UGC विवाद पर दिग्विजय सिंह ने तोड़ी चुप्पी: बोले– झूठे मामलों पर सजा हटाने का फैसला UGC का अपना, दुष्प्रचार किया जा रहा
UGC के नए इक्विटी रेगुलेशंस को लेकर कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि छात्रों के गुस्से की असली वजह संसदीय समिति नहीं बल्कि UGC खुद है. झूठी शिकायतों पर सजा का प्रावधान हटाना और जनरल कैटेगरी को बाहर रखना UGC का एकतरफा फैसला था. संसदीय समिति की अहम सिफारिशों को नजरअंदाज किया गया. अब इस पूरे विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय पर है.
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए इक्विटी रेगुलेशंस 2026 को लेकर देशभर के विश्वविद्यालय परिसरों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। खासकर सवर्ण (जनरल कैटेगरी) छात्रों और शिक्षकों के एक वर्ग ने नियमों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
देश के कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में भेदभाव रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने नए नियम लागू किए हैं. इन्हें इक्विटी रेगुलेशंस नाम दिया गया है. लेकिन नियमों को लेकर माहौल गर्म है. इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और समिति के हेड रहे दिग्विजय सिंह ने यूजीसी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. बुधवार को एक बड़ा दावा करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि संसदीय समिति ने इन नियमों को लेकर कुछ बेहद जरूरी सिफारिशें की थीं, जिन्हें जनवरी 2026 में जारी फाइनल गाइडलाइंस में पूरी तरह शामिल नहीं किया गया.
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
किसी भी छात्र के साथ कॉलेज में जाति, सामाजिक वर्ग या दिव्यांगता के आधार पर भेदभाव न हो. इसके लिए यूजीसी ने 2025 में नियमों का एक ड्राफ्ट तैयार किया था.
इसके बाद संसद की एक समिति ने इस ड्राफ्ट की समीक्षा की और कुछ जरूरी बदलाव सुझाए. इस समिति के अध्यक्ष खुद दिग्विजय सिंह थे. जनवरी 2026 में जब यूजीसी ने अंतिम नियम जारी किए, तब विवाद शुरू हो गया. बता दें संसदीय समिति ने 13 अक्टूबर को यह रिपोर्ट अडॉप्ट की थी और और 8 दिसंबर को इसे प्रेजेंट किया गया था. 3 महीने बाद यानी 13 जनवरी को यूजीसी ने इन नियमों को लागू किया था.
दिग्विजय सिंह ने क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता और इस समिति के हेड रहे दिग्विजय सिंह का कहना है कि समिति की दो अहम सिफारिशों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया.
पहली सिफारिश यह थी कि भेदभाव की शिकायतों की जांच करने वाली समिति में SC, ST और OBC वर्ग के सदस्यों की संख्या आधे से ज्यादा होनी चाहिए,
दूसरी सिफारिश यह थी कि "भेदभाव" की साफ-साफ परिभाषा तय की जाए और यह बताया जाए कि किन कामों को भेदभाव माना जाएगा.
समिति की मुख्य सिफारिशें ये थीं:
1. OBC छात्रों को भी जातिगत उत्पीड़न की परिभाषा में साफ तौर पर शामिल किया जाए, क्योंकि संविधान में उन्हें सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा वर्ग माना गया है.
2. विकलांगता (दिव्यांगता) को भी भेदभाव का आधार माना जाए.
3. इक्विटी कमेटी में SC, ST और OBC वर्ग के सदस्यों की संख्या 50% से ज्यादा हो, ताकि फैसले निष्पक्ष हों.
4. नियमों में साफ लिखा जाए कि किन-किन कामों को "भेदभाव" माना जाएगा, ताकि कॉलेज अपनी मर्जी से फैसला न कर सकें.
5. हर साल जातिगत भेदभाव के मामलों की सार्वजनिक रिपोर्ट जारी हो, शिक्षकों और स्टाफ को संवेदनशीलता की ट्रेनिंग दी जाए और छात्रों को मानसिक स्वास्थ्य व कानूनी मदद मिले.
इन सिफारिशों का नहीं माना गया
जनवरी 2026 में UGC ने अंतिम नियम जारी किए. दिग्विजय सिंह का आरोप है कि इसमें समिति की सिफारिश नंबर 1, 2 और 5 मान ली गईं, लेकिन 3 और 4 को नहीं माना गया. इसके अलावा, UGC ने अपने स्तर पर एक और बदलाव किया. ड्राफ्ट में झूठी शिकायत करने वाले छात्रों को सजा देने का प्रावधान था, जिसे अंतिम नियमों से हटा दिया गया. यह फैसला UGC ने खुद लिया, संसद की समिति ने नहीं कहा था.
छात्र क्यों कर रहे हैं विरोध?
नए नियमों का विरोध खासतौर पर जनरल कैटेगरी के छात्र कर रहे हैं. उनका कहना है कि पहले ड्राफ्ट में झूठी शिकायत करने वालों के लिए सजा का प्रावधान था, जिसे अंतिम नियमों से हटा दिया गया. छात्रों को डर है कि अगर कोई झूठी शिकायत करता है तो निर्दोष छात्र फंस सकते हैं.
इसके अलावा नियमों में केवल SC, ST और OBC वर्ग का ही विशेष रूप से उल्लेख है, जिससे जनरल कैटेगरी के छात्रों को लगता है कि उनके अधिकारों को नजरअंदाज किया गया है और अप्रत्यक्ष रूप से उन्हीं को दोषी बताया जा रहा है.
दिग्विजय सिंह ने क्या कहा?
दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि ये दोनों फैसले UGC ने खुद लिए हैं, संसदीय समिति ने ऐसा सुझाव नहीं दिया. उनका कहना है कि भेदभाव खत्म होना जरूरी है, अगर नियमों में साफ-साफ यह बताया जाता कि भेदभाव क्या होता है और कौन से काम गलत माने जाएंगे, तो इससे असली पीड़ितों को सुरक्षा मिलती और फर्जी मामलों की संभावना भी कम होती. यही बात समिति ने सुझाई थी, लेकिन UGC ने इसे नजरअंदाज कर दिया. अब इस पूरे विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी UGC और शिक्षा मंत्रालय की है.
नियम अडॉप्ट के समय कौन-कौन शामिल था?
13 अक्टूबर को जब UGC से जुड़े ड्राफ्ट नियमों को अपनाने की प्रक्रिया चल रही थी, उस समय शिक्षा से संबंधित संसदीय स्थायी समिति (Department-related Parliamentary Standing Committee) की बैठक हुई थी. इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने की थी और इस बैठक में कुल 10 सांसद मौजूद थे, जिनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष - दोनों के प्रतिनिधि शामिल थे.
बैठक में मौजूद सांसद
दिग्विजय सिंह - अध्यक्ष (कांग्रेस)
डॉ. सी. सुधाकर कुमार
श्यामचरण तिवारी
शोभाबेन महेंद्रसिंह बरैया
जितेंद्र कुमार दोहरे
अभिजीत गंगोपाध्याय
हेमेंग जोशी
रवि शंकर प्रसाद (बीजेपी)
संजा लाल नरेश
बांसुरी स्वराज (बीजेपी)
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस