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संविधान को समझना बहुत जरूरी है- डॉ विनय पाठक

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प्रखर न्यूज व्यूज एक्सप्रेस भोपाल उज्जैन, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के तत्वावधान में आयोजित आभासी संगोष्ठी जिसका विषय "आजादी का अमृत महोत्सव 26 जनवरी गणतंत्र दिवस" में मुख्य अतिथि के रूप में डा विनय पाठक जी, पूर्व अध्यक्ष, राजभाषा आयोग, बिलासपुर, ने मंतव्य देते हुए कहा- हमारा देश अनेकता में एकता को स्थापित करता है । यहां विभिन्न भाषा और बोलियां हैं । यद्यपि विश्व के आदर्श संविधान में एक हमारा संविधान है । गुणों में सर्वश्रेष्ठ गणेश के समान इन्होंने गणतंत्र को बताया। हम संविधान को समझ कर अपने जीवन में उतारें। हम अपने राष्ट्र के प्रति समर्पित हों कहा।डॉ. शहाबुद्दीन नियाज़ मोहम्मद शेख, कार्यकारी अध्यक्ष , पुणे महाराष्ट्र ने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि- अंतर्मुखी होकर हम सोचते हैं कि, हमें राष्ट्र के लिए कुछ करना चाहिए और इन्होंने गणतंत्र दिवस के महत्व को बताया और कहा राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना आभासीय गोष्ठी के माध्यम से हर्ष और उल्लास से यह पर्व मना रही है ।श्री हरेराम वाजपेई , अध्यक्ष, हिंदी परिवार, इंदौर ने स्वागत भाषण दिया और कविता में कहा कि एक एक मिल ग्यारह हो

मूल्य आधारित पत्रकारिता ,

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  राधावल्लभ शारदा  भोपाल , मूल्य आधारित पत्रकारिता का अर्थ आज के समय में बदल गया है , किसी वस्तु की खरीद के लिए हम जो कुछ राशि देते हैं वह उस वस्तु का मूल्य हो गया है । इसीलिए मूल्य आधारित पत्रकारिता पर चर्चा होती है । चर्चा में भागीदारी भी लगभग ऐसे ही लोगों की रहती है।    आज समाचार पत्रों के संवाददाता मूल्य आधारित पत्रकारिता ही करने को मजबूर हैं । समाचार पत्र बड़े से बड़ा हो या छोटा जिनको नाम से जाना जाता है ऐसे समाचार पत्र में प्रकाशन स्थल से हटकर अन्य स्थानों में काम करने वाले पत्रकारों को कमीशन , कांटेक्ट या टारगेट पर काम करना होता है । जितना विज्ञापन आप लायेंगे उस पर कमीशन दिया जाता है जो समाचार पत्र के मालिक एवं पत्रकार के मध्य तय होता है । टारगेट - कुछ समाचार पत्रों में नौकरी पर पत्रकारों को रखा जाता है और उन्हें टारगेट दिया जाता है एक निश्चित राशि का उसकी पूर्ति करने पर ही उनके वेतन निर्धारण किया जाता है । कांटेक्ट - अब बहुत समय से एक प्रथा चल रही है कि समाचार पत्र मालिक समाचार पत्र के पृष्ठ बेचने लगे हैं जिसकी राशि शहर के अनुसार तय होती है इसमें समाचार पत्र की विक्री की राशि स

*कोविड-19 जैसी महामारी को बाहर करने के लिए हमें पशु पक्षी और पौधों को घर में जगह देनी होगी!*

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  *डॉक्टर इन्दर सिंह केवट* *प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस भोपाल* विदिशा गंजबासौदा (विश्व जैव विविधता संरक्षण दिवस 22 मई विशेष) कोविड-19 तो एक टेलर मात्र है! भविष्य में अभी तो पूरी की पूरी फिल्म बाकी है वास्तविकता में वैश्वीकरण और इससे प्रभावित आयातित महत्वकांक्षी जीवन शैली ने जिस तरह से जैव विविधता को तहस-नहस किया है उसने महामारियों के आने का पूरा का पूरा इंतजाम कर दिया है! जो जीव, सूक्ष्मजीव पेड़ पौधे, वनस्पतियां हमेशा से इस पृथ्वी पर हमारे साथ सदियों से रहते चले आ रहे हैं चिंताजनक बात तो यह है कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई प्राकृतिक संसाधनों के दोहन बढ़ते मांसाहार और भूमि के निर्दयता पूर्वक बे-हताशा खनन की वजह से यह हमारे शरीरों में अपना नया घर तलाश रहे हैं! उनके उत्परिवर्तन( म्यूटेशन) को रोकना है तो मनुष्य को यह जीवन शैली बदलनी होगी! जैव विविधता पर हो रहे आत्मघाती आक्रमण को रोकना होगा! शास्त्र और और सनातन धर्म भी यही कहता है, कि हमें भारतीय मूल्यों की आत्मा कहे जाने वाले   "वसुदेव कुटुंबकम" के मूल्यों को अपनाते हुए संपूर्ण संसार को अपना परिवार मानते हुए धरती पर पाए जाने वाले

प्रभावशाली समाचार बनाने के लिए तथ्यो को समाहित कर वाक्यों को संक्षिप्त व सटीक लिखें, सर्जन सिंह शिल्पकार सेज यूनिवर्सिटी द्वारा इफेक्टिव न्यूज राइटिंग पर आयोजित किया वर्कशॉप

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  अर्चना शर्मा संपादक प्रखर न्यूज एक्सप्रेस भोपाल बीनागंज/भोपाल:-               समाचार लिखना सामाजिक रूप से कड़े उत्तरदायित्व काम है इसलिए समाचार संतुलित और पक्षपात रहित होना चाहिए।प्रभावशाली समाचार बनाने के लिए तथ्यो को समाहित कर वाक्यों को संक्षिप्त व सटीक लिखना अनिवार्य है।     डॉ जया शर्मा एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट एंड NSS प्रभारी सेज यूनिवर्सिटी द्वारा इफेक्टिव न्यूज़ राइटिंग "प्रभावशील समाचार लिखने" विषय पर ऑनलाइन वर्क शॉप का आयोजन जूम एप के माध्यम से सेज यूनिवर्सिटी चांसलर श्री संजीव अग्रवाल, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सुश्री शिवानी अग्रवाल, प्रो चांसलर प्रशांत जैन, डायरेक्टर जनरल डॉ आशीष दत्ता, वाइस चांसलर डॉ वीके जैन, कुलसचिव डॉ संदीप श्रीवास्तव के निर्देशन पर डॉ मनीष मिश्रा NSS कार्यक्रम अधिकारी, इंजीनियर नीरज जैन एग्रीकल्चर विभाग, एच ओ डी डॉ पंकज श्रीवास्तव, डॉक्टर साहिबा जाफरी रेड रिबन क्लब प्रभारी, प्रशिक्षित कार्यकृम अधिकारी प्रो आर सी घावरी के सानिध्य मे किया गया। जिसमे स्पीकर व विषय विशेषज्ञ के रूप मे पत्रकार  की भूमिका निभाने बाले सर्जन सिंह शिल्पकार बीनागंज वरिष्ठ

*दमोह उपचुनाव: टिकाऊ बनाम बिकाऊ के बाद विकास पर अटके*

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  - अरुण पटेल - लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं। -        दमोह विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रचार अभियान अपने पूरे शबाब पर पहुंचने लगा है और इसके साथ ही आरोप-प्रत्यारोप के तीर भी एक दूसरे पर भाजपा और कांग्रेस के नेता छोड़ने में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं। भाजपा फिर से अपनी परंपरागत दमोह सीट पर जीत का परचम फहराना चाहती है तो वहीं कांग्रेस 2018 के चुनाव में लंबे समय के बाद जीती दमोह सीट खोना नहीं चाहती है, यही कारण है कि दोनों ही पार्टियों ने अपने पूरी ताकत झोंक दी है। प्रचार के लिए अब 5 दिन शेष हैं और एक ओर सूरज की तपन से तापमान निरंतर बढ़ता जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर राजनीतिक तापमान का पारा भी ऊपर की ओर जा रहा है तथा  वह 15 अप्रैल को अपने चरम पर पहुंच जाएगा। इससे एक दिन पूर्व 14 अप्रैल को दमोह में चुनावी पारा एकदम काफी चढ़ जाएगा क्योंकि उस दिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का भाजपा प्रत्याशी राहुल सिंह लोधी के समर्थन में रोड शो संभावित है तो वहीं दूसरी ओर इसी दिन पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का रोड शो कांग्रेस उम्मीदवार अजय ट

एक हाथ नहीं होने के कारण माता-पिता ने हीं बेटे को भिखारियों से बेचा, बुआ ने छुड़ाकर बनाया चिकन टिक्का किंग

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 हौसला और हिम्मत से काम लेने वालों के लिए कभी कोई मुश्किलें आड़े नहीं आती। वह हर मुश्किलों का सामना करते हुए सफलता पा ही लेते हैं और ऐसे ही मुश्किलों से सामना करते हुए आगे बढ़े तेजिंदर मेहरा (Tejindar Mehra). सिर्फ़ एक हाथ के साथ जन्मे तेजिंदर को उनके ख़ुद के माता-पिता ने हीं बेच दिया। लेकिन अगर उनका किसी ने साथ दिया तो वह थी उनकी बुआ जिन्होंने तेजिंदर को पालने का काम किया। तभी से तेजिंदर के संघर्ष की शुरुआत हुई और कोरोना की वज़ह से काम बंद होने पर भी वह चिकन टिक्का किंग के नाम से प्रसिद्ध हो चुके हैं। फिलहाल तेजिंदर सोशल मीडिया पर पूरी तरह से छाए हुए हैं लोग उनकी कहानी को बहुत ज़्यादा वायरल कर रहे हैं और उनके संघर्षों को देखकर प्रेरित भी हो रहे हैं। दिल्ली में जन्मे तेजिंदर जिनकी उम्र अभी सिर्फ़ 26 वर्ष है। आपको बता दें तो जब उनका जन्म हुआ था तब उनके दो हाथ होने के बजाय सिर्फ़ एक ही हाथ था। इस बात से चिंतित उनके माता-पिता ने हीं उन्हें बीस हज़ार में बेच दिया और उसी समय से उनके जीवन में संघर्ष भी शुरू हुई। सबसे दुखद बात यह है कि उनके माता-पिता ने उन्हें भीख मांगने वाले गिरोह को बेच दिया

महिला दिवस वास्तविकता से दूर एक कड़वा सच

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  रिपोर्टर अंजना मिश्रा         संपादक अर्चना शर्मा  एक लडकी के जन्म के साथ उसके पिता का नाम जुड़ता है और उसी नाम उपनाम के सहारे वह आगे बढ़ती है l कभी सोचा है माँ का नाम कहा है ? वैसे ही जैसे माँ का नाम नहीं आता कही वैसी ही आगे हमारी पहचान नहीं होती है बस जीवन ऐसे ही चलते जाता है l लेकिन जब जीवन में अपने ससुराल में लड़की जाती है और उसके पिता का नाम उपनाम हटाकर उसके पति का नाम उपनाम जोड़ दिया जाता है तो उसे यह जान पड़ता है कि मेरी पहचान का शायद कोई अस्तित्व ही नहीं है l वही लड़की को बार-बार यह सुनाया जाता है कि तुझे पराए घर जाना है, पराए घर जाना है, और एक दिन जब वह अपने ससुराल जाती है तो वहां पर भी उसे यह बताया जाता है कि तू पराए घर से आई है ऐसे में एक लड़की के मन में यह विकराल प्रश्न खड़ा होता है कि मेरा घर कौन सा है? दरअसल यह तो हमारे भारतवर्ष की सामाजिक व्यवस्था है जिसका जीता जागता उदाहरण अहमदाबाद की बेटी आयशा की आत्महत्या है l जिससे यह महिला सशक्तिकरण का कीर्तिमान स्थापित करने वाला देश नकार नहीं सकता है l आज भी महिलाओं के खिलाफ अपराधों को देखें तो आंकड़े चौका देने वाले हैं l **भारती