ऐतिहासिक निर्णय: गुजरात राज्य पात्रता परीक्षा में ‘योग’ विषय को मिली मान्यता,योग शिक्षा को नई उड़ान, इंडियन योगिनी एसोसिएशन की पहल रंग लाई
नीति संवाद और महिला नेतृत्व की सफलता, योग शिक्षा को मिली नई पहचान,जीवनशैली से अकादमिक विषय तक योग की यात्रा, गुजरात ने रचा इतिहास
• महिला नेतृत्व की पहल से योग को राष्ट्रीय अकादमिक मान्यता की ओर बढ़ा कदम
• योग शिक्षा को संस्थागत स्वरूप देने में महिला नेतृत्व की ऐतिहासिक पहल
नई दिल्ली/अहमदाबाद। गुजरात में महिला नेतृत्व के सशक्त हस्तक्षेप से योग शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और दूरगामी निर्णय सामने आया है। गुजरात राज्य पात्रता परीक्षा में “योग” विषय को औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है, जिसे शिक्षा, शोध और अकादमिक नियुक्तियों के लिहाज से एक बड़ा राष्ट्रीय कदम माना जा रहा है। इस निर्णय के केंद्र में इंडियन योगिनी एसोसिएशन गुजरात चैप्टर की अध्यक्ष कामिना पटेल और उनकी टीम की रणनीतिक पहल रही, जिन्होंने योग को केवल जीवनशैली नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, अकादमिक और करियर-आधारित विषय के रूप में स्थापित करने की ठोस पैरवी की।
करीब छह महीने पहले संस्था ने अहमदाबाद, जूनागढ़, पाटन, पोरबंदर सहित कई जिलों के कलेक्टरों को औपचारिक आवेदन सौंपे। इसके बाद एक माह पूर्व राज्य की शिक्षा मंत्री श्रीमती रिवाबा जाडेजा से हुई बैठक में योग शिक्षकों के भविष्य, शोध अवसरों और स्थायी भर्ती की आवश्यकता को तथ्यात्मक और नीतिगत दृष्टिकोण से रखा गया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस पूरे प्रक्रिया में महिला नेतृत्व संवाद, नीति-प्रस्तुति और निर्णय निर्माण के केंद्र में रहा। बाद में कैबिनेट मंत्री प्रद्युम्न वाजा से भी भेंट कर विषय को शासन स्तर पर आगे बढ़ाया गया, जहां इसे गंभीरता और सकारात्मक दृष्टि से लिया गया।
मात्र एक माह के भीतर ही इन प्रयासों का परिणाम सामने आया और गुजरात राज्य पात्रता परीक्षा में योग विषय को सम्मिलित करने की अधिसूचना जारी की गई। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल गुजरात, बल्कि देशभर में योग को अकादमिक मुख्यधारा में लाने की दिशा में मिसाल बनेगा।
संस्था की उपाध्यक्ष विद्या पाटील के साथ-साथ पूरी टीम ने योग शिक्षकों की स्थायी नियुक्ति को लेकर भी सरकार के समक्ष ठोस नीति प्रस्ताव रखा है, जिस पर राज्य सरकार द्वारा आगामी बैठकों में नीति निर्धारण का आश्वासन दिया गया है।
इस अवसर पर इंडियन योगिनी एसोसिएशन की ओर से गुजरात सरकार, संबंधित विभागों तथा संस्था की फाउंडर डॉ. आर. एच. लता के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया। संगठन का कहना है कि यह उपलब्धि महिला नेतृत्व की दूरदृष्टि, संवाद क्षमता और निरंतरता का परिणाम है। राष्ट्रीय स्तर पर इसे महिला-नेतृत्व आधारित नीति-हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है, जिसने योग को शिक्षा, शोध और रोजगार के स्थायी ढांचे से जोड़ने की दिशा में ठोस आधार प्रदान किया है।
Samri
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस