कि दुनिया फिर से मंदी की चपेट में आने वाली है। इस बात पर अमेरिकी अर्थशास्त्री और 2008 मंदी की सटीक भविष्यवाणी करने वाले नूरील रूबिनी ने भी मुहर लगा दी है। इस माहौल के बीच अब सवाल है कि क्या इससे भारत प्रभावित होगा, या भारत किसी तरकीब के जरिए खुद को मंदी से बचाए रख सकता है? ऐसे तमाम सवालों के जवाब केंद्रीय रिजर्व बैंक की आगामी बैठक में मिलने की उम्मीद की जा रही है। आरबीआई की बैठक: दरअसल, रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक 28 सितंबर से शुरू होगी। मौद्रिक नीति समीक्षा 30 सितंबर को पेश की जाएगी। ऐसा माना जा रहा है कि महंगाई कंट्रोल के लिए केंद्रीय रिजर्व बैंक एक बार फिर रेपो रेट में बढ़ोतरी करने के मूड में है। अलग-अलग बैंकों और विश्लेषक फर्मों से जुड़े अर्थशास्त्रियों की आम राय है कि आरबीआई रेपो रेट में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि का फैसला कर सकता है। ऐसा होने पर रेपो रेट बढ़कर 5.90 प्रतिशत हो जाएगी। क्या हैं मायने: केंद्रीय रिजर्व बैंक रेपो रेट में बढ़ोतरी महंगाई

रिजर्व बैंक ने 4 बैंक पर लगाया बैन, अब पैसे की निकासी हुई सीमित

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 भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने अब चार बैंकों पर प्रतिबंध लगाया है. ये ग्राहकों के लिए काफी बड़ा झटका है. इन चार बैंकों से जुड़े ग्राहक अब RBI के जरिए तय की गई लिमिट से ही पैसों की निकासी कर सकते हैं. आरबीआई ने साईबाबा जनता सहकारी बैंक, द सूरी फ्रेंड्स यूनियन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, सूरी (पश्चिम बंगाल) और बहराइच के नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर प्रतिबंध लगाया है. इन बैंकों की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया है.  पैसे निकासी पर रोक  साईबाबा जनता सहकारी बैंक के जमाकर्ता 20,000 रुपये से अधिक नहीं निकाल सकते है. वहीं सूरी फ्रेंड्स यूनियन को-ऑपरेटिव बैंक के लिए यह सीमा 50,000 रुपये है जबकि नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक के मामले में निकासी की सीमा प्रति ग्राहक 10,000 रुपये कर दी है.  6 महीने तक लागू रहेंगे नियम RBI ने बिजनौर स्थित यूनाइटेड इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक (Co-Operative Bank) लिमिटेड पर कई प्रतिबंध सहित ग्राहकों द्वारा धन निकासी पर रोक लगा दी है. केंद्रीय बैंक द्वारा 4 सहकारी बैंकों को यह निर्देश बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत जारी किए है. ज

GST के दायरे में नहीं आएगा पेट्रोल-डीजल- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

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  अंजना मिश्रा प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस  जीएसटी काउंसलि की 45वीं बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि अभी पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का सही वक्त नहीं है। वित्त मंत्री लखनऊ में हुई इस बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। उन्होंने कहा कि केरल हाई कोर्ट के आदेश के बाद अजेंडे में यह मुद्दा आया था लेकिन राज्यों ने इसका विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई लेकिन राज्य नहीं चाहते कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट को इस दायरे में लाया जाए। सीतारमण ने जीएसटी परिषद की बैठक में किये गये फैसलों की जानकारी देते हुए कहा, ‘‘कोविड उपचार में उपयोग होने वाली दवाओं पर लागू रियायती जीएसटी दरों का समय 31 दिसंबर, 2021 तक बढ़ा दिया है। परिषद ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं पर कर दर को 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने का भी निर्णय किया है। काउंसिल ने मस्कुलर एट्रॉफी के इलाज में उपयोग में आने वाली दवाओं को भी जीएसटी में छूट दी है। ये दवाएं बहुत महंगी होती हैं और इनकी कीमत करीब 16 करोड़ रुपये है। व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए आयात की जाने वाली दवाओं

पस्त इकनॉमी के बीच सार्वजनिक उद्यम बेचना मानसिक दिवालियापन के संकेत, GDP ग्रोथ गिरती रही…इससे मोदी सरकार नहीं कर सकती इन्कार- बोले BJP सांसद

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 भारतीय जनता पार्टी (BJP) से राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यन स्वामी अक्सर मोदी सरकार पर निशाना साधते रहते हैं। रविवार को एक ट्वीट कर उन्होंने सार्वजनिक उद्यम को बेचे जाने पर सवाल खड़े किए। उन्हों कहा कि ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था लगातार गिर रही है, सार्वजनिक उद्यम बेचना मानसिक दिवालियापन है। स्वामी ने ट्वीट कर लिखा, “जब देश की अर्थव्यवस्था में गहरी गिरावट हो रही है ऐसे समय में सार्वजनिक उद्यम को बेचना मानसिक दिवालियापन और हताशा का संकेत है। यह एक अच्छी सोच नहीं है। मोदी सरकार इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि सीएसओ के आंकड़े बताते हैं कि 2016 के बाद से जीडीपी की ग्रोथ माही तिमाही दर साल गिरती रही है। स्वामी के इस ट्वीट पर यूजर्स भी अपनी प्रतिकृया दे रहे हैं। श्रीधर नाम के एक यूजर ने भाजपा नेता से पूछा कि तो ऐसे समय में क्या करना चाहिए? इसपर स्वामी ने लिखा, “उद्देश्यों, प्राथमिकताओं, रणनीति और संसाधन जुटाने के स्पष्ट विवरण के आधार पर प्रासंगिक आर्थिक नीति लागू करें। डिटेल्स के लिए, रूपा द्वारा प्रकाशित मेरी पुस्तक रीसेट पढ़ें। एक अन्य यूजर ने लिखा, “रघुराम राजन ने सलाह देने की को

क्रिप्टोकरेंसी पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताई जरूरी बात, यहां जानिए पूरी डिटेल

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डिजिटल मुद्राओं से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करने और विशिष्ट कार्यों का प्रस्ताव पेश करने के लिए आर्थिक मामलों के सचिव की अध्यक्षता में गठित क्रिप्टोकरेंसी संबंधित अंतर-मंत्रालयी पैनल ने अपनी रिपोर्ट पहले ही जमा कर दी है। सीतारमण ने कहा कि वह क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े विधेयक पर मंत्रिमंडल की मंजूरी का इंतजार क्रिप्टोकरेंसी संबंधित अंतर-मंत्रालयी पैनल ने अपनी रिपोर्ट पहले ही जमा कर दी है रिपोर्ट में अन्य सभी निजी क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने की सिफारिश की गई हैनई दिल्ली वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ने सोमवार को कहा कि वह क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े विधेयक को लेकर मंत्रिमंडल की मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। प्रस्तावित विधेयक उसके सामने है। डिजिटल मुद्राओं से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करने और विशिष्ट कार्यों का प्रस्ताव पेश करने के लिए आर्थिक मामलों के सचिव की अध्यक्षता में गठित क्रिप्टोकरेंसी संबंधित अंतर-मंत्रालयी पैनल ने अपनी रिपोर्ट पहले ही जमा कर दी है वोडाफोन आइडिया के संकट वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (वीआईएल) बंदी के कगार पर पहुंचने से रोकने के लिए सरकार

अर्थव्यवस्था: जानें तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच GDP और महंगाई पर आरबीआई ने क्या जताया अनुमान

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  आज मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने महंगाई और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर पर अनुमान जताया। शक्तिकांत दास ने कहा कि टीकाकरण से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। टीकाकरण बढ़ने से आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं। जून के मुकाबले जुलाई में आर्थिक सुधार बेहतर रहा। लेकिन कोरोना की तीसरी लहर के प्रति चौकन्ना रहने की जरूरत है। इतनी रह सकती है जीडीपी की वृद्धि दर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2021-22 के लिए RBI द्वारा अनुमानित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 9.5 फीसदी है। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह 21.4 फीसदी होगी, दूसरी तिमाही में 7.3 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.3 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.1 फीसदी। शक्तिकांत दास ने कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में देश की वास्तविक जीडीपी 17.2 फीसदी रह सकती है। वित्त वर्ष 2020-21 में आई थी 7.3 फीसदी की गिरावट  पहले रिजर्व बैंक ने 2021-22 के दौरान आर्थिक वृद्धि को 10.5 फीसदी पर रहने का अनुमान लगा

महंगाई ने छीना निवाला: दिल्ली का हर दूसरा आदमी बेरोजगार, हरियाणा-राजस्थान के हर तीसरे व्यक्ति के पास नहीं है कोई काम

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 सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के अनुसार इस समय राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर में कुछ सुधार आया है। अब यह 10.8 फीसदी पर पहुंच गया है। मई माह के अंत में यह 11.9 फीसदी पर पहुंच गया था... योग दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश-दुनिया को योग करने का संदेश दिया। लेकिन उनका ये संदेश उन लोगों के बहुत काम का नहीं है जिनके पास इस समय कोई नौकरी नहीं है और इस बढ़ती महंगाई ने उनके मुंह का निवाला छीन लिया है। आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के कारण इस समय बेरोजगारी चरम पर है। देश की राजधानी दिल्ली में बेरोजगारी दर 45.6 फीसदी तक पहुंच गई है, यानि यहां का लगभग हर दूसरा आदमी बेरोजगार है। हरियाणा में बेरोजगारी दर 29.1 फीसदी, तमिलनाडु में 28 फीसदी और राजस्थान में 27.6 फीसदी हो गई है। इसका अर्थ है कि इन राज्यों में लगभग हर तीसरे व्यक्ति के पास कोई काम नहीं है। बेरोजगारी कितनी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के अनुसार इस समय राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर में कुछ सुधार आया है। अब यह 10.8 फीसदी पर पहुंच गया है। मई माह के अंत में यह 11.9 फीसदी पर पहुंच गया था। शह

कमर तोड़ महंगाई: पेट्रोल-डीजल ही नहीं, खाद्य तेलों की कीमत से भी जनता हलकान, क्या करेगी सरकार?

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 भारत में एक साल में खाद्य तेलों की कीमत 50 फीसदी बढ़ी है। मई 2021 में कीमतें 10 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची। भारत अपनी कुल खाद्य तेल की जरूरत का 70 फीसदी हिस्सा विदेशों से आयात करता है। देश में तेल की कीमतों ने आसमान छू लिया है। चाहे बात पेट्रोल-डीजल की हो या खाद्य तेलों की, बढ़ती महंगाई ने जनता की कमर तोड़ दी है। कोरोना काल में लोगों का बजट तो बिगड़ा ही है, अब खाद्य तेलों की कीमत ने भोजन का जायका भी बिगाड़ दिया है। लोगों के लिए घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। पिछले एक साल में खाने वाले तेल की कीमतों में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। 10 साल के उच्चतम स्तर पर तेल की कीमतें मई 2021 में खाने के तेल की कीमतें 10 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंची। सरकारी डाटा के अनुसार, जून 2020 से जून 2021 के बीच ग्राउंडनट ऑयल की कीमतें करीब 20 फीसदी, सरसों के तेल की कीमत करीब 50 फीसदी, वनस्पति तेल की कीमत 45 फीसदी और सनफ्लावर, पाम तेल की कीमतें करीब 60 फीसदी बढ़ी हैं। जो तेल एक साल पहले 90 से 100 रुपये प्रति लीटर के दाम पर बिक रहा था, वह अब 150 से 160 रुपये का हो गया है। तेल के लिए दूसरे देशों पर निर्

अर्थव्यवस्था में 7.3 प्रतिशत की गिरावट, विपक्ष ने कहा- चार दशक का ‘सबसे अंधकारमय’ साल

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 राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के आंकड़े के अनुसार, देश का वास्तविक जीडीपी वित्त वर्ष 2020-21 में घटकर 135 लाख करोड़ रुपये रहा, जो मार्च 2020 को समाप्त वित्त वर्ष में 145 लाख करोड़ रुपये था. वहीं 2020-21 के दौरान राजकोषीय घाटा जीडीपी का 9.3 प्रतिशत रहा, जो 9.5 प्रतिशत के संशोधित अनुमान से कम है. हालांकि फरवरी 2020 में पेश बजट के दौरान इसके 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया था. सरकार ने कुल प्राप्तियों के मुक़ाबले दोगुने से भी अधिक व्यय किया है. नई दिल्ली: देश की अर्थव्यवस्था (जीडीपी) में मार्च 2021 को समाप्त वित्त वर्ष में 7.3 प्रतिशत की गिरावट आई है. साल 1947 में आजादी के बाद से ये पहला ऐसा मौका है, जब भारत की अर्थव्यवस्था में इतनी बड़ी गिरावट आई है.  कांग्रेस ने वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान अर्थव्यवस्था में गिरावट होने पर चिंता प्रकट करते ही केंद्र सरकार की आलोचना की है. कांग्रेस ने इसे चार दशक का ‘सबसे अंधकारमय’ साल करार दिया है. एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 2020-21 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 1.6 प्रतिशत रही. यह इससे पिछली तिमाही अक्टूबर-दिसंबर 2020 में

अजीज प्रेमजी विवि का दावा- कोरोना से अर्थव्यवस्था चौपट, 23 करोड़ लोगों के लिए 375 रुपये की दिहाड़ी कमानी हुई मुश्किल

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  देश के 23 करोड़ लोगों की दिहाड़ी प्रभावित होने पर देश की अर्थव्यवस्था में काफी नुकसान होने की संभावना है। कम आमदनी के कारण लोगों के खर्च प्रभावित होने पर विकास दर भी प्रभावित होगी। मजदूर पिछले लॉकडाउन से अभी उबरा भी नहीं था कि वह फिर लॉकडाउन में फंसा है। मजदूरो की मंडियां फिर सूनी हो गई हैं। वैसे भी पिछले लॉकडाउन के खुलने के बाद भी कॉन्स्ट्रक्शन वर्क में तेजी नहीं आ पाई थी। अब अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय ने दावा किया है कि करीब 23 करोड़ लोगों के लिए पौने तीन सौ की दिहाड़ी भी मुश्किल हो गई है।  देश के 23 करोड़ लोगों की दिहाड़ी प्रभावित होने पर देश की अर्थव्यवस्था में काफी नुकसान होने की संभावना है। कम आमदनी के कारण लोगों के खर्च प्रभावित होने पर विकास दर भी प्रभावित होगी। हालांकि ऑक्सफैम ने कहा है कि शायद इसके बाद भी भारत सबसे तेज विकसित हो रही अर्थव्यव्सथाओं में शुमार कर लिया जाए। लेकिन यह ऐसा देश होगा जो सर्वाधिक असामान होंगे। हालांकि कुछ ऐसी कंपनियां हैं जो भविष्य को लेकर आशान्वित हैं। ब्लैकस्टोन ग्रुप इन्क. कंपनी के चेयरमैन स्टीफन श्वार्जमन का मानना है कि वे आगे अच्छा भविष्य देख रहे

अर्थव्यवस्था पर फिर से कोरोना की मार, नाइट कर्फ्यू वाले राज्यों में सर्विस सेक्टर से जुड़े उद्योगों पर असर

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  भारत में तेजी से फैल रहा कोरोनावायरस रोज सामने आ रहे एक लाख से ज्यादा केस अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा कोरोना का असर नई दिल्ली:  देश में कोरोनावायरस (Coronavirus) के बढ़ते मामले कमजोर पड़ी  अर्थव्यवस्था  के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं. जानकर मानते हैं कि कोरोना संकट से निपटने के लिए जिस तरह से कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू (Night Curfew) और पार्शियल लॉकडाउन (Lockdown) लगाया जा रहा है, उसका असर व्यापार और कारोबार के साथ-साथ सर्विसेज सेक्टर, विशेषकर टूरिज्म और ट्रैवल इंडस्ट्री पर पड़ना शुरू हो गया है. सबसे ज्यादा असर ट्रैवल और टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े छोटे-लघु उद्योग की इकाइयों पर पड़ रहा है. छोटे-लघु उद्योग संघ के सेक्रेटरी जनरल अनिल भारद्वाज ने NDTV से कहा, 'इन सेक्टरों पर पिछले साल सबसे ज्यादा असर पड़ा था.  कोरोना  के बढ़ते मामलों के चलते अब ये फिर संकट में फंस सकते हैं.' उन्होंने आगे कहा, 'साल 2020-21 में जो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे, उन पर फिर सबसे ज्यादा नेगेटिव इम्पैक्ट होगा. नाइट कर्फ्यू जैसे ही आप लगाते हैं तो पार्टीज पर रोक लगती है, बैंक्वेट हॉल्स प्रभावित हो

रघुराम राजन ने मोदी सरकार को चेताया, औद्योगिक घरानों को बैंक बेचना भारी गलती होगी

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 रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का मोदी सरकार द्वारा बैंकों के निजीकरण पर बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा है कि निजीकरण करने के मामले में सरकार का रिकार्ड उतार-चढ़ाव से भरा है; औद्योगिक घरानों को बैंक बेचना भारी गलती होगी। बता दें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में इस बात का ऐलान किया था कि सरकार इस साल 2 सरकारी बैंकों और एक बीमा कंपनी के निजीकरण का फैसला किया है। साल 2019 में सरकार ने LIC में IDBI Bank का बड़ा हिस्सा बेचा था। बता दें अभी देश में 12 सरकारी बैंक हैं। दो बैंकों का निजीकरण वित्त वर्ष ईयर 2021-22 में किया जाएगा। इस प्राइवेटाइजेशन के बाद इनकी संख्या घटकर 10 रह जाएगी।  मौद्रिक नीति प्रणाली में किसी बड़े बदलाव से बांड बाजार प्रभावित होगाभारतीय अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे महामारी के झटके से बाहर निकल रही है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चेताया है कि देश के मौद्रिक नीति के ढांचे में किसी तरह के बड़े बदलावों से बांड बाजार प्रभावित हो सकता है।  राजन ने रविवार को कहा कि मौजूदा व्यवस्था ने मुद्रास्फीति को काबू में रखने और वृद्धि को प्रोत्स

होम लोन की ब्याज दरें सबसे निचले स्तर पर:कौन दे रहा है सबसे कम ब्याज पर लोन और क्या यह घर खरीदने के लिए सही समय है?

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 घर खरीदने वालों को लोन देने के लिए बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के बीच होड़ लगी है। हाल ही में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), HDFC, कोटक महिंद्रा और ICICI बैंक ने होम लोन की ब्याज दरें बहुत कम कर दी हैं। अन्य बैंक भी लगातार होम लोन की दरें कम कर रहे हैं, जिससे होम लोन की ब्याज दरें पिछले 15 सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। कोटक महिंद्रा बैंक ने अपने होम लोन की दरों को घटाकर 6.65% कर दिया है, जो कि सबसे कम है। बैंक ने कहा है कि यह दर सैलरी पाने वालों और फ्रीलांस काम करने वाले दोनों ही तरह के लोन लेने वालों को फायदा पहुंचाएगी। होम लोन के लिए आकर्षित करने के लिए SBI दे रहा है भारी छूट SBI ने भी होम लोन पर न्यूनतम ब्याज दर को 6.70% (यह ऑफर 31 मार्च, 2021 तक ही है) कर दिया है। जिसके बाद HDFC और ICICI बैंक ने भी ने भी होम लोन की ब्याज दरें घटा दीं हैं। इससे होम लोन की ब्याज दरें रिकॉर्ड स्तर पर कम हो गई हैं। स्टेट बैंक तो लोन प्रोसेसिंग फीस पर भी 100% की छूट दे रहा है। हालांकि लोन की ब्याज दर अब भी लोन की रकम और लोन लेने वाले के CIBIL स्कोर पर ही निर्भर रहेगी। स्टेट बैंक की ओर से

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट: अनुमान से कम रह सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था में गिरावट

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 वित्त मंत्रालय ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन आठ फीसदी की गिरावट के अनुमान से बेहतर रहेगा। वित्त मंत्रालय ने कहा कि महामारी के रुख में ठकराव तथा टीकाकरण शुरू होने के बाद अब आर्थिक गतिविधियां रफ्तार पकड़ रही हैं। टीकाकरण के बाद उपभोक्ताओं की धारणा सुधरी आर्थिक मामलों के विभाग ने अपनी मासिक रिपोर्ट में कहा कि विकसित देशों में कोविड-19 की नई लहर और संक्रमण के नए प्रकार के बाद नए सिरे से लॉकडाउन लगाया गया है, जिससे वैश्विक उत्पादन में सुधार की रफ्तार कम हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में कोविड-19 के संक्रमण में गिरावट के ग्राफ में हल्के ठहराव के बाद भी गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ी है और उपभोक्ताओं के आत्मविश्वास में सुधार नहीं डिगा है। टीकाकरण अभियान के बाद उपभोक्ताओं की धारणा सुधरी है। सामाजिक टीका भी जरूरी रिपोर्ट में कहा गया है कि सामाजिक दूरी एक सामाजिक टीके की तरह है। भारत और दुनिया में तेजी से पुनरुद्धार के लिए इस पर लगातार ध्यान दिया जाना चाहिए। कोविड-19 टीके के विकास के बाद कई बार इसे नजरअंदाज किया जाता है। लेकिन कोविड-19 के टीके के

