विधायक फूल सिंह बरैया के बिगड़े बोल, दिग्विजय सिंह की मौजूदगी में दिया बड़ा बयान, SC-ST प्रतिनिधियों की हालत मुंह पर पट्टी बंधे कुत्ते जैसी

अक्सर अपने बयानों को लेकर विवादों में रहने वाले भांडेर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक फूल सिंह बरैया ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने बोला कि अनुसूचित जाति (एससी)-अनुसूचित जनजाति (एसटी) के सांसद-विधायकों की स्थिति जानवरों जैसी है।

विधायक फूल सिंह बरैया के बिगड़े बोल, दिग्विजय सिंह की मौजूदगी में दिया बड़ा बयान, SC-ST प्रतिनिधियों की हालत मुंह पर पट्टी बंधे कुत्ते जैसी

कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने कहा कि जॉइंट इलेक्टोरल सिस्टम के कारण SC-ST प्रतिनिधियों की हालत मुंह पर पट्टी बंधे कुत्ते जैसी हो गई है और वे अपनी बात खुलकर नहीं कह पाते। उन्होंने सामाजिक-आर्थिक गैर-बराबरी, धर्म और जाति की राजनीति पर सवाल उठाते हुए सेपरेट इलेक्टोरल को समाधान बताया।

मध्य प्रदेश के भांडेर से कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग (SC-ST) के विधायक-सांसदों की तुलना कुत्ते से की है। उन्होंने कहा- बाबा साहब ने कहा था कि जॉइंट इलेक्टोरल में प्रवेश करने के बाद हमारे प्रतिनिधि कैसे हो जाएंगे...जैसे कुत्ते के मुंह पर बंधी पट्‌टी। काटने की बात छोड़ि​​​​​​ए, वो कुत्ता भौंक भी नहीं पाएगा।

बरैया ने कहा- हम कोशिश करें कि हमारा आदिवासी हिंदू न बन पाए। अगर आदिवासी सरना (वनों का धर्म) बन जाए तो आदिवासी की भी मुक्ति का मार्ग निकल सकता है। इधर, सीएम ने पलटवार करते हुए कहा कि ये उनके दल के अंदर हो रहा है तो उसके लिए मैं क्या करूं?

ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक में बरैया ने कही थी बात

बरैया ने ये बातें भोपाल के समन्वय भवन में 13 जनवरी को कांग्रेस की डिक्लेरेशन-2 की ड्राफ्टिंग कमेटी की बैठक में कहीं। मंच पर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, पूर्व सांसद उदित राज, झारखंड कांग्रेस के प्रभारी और रिटायर्ड आईएएस अफसर के. राजू, आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया, विधायक ओंकार सिंह मरकाम, विधायक डॉ. हीरालाल अलावा मौजूद थे।

बरैया ने क्या कहा विधायक फूल सिंह बरैया ने कहा- 2002 में भोपाल डिक्लेरेशन-1 आया था। अब डिक्लेरेशन-2 आने वाला है। हो सकता है कि ये भी आगे आने वाले समय में हमारी समस्याओं का समाधान न कर पाए। इसकी तह में जाना होगा कि समस्या कहां पर है?

मेरा ऐसा मानना है कि समस्या का समाधान बाबा साहब अंबेडकर के पास है। 25 नवंबर 1949 को बाबा साहब ने संविधान सभा में कहा था कि मेरी दो चिंताएं हैं। एक तो यह कि संविधान में यह व्यवस्था है कि देश ऊपर जाएगा, या जाति और धर्म ऊपर जाएगा?

अगर देश ऊपर रहता है तो सारी समस्याओं का हल निकाल लिया जाएगा। लेकिन, देश के ऊपर जाति और धर्म चला गया तो किसी भी समस्या का समाधान मिलने वाला नहीं है। आज आप महसूस कीजिए कि देश ऊपर है या जाति और धर्म? आज जाति और धर्म देश से ऊपर हैं।

देश जब धर्म से ऊपर होगा, तब बराबरी मिलेगी बरैया ने कहा- बाबा साहब अंबेडकर आगे कहते हैं कि हम ऐसे जीवन में प्रवेश करने जा रहे हैं, जहां पर राजनीतिक बराबरी तो नाम की होगी लेकिन सामाजिक और आर्थिक नहीं होगी। सामाजिक और आर्थिक बराबरी तब मिलेगी, जब देश ऊपर होगा और जाति-धर्म नीचे होगा। आज सामाजिक-आर्थिक गैर बराबरी से हम जूझ रहे हैं।

जॉइंट इलेक्टोरल के कारण हमारी दुर्दशा हुई कांग्रेस विधायक ने आगे कहा- बाबा साहब अंबेडकर बाद में बहुत प्रायश्चित करते रहे कि काश सेपरेट इलेक्टोरल आज होता। हमारी दुर्दशा कहां हुई, हम परिस्थितियों के कारण जॉइंट इलेक्टोरल में प्रवेश कर गए। अगर सेपरेट इलेक्टोरल होता, तो आज हम कहते कि हमारे विधायक-सांसद बोलते क्यों नहीं हैं?

वो इसलिए नहीं बोलते क्योंकि वे जॉइंट इलेक्टोरल से आए हैं। वो बोल ही नहीं सकते।

बरैया बोले कि यह बाबा साहब अंबेडकर ने उसी समय कह दिया था। उन्होंने कहा था कि इनसे उम्मीद हटा देना। आप पढ़े-लिखे लोगों से उम्मीद लगाना। वो पढ़ेंगे, आगे बढ़ेंगे। वो कुछ करेंगे। वही हम लोग आज यहां बैठे हैं। मैं समझता हूं कि जॉइंट इलेक्टोरल को खत्म करके सेपरेट इलेक्टोरल में हम आ गए तो बाबा साहब का सपना पूरा होने की तरफ पहुंचेगा।

मंच पर मौजूद रहे दिग्विजय सिंह और अन्य नेता

यह पूरा बयान भोपाल के समन्वय भवन में आयोजित बैठक में दिया गया, जहां दिग्विजय सिंह के साथ-साथ विक्रांत भूरिया जैसे नेता भी मंच पर मौजूद थे। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान किसी भी वरिष्ठ नेता की ओर से तत्काल सार्वजनिक आपत्ति दर्ज किए जाने की सूचना सामने नहीं आई है।

बरैया के बयान सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि फूल सिंह बरैया का यह बयान न केवल राजनीतिक विवाद को जन्म दे सकता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाता है और क्या पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या कार्रवाई सामने आती है।