ई-कॉमर्स की मनमानी पर लगे लगाम! राष्ट्रीय रिटेल विकास परिषद गठन की उठी जोरदार मांग

ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियों की कथित मनमानी और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की मांग तेज हो गई है। राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय रिटेल विकास परिषद के गठन की जरूरत बताई गई है, ताकि व्यापारियों को नीति निर्माण में सीधी भागीदारी मिल सके।

ई-कॉमर्स की मनमानी पर लगे लगाम! राष्ट्रीय रिटेल विकास परिषद गठन की उठी जोरदार मांग

ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यापार के बीच समान अवसर सुनिश्चित करने को देश के संतुलित आर्थिक विकास के लिए जरूरी बताया गया।

नई दिल्ली। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियों की बढ़ती मनमानी पर सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने संसद द्वारा पारित जन विश्वास विधेयक 2.0 का स्वागत करते हुए इसे व्यापार सुगमता और विश्वास आधारित शासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना है कि इससे देश में कारोबारी माहौल बेहतर होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी पूंजी से संचालित कुछ ई-कॉमर्स कंपनियां प्रिडेटरी प्राइसिंग, अत्यधिक छूट, डार्क पैटर्न्स और इन्वेंट्री आधारित मॉडल जैसी प्रथाओं के जरिए बाजार में असंतुलन पैदा कर रही हैं। इससे छोटे और मध्यम व्यापारियों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि देश के 9 करोड़ से अधिक व्यापारी इन परिस्थितियों से प्रभावित हो रहे हैं, जबकि यही वर्ग रोजगार और आपूर्ति प्रणाली का बड़ा आधार है।

खंडेलवाल ने सरकार से राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति को जल्द लागू करने, सख्त और पारदर्शी नियम बनाने तथा प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करने की मांग की।

साथ ही, उन्होंने नीति निर्माण में व्यापारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय रिटेल विकास परिषद के गठन का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि देश के संतुलित आर्थिक विकास के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यापार के बीच समान अवसर सुनिश्चित करना जरूरी है।