देश को क्यों पड़ी निजीकरण की जरूरत?

  अर्चना शर्मा संपादक प्रखर न्यूज व्यूज एक्सप्रेस भोपाल वर्ष 1991 में भारत को विदेशी कर्ज के मामले में संकट का सामना करना पड़ा। सरकार अपने विदेशी कर्ज का भुगतान करने की स्थिति में नहीं थी। पेट्रोल आदि आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए सामान्य रूप से रखा गया विदेशी मुद्रा रिशर्व 15 दिनों के लिए आवश्यक आयात का भुगतान करने योग्य भी नहीं बचा था। इस संकट को आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने और भी गहन बना दिया था। इन सभी कारणों से सरकार ने कुछ नई नीतियों को अपनाया और इसने हमारी विकास रण-नीतियों की संपूर्ण दिशा को ही बदल दिया। इस वित्तीय संकट का वास्तविक स्रोत 1980 के दशक में अर्थव्यवस्था में अकुशल प्रबंधन था। सामान्य प्रशासन चलाने और अपनी विभिन्न नीतियों के क्रियान्वयन के लिए सरकार करों और सार्वजनिक उद्यम आदि के माध्यम से फंड जुटाती है। जब व्यय आय से अधिक हो तो सरकार बैंकों, जनसामान्य तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से उधार लेने को बाध्य हो जाती है। इस प्रकार वह अपने घाटे का वित्तीय प्रबंध कर लेती है। कच्चे तेल आदि के आयात के लिए हमें डॉलर में भुगतान करना होता है और ये डॉलर हम अपने उत्पा

मोदी का पाँच ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था का सपना 2025 तक हो सकेगा पूरा?

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 23 जनवरी, 2018 को पहली बार भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024-25 तक भारतीय अर्थव्यवस्था को पाँच ट्रिलियन डॉलर तक पहुँचाने की अपने महत्वाकांक्षी सपने को सार्वजनिक किया था. वे दावोस में वर्ल्ड इकॉनामिक फ़ोरम की बैठक में अंतरराष्ट्रीय नेताओं को संबोधित कर रहे थे. प्रधानमंत्री के विज़न को ध्यान में रखते हुए 2018-19 का आर्थिक सर्वे तैयार किया गया था, जिसमें उम्मीद जताई गई थी कि 2020-21 से लेकर 2024-25 तक भारत की अर्थव्यवस्था आठ प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ेगी. यह माना गया था कि जीडीपी में औसत वृद्धि दर 12 प्रतिशत के आसपास होगी जबकि महंगाई की दर चार प्रतिशत रहेगी. मार्च, 2025 में एक डॉलर का मूल्य 75 रुपये तक पहुँचने का अनुमान लगाया गया था. जीडीपी की वृद्धि दर का आकलन सामान और सेवाओं के मौजूदा दर के आकलन के आधार पर होता है. जबकि वास्तविक जीडीपी का आकलन मंहगाई दर को घटा कर आंका जाता है. यही वजह है कि लंबे समय में वास्तविक जीडीपी के आंकड़े से अर्थव्यवस्था की बेहतर स्थिति का अंदाज़ा होता है. अगर भारत इस लक्ष्य को हासिल करने में कामयाब होता है तो वह जर्मनी को पछाड़कर अमेरिका, चीन और जापान के

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट: कोविड-19 टीके का केंद्र बना भारत, जानिए कैसा होगा अर्थव्यवस्था का हाल

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 वित्त मंत्रालय की एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वृद्धि व मुद्रास्फीति के परिदृश्य 2021-22 में अर्थव्यवस्था के पूर्ण पुनरुद्धार से भी अधिक अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद जगाते हैं। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी मासिक आर्थिक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत दुनिया के लिए कोविड-19 टीके का केंद्र बन गया है।  समावेशी वृद्धि को मिलेगी ताकत  रिपोर्ट में कहा गया है, 'केंद्रीय बजट 2021-22 में घोषित उपायों के साथ की संरचनात्मक सुधारों और आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत नीतिगत मदद से व्यापक आधार पर समावेशी वृद्धि को ताकत मिलेगी। इनसे देश आने वाले वित्त वर्ष में मजबूत और टिकाऊ वृद्धि की राह पर लौट आएगा।' रिपोर्ट में कहा गया कि वृद्धि व मुद्रास्फीति के परिदृश्य 2021-22 में पुनरुद्धार से अधिक की उम्मीद जगाते हैं। चालू वित्त वर्ष में 7.7 फीसदी गिरावट का अनुमान कोरोना वायरस महामारी के चलते चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था में 7.7 फीसदी की गिरावट आने की आशंका है। पिछले दिनों संसद में प्रस्तुत वार्षिक आर्थिक समीक्षा में 2021-22 में वृद्धि दर 11 फीसदी पर पहुंच जाने की उम्मीद व्यक्त की गई

बजट 2021-बजट में हुए ये बड़े ऐलान, जानें किस सेक्टर को क्या मिला?

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 नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) सोमवार (1 फरवरी) को संसद में साल 2021-22 के लिए बजट (Budget 2021) पेश किया. वित्त मंत्री ने बजट में सबसे ज्यादा हेल्थ और इंफ्रास्ट्रक्चर (Health and Infrastructure) पर फोकस किया. इसके बाद उन्होंने बैंकिंग, शिक्षा, इंश्योरेंश और किसान के लिए कई घोषणाएं की. स्वास्थ्य सेक्टर को बजट में क्या मिला - साल 2021-22 के लिए स्वास्थ्य सेक्टर को 2.38 लाख करोड़ रुपये आवंटित होंगे. ऐसे में स्वास्थ्य बजट पिछले साल के मुकाबले 135 फीसदी बढ़ गया है. - कोविड वैक्सीन के लिए साल 2021-22 के लिए 35 हजार करोड़ रुपये रखे गए हैं. अगर जरूरत पड़ी तो और आवंटित किया जाएगा. - केंद्र की एक नई योजना प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना लॉन्च की जाएगी, इस योजना पर 6 वर्षों में करीब 64180 करोड़ खर्च होगा. - वित्त वर्ष 2021-22 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर 223846 करोड़ खर्च होंगे. - मिशन पोषण 2.0 शुरू किया जाएगा और न्यूट्रिशन पर भी ध्यान दिया जाएगा . 5 साल में 2.87 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे. - शहरी स्वच्छ भारत मिशन पर 1.48 लाख करोड़ 5 साल में खर्च होंगे

बजट में बीमा क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणा : FDI की सीमा 49% से बढ़ाकर 74% करने का ऐलान

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  नई दिल्ली: Union Budget 2021 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने बजट में बीमा क्षेत्र के लिए बड़ी घोषणा की है. बीमा क्षेत्र में सरकार ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सीमा (FDI) 49% से बढ़ाकर 74% करने का ऐलान किया है. देश में अभी भी स्वास्थ्य बीमा का दायरा 3-4 फीसदी आबादी तक ही है. ऐसे में बीमा क्षेत्र में एफडीआई बढ़ाने से बड़ा बदलाव आ सकता है, क्योंकि कोविड-19 के बाद लोगों में जीवन बीमा और हेल्थ बीमा के प्रति रुचि बढ़ी है.  वहीं, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा है कि सरकार वित्त वर्ष 2022 में विनिवेश प्रक्रिया तेज करेगी. विनिवेश से करीब 1.75 लाख करोड़ रुपये हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है. सीतारमण ने कहा कि बीपीसीएल, एय़र इंडिया, आईडीबीआई बैंक, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड, इस्पात निगम जैसे तमाम सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. साल 21-22 में एलआईसी के लिए आईपीओ लाने की घोषणा की गई है.  सरकार रणनीतिक और गैर रणनीतिक पीएसयू की पहचान तेज कर चुकी है. सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश की प्रक्रिया तेज की जाएगी. राज्यों के सार्वजनिक उपक