150 करोड़ पर सवाल: 40 हजार टन गेहूं सड़ा,दिग्विजय ने CM मोहन को लिखा पत्र,घुन घोटाले की EOW जांच की मांग

सीहोर और रायसेन के गोदामों में 40 हजार टन गेहूं सड़ने और करीब 150 करोड़ के नुकसान के मामले में दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर EOW जांच की मांग की है। आरोप है कि किराए के खेल में अनाज जानबूझकर रोका गया और बाद में जिम्मेदारी से बचने के लिए शिफ्ट किया गया।

150 करोड़ पर सवाल: 40 हजार टन गेहूं सड़ा,दिग्विजय ने CM मोहन को लिखा पत्र,घुन घोटाले की EOW जांच की मांग

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदेश में एक बड़े अनाज घोटाले का खुलासा करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर रायसेन एवं सीहोर जिले से जुड़े बहुचर्चित गेहूँ घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने इस मामले को गंभीर आर्थिक अनियमितता बताते हुए राज्य आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (EOW) से निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है।

सिंह ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पूर्व विधानसभा क्षेत्र बुधनी तथा वर्तमान लोकसभा क्षेत्र से संबंधित इस मामले में लगभग 150 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे पहले भी 25 जुलाई 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जांच की मांग कर चुके हैं, किंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायसेन जिले की औबेदुल्लागंज तहसील के दिवटिया, अब्दुल्लागंज एवं नूरगंज स्थित सरकारी वेयरहाउस में रखे गेहूँ की देखरेख और भंडारण में अत्यधिक खर्च किया गया, जबकि लगभग 40 हजार टन गेहूँ सड़कर पूरी तरह खराब हो गया। इस गेहूँ का बाजार मूल्य लगभग 100 करोड़ रुपये बताया गया है। हैरानी की बात यह है कि इसके रखरखाव एवं किराये पर ही लगभग 150 करोड़ रुपये व्यय कर दिए गए।

सिंह ने आगे बताया कि वर्ष 2017 से 2020 के बीच समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूँ को समय पर न तो भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा उठाया गया और न ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचाया गया। परिणामस्वरूप, लंबे समय तक भंडारण के कारण गेहूँ में कीड़े लग गए और वह अनुपयोगी हो गया।

सिंह ने आरोप लगाया है कि जब गेहूँ खराब हो गया, तो उसे जिम्मेदार निजी गोदाम संचालकों को बचाने के उद्देश्य से बकतरा (सीहोर) से हटाकर रायसेन जिले के वेयरहाउस में स्थानांतरित कर दिया गया। इस प्रक्रिया में परिवहन कार्य भी कथित रूप से एक करीबी व्यक्ति को सौंपा गया, जिसमें करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे प्रकरण में जानबूझकर गेहूँ को 4-5 वर्षों तक गोदामों में रखा गया ताकि संबंधित गोदाम मालिकों को भारी-भरकम किराया दिया जा सके। जबकि नियमानुसार अतिरिक्त स्टॉक होने पर समय पर नीलामी या वितरण किया जाना चाहिए था।

दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों एवं निजी गोदाम मालिकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री के कथन “न खाऊँगा, न खाने दूंगा” का उल्लेख करते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपेक्षा जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस मामले में कार्रवाई नहीं की गई, तो यह एक बड़े घोटाले का रूप लेकर प्रदेश की आर्थिक स्थिति और प्रशासनिक विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है।