कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान,सज्जन वर्मा बोले- हम जैसे लोग राज्यसभा पहुंच गए तो दूसरे नेताओं की बंद हो जाएगी दुकान
मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान तेज हो गई है। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा है कि हम पहुंचे तो दूसरे नेताओं की दुकानदारी बंद हो जाएगी। इस बयान से पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
राज्यसभा चुनाव से पहले ही मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है, जहां दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी चुनाव लड़ने से मना कर चुके हैं. वहीं अब पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि राज्यसभा जाना, तो उनके मन में है.
Sajjan Singh Verma: मध्य प्रदेश में जून में राज्यसभा की 3 तीनों पर चुनाव होना है, जिस पर दो सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का जीतना लगभग तय माना जा रहा है. वहीं कांग्रेस से उसके विधायक दगाबाजी नहीं करते हैं, तो वह भी एक सीट जीत सकती है. दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है और उन्होंने राज्यसभा चुनाव ना लड़ने का ऐलान भी किया है. दूसरी तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी राज्यसभा जाने से इंकार कर चुके हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि कांग्रेस किसी नए चेहरे पर दांव लगा सकती है. अब इससे पहले ही राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी और दावेदारी को लेकर कांग्रेस में बड़ा मतभेद उजागर हुआ है.
राज्य सभा में अपनी दावेदारी को लेकर प्रश्न पर पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि यह मन में तो है. हम जैसे लोगों को बड़ी मुश्किल होता है. अगर हम लोग राज्यसभा पहुंच जाएं, तो जिनका कांग्रेस के जरिए पूरे प्रदेश में नेटवर्क है, तो दूसरे नेताओं की दुकान बंद हो जाएगी. अब सज्जन सिंह के बयान से यह तो साफ होता है कि वह राज्यसभा जाना चाहते हैं.
सोनकच्छ से पांच बार विधायक रह चुके हैं सज्जन सिंह वर्मा
सज्जन सिंह वर्मा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उनकी पहचान एक जमीनी नेता की मानी जाती है. वह सोनकच्छ विधानसभा से पांच बार विधायक रह चुके हैं. इसके अलावा साल 2009 में उन्होंने देवास से लोकसभा का चुनाव भी जीता था. इसके बाद कांग्रेस पार्टी ने साल 2023 में उन्होंने सोनकच्छ से विधायकी का चुनाव लड़वाया था, लेकिन वह भाजपा के राजेश सोनकर से हार गए थे.
कांग्रेस के लिए फंसा है पेंच
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास फिलहाल अभी 65 विधायक हैं. लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उसकी निर्मला सप्रे लगातार बीजेपी के मंच पर नजर आ रही हैं. दूसरी तरफ मुकेश मल्होत्रा की विधायकी तो बहाल हो गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनके राज्यसभा चुनाव में वोट डालने पर रोक लगा दी है. ऐसे में उसके पास सिर्फ 63 विधायक ही हैं. जबकि मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है. ऐसे में अगर कांग्रेस के 6 विधायक और टूटे, तो उसके लिए राज्यसभा की सीट जीतना मुश्किल हो जाएगा.
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस