घोटाला : टंट्या मामा मूर्ति को लेकर बड़ा `फर्जीवाड़ा`,दो इंजीनियरों पर गिरी गाज: 9.90 लाख का टेंडर और 50 हजार की मूर्ति
मध्य प्रदेश के खरगोन ज़िले में टंट्या मामा भील की प्रतिमा स्थापना में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। 9.90 लाख रुपये के टेंडर में संगमरमर या अष्ट धातु की जगह फाइबर की मूर्ति लगाए जाने के मामले में जांच के बाद सहायक यंत्री और सब इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है।
मध्य प्रदेश में टंट्या मामा की फाईबर स्टेच्यू से मोहन सरकार की किरकिरी, अब 15 मार्च को नई मूर्ति लगाने की तारीख.
बिस्टान नाका में टंट्या मामा प्रतिमा स्थापना में नियमों की अनदेखी पर नगरीय प्रशासन ने सख्त कदम उठाया। प्रतिमा के तय मापदंडों पर खरी न उतरने और गंभीर लापरवाही के चलते नगर पालिका के प्रभारी सहायक यंत्री और उपयंत्री को निलंबित कर दिया गया है।
खरगोन : खरगोन जिले में जननायक टंट्या मामा भील की मूर्ति को लेकर चल रहे विवाद में अब बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई हुई है। नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने नगरपालिका के दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है। दरअसल टेंडर शर्तों के अनुसार जननायक टंट्या मामा भील की मूर्ति 9 लाख 90 हजार रुपए की लागत से संगमरमर या अष्टधातु की लगाई जानी थी। लेकिन ठेकेदार द्वारा करीब एक लाख रुपए की एफआरपी से बनी मूर्ति स्थापित कर दी गई। मूर्ति स्थापना से पहले नगरपालिका के सहायक यंत्री मनीष महाजन और सब इंजीनियर जितेंद्र मेड़ा द्वारा भौतिक सत्यापन किया गया था, जो बाद में गलत पाया गया। इसी लापरवाही को गंभीर मानते हुए नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
गौरतलब है कि इस मामले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी सहित भाजपा के कई पार्षदों ने भी विरोध दर्ज कराया था और शासन-प्रशासन से लिखित शिकायतें की थीं। लगातार बढ़ते दबाव और जांच के बाद यह कार्रवाई की गई है। फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद नगर पालिका में हड़कंप की स्थिति है। वहीं अब आगे मूर्ति मामले में और किन जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
बीजेपी पार्षदों ने खोला मोर्चा
मूर्ति विवाद अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है. भाजपा पार्षदों ने ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है. पार्षदों का कहना है कि सोशल मीडिया पर उन्हें इस मुद्दे को लेकर ट्रोल किया जा रहा है, जिससे उनकी छवि खराब हो रही है. इसी के विरोध में पार्षदों ने गांधी प्रतिमा पर सद्बुद्धि यज्ञ कर प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया. उनका आरोप है कि पीआईसी की मंजूरी से करीब 10 लाख रुपये की कांस्य या धातु की मूर्ति लगनी थी, लेकिन सस्ती फाइबर की मूर्ति लगाई गई.
नया टेंडर जारी किया गया
विवाद बढ़ने के बाद नगर पालिका ने अब नई धातु की मूर्ति लगाने का फैसला लिया है. इसके लिए 19 जनवरी 2026 को नया ई-टेंडर जारी किया गया है, जिसकी अंतिम तारीख 2 फरवरी तय की गई है. अधिकारियों का दावा है कि 45 दिनों के भीतर सम्मानजनक तरीके से नई मूर्ति स्थापित कर दी जाएगी. वहीं जनजातीय संगठनों और कुछ पार्षदों ने ठेकेदार पर एफआईआर की मांग तेज कर दी है. इस पूरे मामले में पहली गाज नगर पालिका की तकनीकी टीम पर गिरना चर्चा का विषय बना हुआ है.
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस