UGC के नए कानून के विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया इस्तीफा,ब्राह्मणों की चोटी खींचे जाने पर भी थे नाराज,सरकार और ब्यूरोक्रेसी पर उठाए सवाल

शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी कानून के विरोध में पीसीएस अफसर अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा दे दिया। इससे प्रदेश के प्रशासनिक वर्ग में खलबली मच गई है

UGC के नए कानून के विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया इस्तीफा,ब्राह्मणों की चोटी खींचे जाने पर भी थे नाराज,सरकार और ब्यूरोक्रेसी पर उठाए सवाल

बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा दे दिया। गणतंत्र दिवस पर दिए गए इस्तीफे से हड़कंप मच गया। उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के मामले में यूपी सरकार और जनप्रतिनिधियों पर गंभीर आरोप लगाए।

बरेली : प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नीतियों के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने गणतंत्र दिवस के अवसर पर यह इस्तीफा सौंपा, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

अलंकार अग्निहोत्री ने अपने 5 पेज के त्यागपत्र में लिखा है कि प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के शिष्यों की चोटी पकड़कर कथित रूप से मारपीट की गई, जो ब्राह्मण समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक अस्मिता का अपमान है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए कहा कि वह इससे मानसिक रूप से आहत हैं और ऐसे माहौल में सरकारी सेवा में बने रहना उनके लिए संभव नहीं है।

ब्राह्मण समाज का नेता बताने वाले सांसद-विधायक भी मौन

अविमुक्तेश्वरानंद विवाद से गुस्साए पीसीएस अफसरों ने जनप्रतनिधियों को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा, मौनी अमावस्या के दिन जो हुआ वह ठीक नहीं था। इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें बूढ़े-बूढे संन्यासियों को जूते और चप्पलों से मारा गया। अगर यह प्रशासन के लोग ही इस तरह से मैसेज देंगे तो समाज के जो दूसरे वर्ग हैं वह ब्राह्मणों पर कितना अत्याचार करेंगे? उन्होंने कहा, जो जनप्रतिनिधि खुद को ब्राह्मण समाज का नेता समझते हैं वह भी इस पर कुछ नहीं बोल रहे हैं। वह इस तरह से चुप्पी साधकर बैठे हैं, जैसे प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी हों। जनप्रतिनिधियों पर गुस्सा निकाल रहे पीसीएस अफसर बोले, आपमें अगर थोड़ी सी रीढ़ और शर्म बची है तो ब्राह्मण सांसद-विधायक इस्तीफा दे दें। उन्होंने कहा, सामान्य वर्ग देश में इस समय अब भाजपा के साथ नहीं है। केंद्र और यूपी सरकार सामान्य वर्ग से अलग हो चुका है। सरकार इस समय अल्पमत में है।

ईमेल से राज्यपाल और डीएम को भेजा इस्तीफा

शंकराचार्य विवाद पर पीसीएस अफसर ने कहा, कोई उन्हें कालनेमी की संज्ञा दे रहा है तो प्रशासन उनको नोटिस दे रहा है कि वह शंकराचार्य हैं कि नहीं? आप एक साल पहले उन्हीं शंकराचार्य के पैर छूते हैं राजभवन से लेकर हर बड़े कार्यक्रमों के लिए आमंत्रित भी किया जाता है, लेकिन मौनी अमावस्या पर स्नान के दौरान उनके साथ अभद्रता करते हैं। बटुक शिष्यों के साथ जिस तरह से मारपीट की गई वह ठीक नहीं है। मैंने जिलाधिकारी महोदय को ईमेल द्वारा इस्तीफा भेजा है। उत्तर प्रदेश के सीईओ और राज्यपाल को भी ईमेल से इस्तीफा भेजा है। आगे की रणनीति के सवाल पर पीसीएस अफसर ने कहा, इस समय सामान्य वर्ग पूरी तरह से अलग हो चुका है। इस समय न तो जनतंत्र है और न ही गणतंत्र है। इस समय केवल भ्रम की स्थिति बनी हुई है। भाजपा का जो नाम है वह अब विदेशी जनता पार्टी बन चुकी है। अब समाज की प्रतिक्रिया का इंतजार है। ब्राह्मणों सांसद-विधायकों के प्रतिक्रिया का भी इंतजार है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी नहीं रखा मान, कर दिया मतदान

पीसीएस अफसर का गुस्सा यहीं पर शांत नहीं हुआ। उन्होंने कहा, संसद में लाए गए एससीएसटी बिल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पार्टिकुलर धारा को निरस्त करके आदेश दिया था कि पहले जांच की जाएगी उसके बाद ही एफआईआर दर्ज की जाएगी फिर गिरफ्तारी होगी। इस पर भी कोई ब्राह्मण सांसद-विधायक नहीं बोला। जनप्रतिनिधियों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी मान नहीं रखा। कितनी शर्मनाक बात है कि आपने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ जाकर मतदान कर दिया। जनप्रतिनिधि जनता से चुना गया है, वह जनता का रहनुमा है। ये लोग बिल्कुल मुंह बंद करके मूकदर्धक बने बैठे हैं। ये पूरे समाज में बहू-बेटियों का रेप करवाएंगे उसके बाद भी कुछ नहीं बोलेंगे। जो सीओ है आलाकमान से मुंह खोलने का आदेश नहीं आएगा तब तक कुछ नहीं बोलेंगे। ऐसे-ऐसे सांसद-विधायक हैं जो ब्राह्मणों के नाम पर सभा बनाकर मिनीस्ट्री ले ली और फिर केंद्र में चले गए। फिर उस सभा को समाप्त कर दिया। इस समय अगर आप उनसे बात करने जाएंगे तो कहते हैं कि हमारी टिकट कट जाएगी। तुम्हे ब्राह्मण समाज के नाम पर ही विधायकी और टिकट मिली है

प्रशासनिक हलकों में मची खलबली

एक कार्यरत सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा सार्वजनिक रूप से सरकारी नीतियों के विरोध में उतरना और पद से इस्तीफा देना दुर्लभ माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद शासन-प्रशासन अलर्ट मोड में है और पूरे मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है।