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व्यंग : नमूनों की बारात सज-धज के दवे पैर भाजपा कार्यालय पहुंची।। रविंद्र आर्य

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  सुनील त्रिपाठी सनातनी प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस  ग़ाज़ियाबाद: लेकिन सवाल यें है, भाजपा सांसद प्रत्याशी अतुल गर्ग का कार्यालय कैसे बनता जा रहा है भूखे पेट वालों का लाभान्वित केंद्र?  फिलहाल तो पापी पेट का सवाल है, 26 अप्रैल तक हम तो स्वादिष्ट खाना खाने आयेगे ही ना, क्यों की हम आम आदमी है।।।  अब सवाल यह यहाँ से शुरू हुआ खाने पर झूठ बोलने में माहिर जनता केजरीवाल की राह पर क्यों है, ऐसे आम आदमीयों का कहना है की बीजेपी के वोटर बन हम भाजपा को ही जितायेगे। परन्तु प्रश्नचिह्न यह है की चाहे वोट गुपचुप तरीके से अन्य पार्टियों को दे आये। निशुल्क स्वादिष्ट खाना मिलेगा तो भाजपा कार्यालय मे ही आयेगे, आखिर सवाल तो पापी पेट का है ना, जो भाजपा का कार्यालय भूखो की भूख मिटा रहा है, ओर तो ओर कार्यलय में इस वक्त चुनावी माहौल मे एक से एक नमूने देखे जा सकते है, एक आया, दो आये, तीन आये, देखते ही देखते फिर पुरा खानदान आया, माहौल ऐसा है की दिल्ली, महरोली, पूरब आदि से अपने रिश्तेदारों को स्वादिष्ट खाने के लिए भाजपा कार्यालय मे बुलाया जा रहा है। ओर नमूने इस प्रकार भाजपा कार्यालय में सज-धज कर आते है, जैसे किसी

कल रात मैंने एक सपना देखा...मैं बना कांग्रेस अध्यक्ष! – अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

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  पिछले कई दिनों से समाचार चैनलों, सोशल मीडिया और सुबह टेबल पर रखें अख़बारों में राजनीति की एक खबर कॉमन देखने को मिली, वो थी कांग्रेस के फलां दिग्गज नेता बीजेपी में शामिल हुए। फिर वो बॉक्सिंग का माहिर खिलाड़ी हो या संख्याओं में शून्य खोजने का महारथी प्रवक्ता, नाथ के हनुमान से लेकर नामी व्यवसाइयों तक, पिछले कुछ महीनों में 80 हजार से अधिक विपक्षी नेता अपनी-अपनी पार्टी का दामन झटककर, भारतीय जनता पार्टी की झोली में आ गिरे हैं। और इस गिरावट का सबसे अधिक शिकार कांग्रेस ही हुई है। अब लगातार दिखती एक जैसी खबर ने दिमाग में घर कर लिया था, और इस घर में एक सपने का जन्म हुआ था। चूँकि सपने अक्सर दिनभर की गतिविधियों से जुड़े ही होते हैं, और आपकी भावनाओं को हक़ीकत में बदलने का संसाधन बनते हैं, लिहाजा ये ख्वाब था कांग्रेस अध्यक्ष बनने का, डूबती कांग्रेस का खेवनहार बनने का, हाथ छुड़ाकर दूर जाते साथियों को वापस लाने का, आजादी की लड़ाई में शामिल रही पार्टी को खोया सम्मान पुनः दिलाने का...  इस सपने में कांग्रेस अध्यक्ष बनने के सपने को साकार करने का काम कांग्रेस आलाकमान ने किया और हांसिये पर खिसकती जा रही देश में

क्या वाकई आतंक का अंत हुआ है...?

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  हर्ष बंसल की कलम से  (विचार आलेख)प्रखर न्यूज व्यूज एक्स्प्रेस  प्रयागराज ,कुछ देर पहले मुझे खबर मिली के उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के मेडिकल कॉलेज के बाहर माफिया डॉन अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद को मुठभेड़ में मार दिया गया। मैंने भी पोस्ट डाली "आतंक का अंत, अतीक और अशरफ मारे गए"। पर थोड़ी देर में हर न्यूज़ चैनल, इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अतीक के मर्डर का वीडियो वायरल होने लगा जब मैंने यह वीडियो ध्यान से देखा तो मेरे तो होश ही उड़ गए।  पुलिस अपने साथ में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को मेडिकल के लिए प्रयागराज मेडिकल कॉलेज ले जाया जा रहा था। पुलिस सुरक्षा साथ में थी। अतीक मीडिया को बयान दे रहा था और अचानक से फायरिंग होने लगती है, गुंडे गोलियां चलाने लगते हैं और कुछ ही देर में अतीक और अशरफ दोनों ही लाश के ढेर में बदल जाते हैं। क्या वाकई है आतंक का अंत है या इसे आतंकी की पराकाष्ठा कहेंगे। यह वीडियो मैंने आज तक चैनल की बाइट में देखा। मतलब आपको इस चीज का भी डर नहीं है कि आप पुलिस के सामने एक मुजरिम को गोली मार रहे हैं। मैं इसे आतंक का अंत नहीं कहूंगा, बल्कि इसे एक नये आतंक के रू

काला अक्षर इंसान बराबर..... - अतुल मलिकराम (समाजसेवी)

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  प्रखर न्यूज व्यूज एक्सप्रेस   विचार आलेख ,कल शाम खुद के साथ समय बीता रहा था, तो मन में ख्याल मुहावरों के आने लगे, जिनका उपयोग हम इंसान अक्सर अपनी बात का वजन बढ़ाने के लिए किया करते हैं। एकाएक ही मन अलग दिशा में चला गया कि इंसान अपनी बात को मजबूत करने के लिए बेज़ुबान तक को भी नहीं छोड़ता है। ऐसे हजारों मुहावरे भरे पड़े हैं, जिन्हें बोलते समय इन निर्दोषों को हम क्या कुछ नहीं कह जाते हैं। और आज से नहीं, कई वर्षों से ही कहते चले आ रहे हैं। फिर मन में एक टीस उठी कि जिन जानवरों की आँखों में से कई दफा आँसू छलक पड़ते हैं, तो उन्हें ठेस भी तो पहुँचती ही होगी न, बोल नहीं सकते हैं तो क्या, भावना तो उनमें भी हैं न..... एक जानवर, जिस पर हम दिन भर में एक बार तो टिप्पणी कर ही डालते हैं, वह है भैंस। जिसकी लाठी, उसकी भैंस; अक्ल बड़ी या भैंस; गई भैंस पानी में; भैंस के आगे बीन बजाना; काला अक्षर भैंस बराबर और भी न जाने क्या-क्या। ताकत से अपना काम बना लेने वाले की तुलना भैंस से, शारीरिक शक्ति की अपेक्षा बुद्धि की अधिकता की तुलना भैंस से, बना बनाया काम बिगड़ने की तुलना भैंस से, निरर्थक काम की तुलना भैंस से, अनपढ़

नए साल में अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का ले संकल्प: आरती सिन्हा

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  आरती सिन्हा प्रखर न्यूज व्यूज एक्सप्रेस   भोपाल,नया साल का मौका हर किसी के लिए बेहद खास होता है। इस मौके पर लोग नए सिरे से अपनी जिंदगी की शुरुआत करने का संकल्प लेते हैं और अपनी पुरानी बातों एवं असफलताओं को भूलने की कोशिश करते हैं। यह एक बेहद खूबसूरत मौका होता है, जो कि हम सभी को एक नई शुरुआत करने के लिए प्रेरित करता है। नए साल में हम अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का ले संकल्प ले। अगर आप अपने खराब रुटीन की वजह से या फिर जंक फूड खाने की आदत की वजह से अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी परेशानी झेल चुके हैं तो नए साल पर आप अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने एवं इसे बेहतर बनाने का रेजोल्यूशन ले सकते हैं। * अपनी फिटनेस को लेकर करें खुद से वादा:* हर किसी का फिट और आर्कषक दिखने का सपना होता है, क्योंकि एक फिट और स्वस्थ इंसान ही अपने जीवन में तरक्की कर सकता है। वहीं अगर आप तमाम कोशिशों के बाद भी अपना वजन नहीं घटा पाए हैं या फिर अपनी पर्सनैलिटी ग्रूम करना चाहते हैं तो इस न्यू ईयर पर आप फिटनेस गोल सेट कर सकते हैं। रोज साधारण व्यायाम अवश्य करे। रोज कुछ समय ध्यान लगाये। दिन में दो बार 15 से 30 मिनट तक ध्यान

भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी की 100 वर्षीय मां श्रीमती हीराबेन के निधन पर भारत सहित विदेशों में शोक व्याप्त, संतोष गंगेले कर्मयोगी

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  अर्चना शर्मा प्रखर न्यूज व्यूज एक्सप्रेस       भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी की पूज्यनीय माता जी श्रीमती हीराबेन की निधन का खबर से संपूर्ण भारत में शोक की लहर में डूब गया एवं प्रधानमंत्री पीएमओ कार्यालय में विदेशों से भी शोक संवेदनाएं शोक संदेश लगातार प्राप्त हो रहे हैं ।     *पहली बार भारत में भारतीय* संस्कृति सनातन धर्म एवं संस्कारों का अद्वितीय उदाहरण जनमानस को देखने को मिला कि भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने मां के निधन के बाद पूरे भारत को यह संदेश दिया है कि कुटुंब घर परिवार और वंश यह सबसे महत्वपूर्ण है , हमें एकजुट और संगठित होकर अपने जीवन जीने की कला एकता और संगठन में होती है , आज श्रीमती हीराबेन के निधन के बाद भारत देश के संपूर्ण राज्यों के मुख्यमंत्री भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री अनेक राजनीतिक दलों के राजनेता इस बात के लिए प्रतिक्षा और समय का इंतजार कर रहे थे कि भारत के प्रधानमंत्री जी की मां के अंतिम संस्कार के दर्शन और अंतिम शव यात्रा विशेष धूमधाम से निकाली जाएगी और श्रद्धांजलि सभा दी जाएगी , लेकिन दूरगामी परिणाम दूरदृष्टि वाले

भारत ही नहीं नहीं विश्व के लिए नासूर है चीन : डॉ आर. एच. लता

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प्रखर न्यूज व्यूज एक्सप्रेस  चीन हमेशा भारत को अमेरिका के विरुद्ध एक हथियार के रूप में देखता रहा है। उसने हमेशा ऐसी नीतियां ईजाद की है जिससे दक्षिण एशियाई देश हमेशा आपस मे उलझे रहे। पाकिस्तान को वर्षों से दी जा रही मदद चीन की इसी रणनीति का हिस्सा है। उत्तर में तिब्बत का अधिपत्य और सैन्यीकरण, नेपाल, बंगाल में दखल, यह भारत के लिए हमेशा उसकी कूटनीतिक योजनाओं का ही हिस्सा रहा है। इसके बावजूद भारत हमेशा अपने वसुदेव कुटुम्बकम के भाव से अपनी कूटनीतियाँ बनाता रहा है।                 स्वामी विवेकानंद ने हमारे बारे में कहा था कि हम अनिवार्य रूप से धार्मिक लोग हैं। चीनियों के मामले में यह बिल्कुल उलट है। उसके लिए धर्म बहुत छोटी चीज है, लेकिन उन्हें अपने इतिहास की बहुत ही गहरी समझ है। उन्हें अपनी संस्कृति पर बहुत गर्व है। उनके यहां विभिन्न शासकों ने जो चाले चली हैं, जो कूटनीतियाँ अपनाई, युद्ध के लिए जिन विभिन्न तरीकों का प्रयोग किया, उससे चीनियों ने बहुत कुछ सीखा। यही कारण है कि चीनी एक सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए तथा राष्ट्र के लिए खतरा बनने वाले पड़ोसी देशों और संगठनों में काबू प

*अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस* महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

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श्रीमति रश्मि राय 08-मार्च-2022 गुरुग्राम यह आयोजन महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाता है और त्वरित लैंगिक समानता के लिए महिलाओं की समानता और लॉबी के बारे में जागरूकता बढ़ाता है। यूनेस्को बताता है, "प्रथम राष्ट्रीय महिला दिवस 28 फरवरी 1909 को संयुक्त राज्य अमेरिका में मनाया गया था, जिसे सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका ने न्यूयॉर्क में 1908 के परिधान श्रमिकों की हड़ताल के सम्मान में समर्पित किया, जहां महिलाओं ने कठोर काम करने की स्थिति का विरोध किया था।  “लिंग समानता आज एक सतत कल के लिए" इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का विषय है। यह 8 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं और लड़कियों की उपलब्धियों और योगदान का जश्न मनाता है। यह दिन महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता के बारे में जागरूकता भी फैलाता है।  श्रीमति रश्मि राय, ॐ टीम का मानना है कि महिलाएं न सिर्फ घर बल्कि बाहर भी अपनी मौजूदगी से सब बेहतर बना देती हैं और समाज को जरूरत है कि वह उनके साथ होने वाले हर भेदभाव को दूर करे और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे. आप भी इस दिन अपने जीवन की हर उस महिला को शुक्रिया क

*क्या धार्मिक शीत युद्ध से दो-चार है भारत*

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* डॉक्टर इन्दर सिंह केवट प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस भोपाल* विदिशा गंजबासौदा आज देश के हर कोने में हर धर्म को लेकर बहस छिड़ी हुई है, इस लड़ाई में आज तक ना जाने इतनी जानें गई होंगी और न जाने कितनी और जानें जाती रहेगी! प्रत्येक व्यक्ति मानवता के लिए बातें तो करता है, मगर कभी ईमानदारी से उसी मानवता की सेवा के लिए अपनी सोच बदलने की सार्थक पहल नहीं करता है! क्योंकि हमारी सोच में व्योहारवाद है ही नहीं । हम एक ऐसे माहोल में जीते हैं जहां परम्पराओं और रूढ़िवादीता को तोडक़र उस से आगे की सोचना हमारे आचरण में नहीं है! अंधविश्वास की काल्पनिक दुनिया से आज़ाद होना हमारे बस में नहीं , यही कारण है कि हम अपने असली धर्म और उसकी परिभाषा को भूल गए है! विगत दिनों में कर्नाटक के उडुपी जिले के एक स्टेट रन कॉलेज में हिजाब को लेकर माहौल गर्म है। कॉलेज प्रशासन ने मुस्लिम छात्राओं का क्लासरूम में हिजाब पहनकर आना प्रतिबंधित कर दिया है। वर्तमान में कर्नाटक के सरकारी कॉलेज में चल रह हिजाब पर विवाद में  उडुपी जिले स्थित एक सरकारी महिला कॉलेज की छात्रा ने कर्नाटक हाई कोर्ट (Karnataka high court) में रिट याचिका दायर की

"राष्ट्रीय पर्व”स्वराज प्राप्ति के 75 वें वर्ष में प्रवेश करता अपना भारत।सरकारी स्तर पर यह वर्ष आजादी के अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है।

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                                  श्रीमति रश्मि राय निर्देशक व संस्थापक ॐ टीम -वाइस प्रेसिडेंट हरियाणा आइस एसो० विंटर अलिम्पिक गेम्ज़ प्रखर न्यूज व्यूज एक्सप्रेस भोपाल विचार आलेख ,होली , दीपावली, रक्षाबंधन, जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ इत्यादि त्यौहारों- अवसरों के साथ हमारा पारिवारिक , सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव हैं। ये पारिवारिक, सांस्कृतिक , धार्मिक सम्बन्ध और अधिक प्रगाढ़ करते हैं। यह विभिन्न परम्परागत पर्व और त्योहार में समाज को जड़ो से जोड़े रखते है, नई पीढ़ी तक परम्परा को पहुंचाते है। इनका अपना महत्व है। इनके साथ ही राष्ट्रीय पर्वो के आयोजन में भी जन सहभागिता बढ़ता है। लोगों को नागरिक जिम्मेदारी का दायित्व बोध करवाने में और राष्ट्रीय चरित्र का विकास करने में इन उत्सवों अत्यंत महत्व है। राष्ट्रीय पर्व से देश मे राष्ट्रप्रेम का भाव और संस्कार बहुत गहरे होते है ।आजादी के बाद बनी सभी शिक्षानीतियों में , शिक्षा में जीवन मूल्यों की बात की गई, शिक्षा में राष्ट्रप्रेम के संस्कारों की और शिक्षा के केंद्रों में इन पर्वों के माध्यम से इस दिशा में लगातार प्रयास भी किया जाता है किंतु जैसे बालक अपना

उखड़ती सांसो पर सियासत कब तक

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आखिर कब तक ऐसे होता रहेगा? अंजना मिश्रा - रिपोर्टर  देश में कोरोना वायरस का पहला केस केरल की एक छात्रा जो चीन के वुहान विश्वविद्यालय से वापस आयी थी उसमे कोरोना के लक्षण पाए गये थे l तब से लेकर अब तक कोरोना कोहराम मचा रहा है l इस बीच एक बार फिर कोरोना वायरस एक नये रूप में लोगों के अंदर भयावह तरीके से तबाही मचा रहा है l जो तेजी से  लोगों को अपनी ओर चपेट में ले रहा है l हालात पिछले वर्ष से ज्यादा बदतर और भयवह होते जा रहे है l वहीं सरकार की बात करें तो उन्हें बिलकुल भी याद नहीं रहा कि अगर कोरोना बढेगा तो हमारे पास क्या स्वास्थ्य सुविधाएं होगी? सरकार को 1 साल के अंदर वेंटीलेटर, ऑक्सीजन, वैक्सीन तथा कोरोना प्रतिरोधक बढ़ाने का कार्य करना चाहिए था l जिससे ये जो स्थिति अभी वर्तमान में देखने को मिल रही है वो ना होती l सरकार को वहीं स्थानीय रोजगार पर भी ध्यान देना था l जिससे लोगों को फिर से रोजगार के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य भटकना तो नहीं पड़ता l जैसे जैसे कोरोना वायरस देश में बढ़ा रहा है तो वहीं केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को बोलकर धीरे धीरे राज्यों लॉकडाउन लगाया जा रहा है l पहले तो सरकार यह लॉल

सच में भारत विविधताओं का देश है.. कहीं लॉक डाउन, कहीं चुनाव, कहीं कुम्भ..

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नव्या अवस्थी  ज़िम्मेदार  बचाने में लगे हैं, जनता दाल रोटी की जद्दोजहद में कपड़े का मास्क लगाकर सुपरमैन बनी घूम रही है। ऑक्सीजन खत्म हो चुकी है, सरकारी अस्पताल फुल हो चुके हैं, प्राइवेट हर आदमी के बस का नहीं है। दवाइयों से लेकर सेनिटाइजर तक महंगे हो चुके हैं..   रेमडेसिवीर किसी दुकान में उपलब्ध न होकर राजनैतिक पार्टियों के दफ्तर में मिल रहा है। डॉक्टर मरीज़ के साथ साथ खुद की जान बचाने की चिंता में ग्रस्त हैं।  अस्पताल प्रबंधन स्टाफ को छुट्टी पर चले जाने या नौकरी छोड़ देने के डर में अगली सुबह का इंतज़ार कर रहा होता है। प्राइवेट अस्पताल वाले इन सबके साथ मरीज़ की मौत पर होने वाले हंगामे और डॉक्टर्स की पिटाई के डर से बाउंसर्स को टीका लगवाने की जुगत में हैं।  अस्पताल के मालिक(जो कि अमूमन डॉक्टर होते हैं) नेताओं और अफसरों के परिचितों को सही बेड दिलवाने और अस्पताल के बिल कम करवाने के तनाव से गुज़र रहे हैं। साथ साथ इस डर में हैं कि संक्रमण से संबंधित किसी नियम का उल्लंघन न हो जाये।  पत्रकार को चिंता है कि लॉक डाउन लगा तो मालिक को विज्ञापन कैसे मिलेंगे फिर से छंटनी न हो जाये? घर चलाऊं, खबर लिखूं, नई न

*असहाय होने का एहसास (कोरोना काल का एक साल)*

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अर्चना शर्मा संपादक प्रखर न्यूज व्यूज एक्सप्रेस भोपाल एक बरस पूर्व कोरोना वायरस महामारी के बीच आज ही के दिन (22 मार्च 2020) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉक डाउन का ऐलान करते हुए भारतवासियों से अपने-अपने घरों में रुके रहनेvके लिए कहा था। इसके साथ ही लोगों को मास्क पहनने, शारीरिक दूरी का पालन करने, हाथ को साफ रखने जैसी तमाम गाइडलाइन पालन करने के निर्देश दिए गए थे। यह एक तरह से कोरोना के प्रसार को रोकने की कोशिश व इस घातक बीमारी के खिलाफ आधिकारिक जंग की शुरुआत थी। जनता कर्फ्यू के दौरान एक तरह का अजीब सन्नाटा था। न हॉर्न की आवाज और न ही कोई और हलचल। सिर्फ पक्षियों की आवाज सुनाई दे रही थी। उस समय कहा गया था कि यह लॉकडाउन का ट्रायल है। तब किसी को अंदाजा भी नहीं था कि लॉकडाउन कब खुलेगा। लोगों की आंखों के सामने इस भयानक वायरस की चपेट में आने से उनके अपनों की जान जा रही थी। क्या छोटा-क्या बड़ा, क्या जवान और क्या वृद्ध, कोरोना हर किसी को अपना शिकार बना रहा था। ऐसे में एकमात्र उपाय घरों में बंद रहना ही था। लोग लॉकडाउन के बीच इस घातक बीमारी की दवा का इंतजार करने लगे।  महीनों की पाबंदी के बाद अनलॉ

*प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ और कमजोर विपक्ष के विकल्प के रूप में आम आदमी की आवाज को बुलंद करता सोशल मीडिया*

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अजय राज केवट भारत विश्व की सबसे बड़ी प्रजातांत्रिक व्यवस्था में से एक माने जाने वाले देशों में से एक है जहां धर्मनिरपेक्षता एवं वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत को सर्वोपरि माना जाता है! विगत दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कार्यकाल को वर्तमान का शक्तिशाली निडर प्रधानमंत्री माना जाता है ! पूर्ण बहुमत की सरकार ने निर्णय के रूप में 370 ,एनआरसी, जीएसटी, नोटबंदी, निजी करण जैसे कड़े कदम भी उठाए हैं !परंतु हाल ही के दिनों में बेरोजगारी ,बढ़ती महंगाई, महिला अपराध, लचर न्याय व्यवस्था के प्रति उदासीन सरकार द्वारा किसान कानूनों को लेकर देश के किसानों के एक विशेष तबके में सरकार की तानाशाही जैसी छवि प्रदर्शित हुई है जिसका विरोध विपक्ष को जिस ढंग से करना चाहिए था वह नहीं कर पाए!  फल स्वरूप विपक्ष के विकल्प के रूप में किसान आंदोलन का जन्म हुआ जिसको सर्वप्रथम संबल प्रदान किया सोशल मीडिया ने धीरे-धीरे प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ ने भी किसान आंदोलन को तवज्जो देना मुनासिब समझा जिसके फलस्वरूप किसान संगठनों एवं सरकार के बीच कई बार की चर्चा परिचर्चा का दौर चला परंतु परिणाम शून्य रहा ! इसी तरह हाल ही में