एमपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल तय, सीएम-सीएस के बीच मंथन तेज

वरिष्ठ नेतृत्व से चर्चा के बाद प्रदेश में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल कर आइएएस-आइपीएस अधिकारियों को नए दायित्व देने की अंदरखाने तैयारी

एमपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल तय, सीएम-सीएस के बीच मंथन तेज

अधिकारियों के प्रदर्शन पर समीक्षा तेज

वित्तीय वर्ष 2025-26 के बाद बदलेगा प्रशासनिक ढांचा

जिलों में राजस्व लक्ष्य और कामकाज बना आधार

मध्यप्रदेश में जल्द ही बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच इस मुद्दे पर कई दौर की अहम चर्चा हो चुकी है। वरिष्ठ नेतृत्व से संकेत मिलने के बाद आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां देने की तैयारी अंदरखाने तेज हो गई है।

परफॉर्मेंस और व्यवहार बना मुख्य आधार

वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्त होने के बाद सरकार अब अधिकारियों के प्रदर्शन की समीक्षा कर रही है। जिलों में राजस्व संग्रहण के लक्ष्य, प्रशासनिक दक्षता, काम करने की शैली और आम जनता के साथ व्यवहार जैसे पहलुओं को प्रमुख कसौटी बनाया गया है।

इसके साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों—सांसदों और विधायकों—के साथ अधिकारियों के संबंध भी मूल्यांकन का अहम आधार बने हैं।

निगेटिव रिपोर्ट वालों पर गिरी गाज

सूत्रों के मुताबिक, जिन अधिकारियों के खिलाफ नकारात्मक रिपोर्ट आई है, उन्हें वर्तमान पद से हटाकर नई जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस संबंध में अब तक चार दौर की चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं।

पुलिस विभाग में भी बड़ा बदलाव

प्रशासनिक फेरबदल का असर पुलिस महकमे में भी दिखेगा। डीजीपी और मुख्यमंत्री के बीच पुलिस मुख्यालय (PHQ) द्वारा तैयार सूची पर मंथन हो चुका है।

बताया जा रहा है कि 15 से अधिक जिलों के एसपी बदले जा सकते हैं।

प्रमोटेड अधिकारियों को मिल सकती नई जिम्मेदारी

खंडवा, भिंड, धार, रीवा और झाबुआ समेत कई जिलों में ऐसे अधिकारी तैनात हैं जो प्रमोशन के बाद भी एसपी पद पर ही बने हुए हैं। ऐसे करीब 9 अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी जा सकती है।

साथ ही बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को बड़े जिलों की कमान सौंपी जा सकती है।

जल्द जारी हो सकती है सूची

सरकार की तैयारी अंतिम चरण में मानी जा रही है और आने वाले दिनों में तबादलों की सूची जारी हो सकती है। यह फेरबदल प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव लेकर आएगा।