धीरेंद्र शास्त्री का बयान विवादों में: “बड़े घरानों की महिलाएं भी पी रही हैं” वीडियो वायरल, सोशल मीडिया पर बवाल; कांग्रेस बोली—भाषा मर्यादा के खिलाफ, चेतावनी दी- सड़कों पर उतरेंगे
नागपुर में कथा के दौरान दिया गया बाबा बागेश्वर का बयान सुर्खियों में, महिलाओं में बढ़ती शराब की लत पर टिप्पणी.
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान विवादों में: “बड़े घरानों की महिलाएं भी पी रही हैं” टिप्पणी पर बवाल, कांग्रेस ने जताई आपत्ति; दीप्ति पांडे बोलीं—“मातृ शक्ति के खिलाफ भाषा अस्वीकार्य”
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने बयान को लेकर विवादों के केंद्र में आ गए हैं। महाराष्ट्र के नागपुर में चल रही एक कथा के दौरान दिए गए उनके कथित बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
वायरल वीडियो में धीरेंद्र शास्त्री यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि आज के समय में केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि बड़े घरानों की महिलाएं भी शराब का सेवन कर रही हैं। उन्होंने इस दौरान संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि परिवार की माताएं ही गलत आदतों में पड़ जाएंगी, तो आने वाली पीढ़ियों को सही संस्कार कैसे मिलेंगे। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद कुछ लोगों ने जयकारे भी लगाए, लेकिन वीडियो के वायरल होते ही विवाद खड़ा हो गया।
सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर दो हिस्सों में राय बंटी हुई है। एक वर्ग इसे सामाजिक चिंता से जुड़ा बयान मान रहा है, जबकि दूसरा वर्ग इसे महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी बता रहा है। ट्विटर, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर इस विषय पर तीखी बहस चल रही है।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है। कांग्रेस पार्टी ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान की कड़ी आलोचना की है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की सदस्य दीप्ति पांडे ने इस बयान को मातृ शक्ति का अपमान बताते हुए कहा कि व्यासपीठ जैसे सम्मानित स्थान से इस तरह की भाषा का प्रयोग बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।
दीप्ति पांडे ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को “माता” का दर्जा दिया गया है और वह बच्चे की प्रथम गुरु होती है। ऐसे में महिलाओं के लिए इस प्रकार की टिप्पणी करना न केवल अनुचित है बल्कि समाज में गलत संदेश भी देता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि भविष्य में इस तरह की टिप्पणी दोबारा की गई तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेगी।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि धार्मिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों में संयम और मर्यादा का पालन होना चाहिए, क्योंकि ऐसे मंचों को लाखों लोग सुनते हैं और उनके प्रभाव गहरे होते हैं। पार्टी ने यह भी कहा कि धार्मिक प्रभाव वाले व्यक्तियों को समाज में सद्भाव और सकारात्मक संदेश देना चाहिए, न कि विवाद पैदा करने वाले बयान।
वहीं दूसरी ओर, धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के समर्थक उनके बचाव में सामने आए हैं। उनका कहना है कि शास्त्री का उद्देश्य किसी समुदाय या वर्ग को अपमानित करना नहीं था, बल्कि समाज में घटती नैतिकता और संस्कारों पर चिंता व्यक्त करना था। समर्थकों का तर्क है कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर देखा जा रहा है और इसे गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है।
इस विवाद के बीच अंधविश्वास और चमत्कारों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ता श्याम मानव की अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने शास्त्री को एक खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि यदि शास्त्री अपने दावों में सच्चे हैं तो वे 10 लोगों के नाम, उनके पिता का नाम, उम्र और मोबाइल नंबर बिना किसी गलती के बताकर दिखाएं। इस चुनौती के जवाब में शास्त्री ने कहा कि जो भी चुनौती देना चाहता है, वह सामने आए, दरबार लगेगा और जो भी विद्या उनके पास होगी, उसका प्रदर्शन किया जाएगा।
इसके अलावा, हाल के दिनों में धीरेंद्र शास्त्री का एक और बयान भी चर्चा में रहा था, जिसमें उन्होंने हिंदुओं से चार बच्चे पैदा करने और उनमें से एक को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित करने की अपील की थी। इस बयान पर भी देशभर में व्यापक बहस छिड़ गई थी। आलोचकों ने इसे जनसंख्या और सामाजिक संतुलन से जोड़कर विवादित बताया था, जबकि उनके समर्थकों ने इसे राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रेरित बताया।
बाद में धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा था कि उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को जन्म देना नहीं था, बल्कि समाज में परिवार और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना था।
नए विवाद के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों में संयम जरूरी है, खासकर तब जब वक्ता का समाज में बड़ा प्रभाव हो। वहीं, धार्मिक संगठनों और उनके समर्थकों का कहना है कि बार-बार एक ही व्यक्ति के बयानों को विवाद बनाकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि धार्मिक प्रवचन, सामाजिक संदेश और सार्वजनिक बयानबाजी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। क्या प्रभावशाली व्यक्तियों को अपने शब्दों को लेकर अधिक जिम्मेदार होना चाहिए, या फिर समाज को उनके बयानों को संदर्भ में समझना चाहिए—यह सवाल अब चर्चा के केंद्र में है।
फिलहाल, यह मामला सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक गर्म है और आने वाले दिनों में इसके और तूल पकड़ने की संभावना है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस