सुशीला कार्की आज नेपाल की अंतरिम पीएम बनेंगी,बनारस से है इनका खास नाता,बीएचयू की छात्रा रहीं कार्की
सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनने वाली हैं. वह केपी शर्मा ओली की जगह लेंगी. सुशीला का भारत से खास कनेक्शन रहा है. उन्होंने BHU से पढ़ाई की है. भारत में बिताए दिनों को सुशीला आज भी याद करती हैं. उन्होंने पीएम मोदी और हिंदुस्तान को लेकर जो बयान दिया है उससे संकेत साफ हैं कि दोनों देशों के रिश्ते सुधरने वाले हैं.
नेपाल के युवा चाहते हैं कि सुशीला कार्की देश की अंतरिम सरकार की प्रमुख बनें. उनके नाम पर सहमति जातई गई है. अब वह सेना के साथ बातचीत करेंगी.
नेपाल की पहली महिला चीफ जस्टिस रहीं सुशीला कार्की कल नेपाल की अंतरिम पीएम बनेंगी। उनके नाम पर सहमति बन गई है। काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने उनका समर्थन किया है।
प्रदर्शनकारियों ने बुधवार शाम को छह घंटे की मैराथन बैठक के बाद यह फैसला लिया. इस वर्चुअल मीटिंग में सुशीला कार्की को अंतरिम हेड के रूप में चुना गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुशीला कार्की ने भी अंतरिम PM की जिम्मेदारी संभालने के लिए सहमति दे दी है.
Gen Z प्रदर्शनकारियों की कई मागें हैं, जिनमें तत्कालीन प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और सामूहिक हत्याओं के आदेश देने वाले सभी लोगों की तुरंत गिरफ्तारी और कार्रवाई के लिए एक नया संविधान तैयार करना शामिल है. वह ऐसे संविधान की मांग कर रहे हैं, जिसमें एक शख्स को दो कार्यकाल से ज़्यादा प्रधानमंत्री बनने से रोकने का प्रावधान हो. इसके साथ ही सीआईएए और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं में राजनीतिक रूप से प्रभावित नियुक्तियों को तत्काल रद्द करना और योग्यता के आधार पर नियुक्तियां भी उनकी मांगों में शामिल हैं. नेपाल के युवा चाहते हैं कि सुशीला कार्की सेना के साथ वार्ता का नेतृत्व करें.
कौन हैं सुशीला कार्की?
सुशीला कार्की नेपाल की न्यायपालिका में एक जाना-पहचाना नाम हैं. वो नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश (First Woman Chief Justice of Nepal) रही हैं, ये अपने आप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है. इन्होंने कानून की पढ़ाई बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से की. किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली कार्की अपने पिता की सात संतानों में सबसे बड़ी हैं. कार्की ने 1979 में विराटनगर में अपनी वकालत शुरू की और 1985 में महेंद्र मल्टीपल कैंपस, धरान में असिस्टेंट टीचर के रूप में काम किया.
वे 2007 में वरिष्ठ अधिवक्ता बनीं. 22 जनवरी 2009 को उन्हें सर्वोच्च न्यायालय में एड-हॉक न्यायधीश नियुक्त किया गया. इसके बाद 18 नवंबर 2010 को वह सुप्रीम कोर्ट की स्थायी न्यायाधीश बनीं. कार्की 13 अप्रैल 2016 को नेपाल की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनीं और 11 जुलाई 2016 को वे सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुईं. वे इस पद पर 6 जून 2017 तक रहीं. 30 अप्रैल 2017 को कार्की के विरुद्ध संसद में महाभियोग प्रस्तुत किया गया. हालांकि बाद में जन दबाव और संसद की कार्यवाही पर रोक लगाने वाले सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के बाद ये प्रस्ताव वापस ले लिया गया.
सुशीला कार्की की उपलब्धियां
सुशीला कार्की का न्यायिक करियर उपलब्धियों से भरा रहा है. इन्होंने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए, जिन्होंने नेपाल के कानूनी और राजनीतिक परिदृश्य पर गहरा प्रभाव डाला. इनके कुछ प्रमुख योगदानों में शामिल हैं:
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख: कार्की ने भ्रष्टाचार के मामलों में कभी नरमी नहीं बरती. इन्होंने कई हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त फैसले सुनाए, जिससे ये जनता के बीच 'एंटी-करप्शन' आइकन के रूप में स्थापित हो गईं. इनके फैसलों ने ये संदेश दिया कि कानून के सामने कोई भी बड़ा नहीं है.
स्वतंत्र न्यायपालिका की हिमायत: इन्होंने हमेशा न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने पर जोर दिया. इन्होंने राजनीतिक दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया, जिससे ये एक मजबूत और स्वतंत्र न्यायिक प्रणाली की प्रतीक बन गईं.
महिला अधिकारों की समर्थक: एक महिला न्यायाधीश के रूप में, इन्होंने महिला अधिकारों और लैंगिक समानता के मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया. इनके कई फैसलों ने महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने में मदद की.
संविधानवाद के प्रति प्रतिबद्धता: कार्की हमेशा संविधान के सर्वोच्चता में विश्वास रखती थीं. इन्होंने सुनिश्चित किया कि सभी निर्णय संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप हों.
क्यों हैं Gen Z की पसंद?
युवाओं को लगता है कि कार्की एक ऐसी नेता हैं जिन पर भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं है. उनकी न्यायिक पृष्ठभूमि उनकी निष्पक्षता का प्रमाण है. नेपाल को इस समय ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो कठिन निर्णय ले सके. कार्की का ट्रैक रिकॉर्ड बताता है कि वे ऐसा करने में सक्षम हैं. वो किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं हैं, जिससे Gen Z को लगता है कि वो दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के हित में काम करेंगी. मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका अनुभव उन्हें देश की कानूनी और संवैधानिक बारीकियों की गहरी समझ देता है, जो एक अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए आवश्यक है.इसके अलावा, काठमांडू के मेयर और कुछ अन्य स्थानीय नेताओं ने भी उनका समर्थन जताया है.
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस