महू में दूषित पानी से मचा हड़कंप, 25 लोग गंभीर रूप से बीमार; इंदौर के बाद अब महू में भी पानी बना ज़हर, प्रशासन अलर्ट
इंदौर शहर के भागीरथपुरा में दूषित जल कांड के बाद अब जिले के महू तहसील मुख्यालय के पत्ती बाजार क्षेत्र में 10 से 15 दिनों में 19 बच्चों सहित करीब 25 लोग पीलिया, टाइफाइड सहित अन्य बीमारियों की चपेट में आए हैं। कई बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। नागरिकों के अनुसार, क्षेत्र में नलों में गंदा, बदबूदार और मटमैला पानी आ रहा है।
दूषित पानी से फैली बीमारी: महू में 15 दिनों में 24+ मरीज, प्रशासन सतर्क
पानी ने बिगाड़ी सेहत: महू में दूषित जल से सामूहिक बीमारी का मामला
MP News: इंदौर संभाग में दूषित पेयजल की समस्या थमने का नाम नहीं ले रही है. महू कैंटोनमेंट बोर्ड के पट्टी बाजार, चंदर मार्ग और मोती महल इलाकों में दूषित पानी पीने से अब तक 25 से ज्यादा लोगों के संक्रमित होने की खबर है. इनमें से 9 लोगों की हालत देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
बुधवार देर शाम अचानक इन इलाकों के रहवासियों को उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत होने लगी. देखते ही देखते मरीजों की संख्या बढ़ने लगी.
सूचना मिलते ही कलेक्टर शिवम वर्मा देर रात महू पहुंचे. उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों से बात की और फिर प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थानीय लोगों से मुलाकात की.
क्षेत्रीय विधायक उषा ठाकुर ने भी देर रात अस्पताल पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात की और संक्रमित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया.
कलेक्टर शिवम वर्मा ने मौके पर ही कड़े निर्देश जारी किए हैं. महू कैंटोनमेंट बोर्ड को तुरंत पानी की सैंपलिंग करने, पाइपलाइन की जांच करने और पूरे क्षेत्र में स्वच्छता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
शुक्रवार सुबह से प्रभावित क्षेत्रों में डोर-टू-डोर सर्वे शुरू किया जाएगा. जिन लोगों में हल्के लक्षण हैं, उन्हें घर पर ही दवाएं दी जाएंगी. CMHO डॉ. माधव हसानी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर कैंप कर रही है.
कलेक्टर ने आश्वस्त किया है कि फिलहाल कोई भी मरीज अति गंभीर स्थिति में नहीं है. भर्ती मरीजों में से कुछ को कल तक डिस्चार्ज कर दिया जाएगा. शासन की टीम पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है.
आधी रात को अस्पताल पहुंचे कलेक्टर
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। जिला कलेक्टर शिवम वर्मा गुरुवार देर रात खुद अस्पताल पहुंचे। उन्होंने मरीजों से मुलाकात की और इलाज की व्यवस्था परखी। स्वास्थ्य विभाग की एक टीम शुक्रवार सुबह से ही प्रभावित इलाकों में कैंप कर रही है। शनिवार सुबह से प्रशासन ने घर-घर सर्वे शुरू कर दिया है। इसका मकसद नए मरीजों की पहचान कर उन्हें तुरंत इलाज देना है।
जांच में मिला खतरनाक बैक्टीरिया
इसी महीने की शुरुआत में भी इंदौर में गंदे पानी ने कहर ढाया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उस समय 15 लोगों की जान गई थी। हालांकि, स्थानीय लोग मौत का आंकड़ा 25 बता रहे हैं। सरकार ने हाईकोर्ट को जानकारी दी है कि भागीरथपुरा क्षेत्र के 51 ट्यूबवेलों का पानी दूषित पाया गया है। जांच रिपोर्ट में पानी के अंदर खतरनाक ‘ई.कोलाई’ (E.coli) बैक्टीरिया होने की पुष्टि हुई है।
हाईकोर्ट की सख्ती और मुआवजा
पीने के पानी में जहर घुलने का यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में आरोप लगाया है कि सरकारी जांच समिति सिर्फ अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है। वहीं, प्रशासन ने अब तक 21 प्रभावित परिवारों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया है। प्रशासन का कहना है कि वे स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस