किसान बोला- “ये कलेक्टर आतंकवादी है, एसपी गुंडा है”: सीमांकन विवाद को लेकर कलेक्ट्रेट में हंगामा, एएसआई निलंबित

किसान का हंगामा बढ़ता देख मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने लाठी दिखाकर धक्का देते हुए उसे कलेक्ट्रेट परिसर से बाहर कर दिया।

किसान बोला- “ये कलेक्टर आतंकवादी है, एसपी गुंडा है”: सीमांकन विवाद को लेकर कलेक्ट्रेट में हंगामा, एएसआई निलंबित

पोलायकलां निवासी एक किसान ने जनसुनवाई के दौरान अपने सीमांकन विवाद को लेकर कलेक्ट्रेट में जमकर हंगामा किया। उसने आरोप लगाया कि उसकी जमीन के सर्वे (4446/3) में राजस्व विभाग ने गड़बड़ी की है और उसकी शिकायतों पर वर्षों से कोई कार्रवाई नहीं हुई।

भोपाल/पोलायकलां। सीमांकन विवाद से नाराज एक किसान ने मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में जमकर हंगामा कर दिया। इस दौरान उसने कलेक्टर और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए गंभीर आरोप लगाए। मामला इतना बढ़ गया कि मौके पर मौजूद पुलिस बल को हस्तक्षेप करना पड़ा और किसान को परिसर से बाहर निकालना पड़ा। घटना के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई करते हुए ड्यूटी पर तैनात एक एएसआई को अनुशासनहीन व्यवहार के चलते निलंबित कर दिया है।

जमीन विवाद से भड़का मामला

जानकारी के अनुसार, पोलायकलां निवासी शरद कुमार शर्मा लंबे समय से अपनी भूमि के सीमांकन को लेकर राजस्व विभाग से असंतुष्ट चल रहे हैं। उनका कहना है कि उनकी भूमि, जिसका सर्वे नंबर 4446/3 है, के सीमांकन में राजस्व अमले द्वारा गड़बड़ी की गई है। किसान का आरोप है कि उनकी जमीन को गलत तरीके से दूसरे किसान की भूमि में दर्शा दिया गया है।

शरद कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर वर्ष 2019 से लगातार प्रशासनिक स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई हैं। उनके अनुसार, उन्होंने कलेक्टर कार्यालय, संबंधित राजस्व अधिकारियों और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर लगभग 50 से 60 बार आवेदन दिए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

किसान का कहना है कि हर बार उन्हें केवल आश्वासन मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई। इसी कारण वे काफी आक्रोशित थे और उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।

जनसुनवाई में अचानक बढ़ा विवाद

मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान जब शरद कुमार शर्मा अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, तो उन्होंने अपनी बात जोरदार तरीके से रखनी शुरू कर दी। शुरुआत में वे सीमांकन में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे, लेकिन कुछ ही देर में उनका आक्रोश बढ़ गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किसान ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ तीखी भाषा का प्रयोग किया और कलेक्टर तथा एसपी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कलेक्टर ऋजु बाफना को “आतंकवादी” और पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह राजपूत को “गुंडा” जैसे शब्दों से संबोधित किया, जिससे वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी हैरान रह गए।

स्थिति बिगड़ती देख मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और किसान को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन वह लगातार अपनी बात पर अड़े रहे और हंगामा करते रहे।

पुलिस ने परिसर से बाहर निकाला

हंगामा बढ़ने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग करते हुए किसान को कलेक्ट्रेट परिसर से बाहर किया। इस दौरान धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बनी, जिससे वहां मौजूद लोगों में असहजता फैल गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करना आवश्यक था क्योंकि जनसुनवाई में अन्य लोग भी अपनी शिकायतें लेकर आए हुए थे और माहौल प्रभावित हो रहा था।

लालघाटी थाना प्रभारी अर्जुन सिंह मुजाल्दे ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान एक व्यक्ति लगातार हंगामा कर रहा था और अधिकारियों के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने पहले समझाइश देने की कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं माना तो उसे परिसर से बाहर किया गया।

एएसआई का वीडियो वायरल, निलंबन की कार्रवाई

इस घटना के दौरान एक और विवाद सामने आया। बताया जा रहा है कि जब किसान हंगामा कर रहा था, तब मौके पर मौजूद लालघाटी थाने के एएसआई महेश कुमार घुरे भी उससे आक्रोशित हो गए। इस दौरान उन्होंने किसान को हड़काते हुए कथित रूप से अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

यह पूरी घटना किसी व्यक्ति द्वारा रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई। वीडियो सामने आने के बाद मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा।

एसपी यशपाल सिंह राजपूत ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने एएसआई महेश कुमार घुरे के व्यवहार को अनुशासनहीन और सेवा नियमों के खिलाफ मानते हुए उन्हें मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के नियम-9 के तहत निलंबित कर दिया।

पुलिस विभाग के अनुसार, किसी भी परिस्थिति में ड्यूटी पर तैनात अधिकारी द्वारा इस प्रकार का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है, चाहे स्थिति कितनी भी तनावपूर्ण क्यों न हो।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और सीमांकन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। किसान का दावा है कि वर्षों से शिकायतें देने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ, जिसके कारण उनका गुस्सा बढ़ता गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों का समय पर समाधान किया जाए तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सीमांकन जैसे मामलों में तकनीकी जांच और दस्तावेजों का सत्यापन आवश्यक होता है, जिसमें समय लग सकता है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। कुछ लोग किसान के व्यवहार को अनुचित बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि लंबे समय से न्याय न मिलने के कारण उनका गुस्सा फूटा।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना के वीडियो और बयान तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग प्रशासनिक जवाबदेही और पुलिस के व्यवहार दोनों पर सवाल उठा रहे हैं।

यह घटना केवल एक विवादित सीमांकन मामले तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि इसमें प्रशासनिक व्यवस्था, पुलिस अनुशासन और जनसुनवाई की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठे हैं। एक ओर जहां किसान अपनी जमीन को लेकर न्याय की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रक्रिया के अनुसार काम करने की बात कह रहा है।

फिलहाल, प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच और आगे की कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।