गडकरी का बड़ा ऐलान,सरकार की नई हाईटेक योजना, हादसे से पहले NHAI आपकी गाड़ी खुद देगी चेतावनी, ड्राइविंग में होगा बड़ा बदलाव

केंद्र सरकार ने गाड़ी से गाड़ी (V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) के लिए 30 GHz रेडियो स्पेक्ट्रम तय किया है। जिससे गाड़ियां मोबाइल या इंटरनेट नेटवर्क में आए बिना ही सेफ्टी अलर्ट का लेन-देन कर सकेंगी।

गडकरी का बड़ा ऐलान,सरकार की नई हाईटेक योजना, हादसे से पहले NHAI आपकी गाड़ी खुद देगी चेतावनी, ड्राइविंग में होगा बड़ा बदलाव

केंद्र सरकार सड़क हादसों को रोकने के लिए ऐसी तकनीक ला रही है जिससे सड़क पर चल रही गाड़ियां एक-दूसरे से बात कर सकेंगी यानी आगे वाली गाड़ी में जैसे ही कोई खतरा होगा, इसका तुरंत अलर्ट मिल जाएगा.

सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों को कम करने के लिए केंद्र सरकार नई तकनीक पर जोर दे रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि वाहनों के बीच आपसी संवाद (व्हीकल-टू-व्हीकल कम्युनिकेशन) प्रणाली विकसित करने के लिए दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने 30 गीगाहर्ट्ज रेडियो फ्रीक्वेंसी आवंटित की है।

केंद्र सरकार ने सड़क सुरक्षा को नई तकनीक से मजबूत करने की दिशा में अहम फैसला लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि वाहन-से-वाहन (V2V) कम्युनिकेशन तकनीक के लिए 30 GHz रेडियो फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम आवंटित कर दिया गया है। इस तकनीक की मदद से वाहन आपस में सीधे सुरक्षा अलर्ट साझा कर सकेंगे, वह भी मोबाइल या इंटरनेट नेटवर्क पर निर्भर हुए बिना।

किसने किया स्पेक्ट्रम आवंटन?

शुक्रवार को सड़क परिवहन मंत्रालय से जुड़ी संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में जानकारी देते हुए गडकरी ने कहा कि दूरसंचार विभाग ने V2V कम्युनिकेशन के लिए यह स्पेक्ट्रम तय किया है। मंत्रालय के अनुसार, यह स्पेक्ट्रम कनेक्टेड व्हीकल सिस्टम की बुनियाद बनेगा।

प्रति वाहन कितना हो सकता है खर्च?

सरकार के अनुमान के मुताबिक, V2V आधारित सुरक्षा सिस्टम को वाहन में लगाने की लागत लगभग 5,000 रुपये से 7,000 रुपये प्रति वाहन हो सकती है। इसे भविष्य में बड़े पैमाने पर लागू करने की योजना पर काम चल रहा है।

दुनिया में V2V तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल

उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, 2024 तक दुनिया भर में 2 करोड़ से अधिक वाहन ऐसे थे जिनमें V2V-रेडी ऑनबोर्ड यूनिट्स लगी थीं। इसमें एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत रही।

नियम और मानक तैयार करने की प्रक्रिया जारी

परिवहन मंत्रालय ने बताया कि भारत में V2V तकनीक लागू करने के लिए फ्रेमवर्क, मानक और नियम तैयार किए जा रहे हैं। इसके पूरा होने के बाद इस तकनीक को चरणबद्ध तरीके से वाहनों में शामिल किया जा सकता है।

सड़क सुरक्षा के भविष्य की ओर भारत

30 GHz स्पेक्ट्रम का आवंटन भारत को कनेक्टेड और सुरक्षित मोबिलिटी की ओर ले जाने वाला कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में V2V तकनीक दुर्घटनाओं को कम करने और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।