वक्फ की 253 एकड़ जमीन विवाद ने पकड़ा तूल: जुम्मे की नमाज के बाद भोपाल में प्रदर्शन, कांग्रेस नेताओं पर लगाए गंभीर आरोप
रायसेन के बाड़ी में वक्फ बोर्ड की 253 एकड़ जमीन के कथित सौदे पर विवाद गहराया। भोपाल में जुमे की नमाज के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस नेता पर लगाए आरोप।
रायसेन जिले के बाड़ी क्षेत्र की 253 एकड़ वक्फ जमीन के कथित सौदे को लेकर राजधानी भोपाल में विरोध प्रदर्शन हुआ। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने मामले में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
भोपाल/रायसेन। रायसेन जिले के बाड़ी क्षेत्र में स्थित वक्फ बोर्ड की कथित 253 एकड़ जमीन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद राजधानी भोपाल की ताजुल मस्जिद के बाहर मुस्लिम समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन कर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई। प्रदर्शन का नेतृत्व ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों ने किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और जमीनों के सौदों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग तख्तियां और बैनर लेकर पहुंचे। उन्होंने वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शी प्रबंधन की मांग करते हुए प्रशासन एवं सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वक्फ की जमीनें मुस्लिम समाज की अमानत हैं और उनका उपयोग केवल धार्मिक, सामाजिक एवं जनहित के कार्यों के लिए होना चाहिए।
जमीन सौदेबाजी पर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बाड़ी क्षेत्र की 253 एकड़ वक्फ भूमि से जुड़े लेन-देन में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जमीन के हस्तांतरण, उपयोग या प्रबंधन में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
समाज के लोगों ने कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियां किसी व्यक्ति विशेष की नहीं बल्कि पूरे समुदाय की धरोहर होती हैं। ऐसे में इनके संरक्षण और सही उपयोग की जिम्मेदारी संबंधित संस्थाओं और अधिकारियों पर होती है। यदि इन संपत्तियों के साथ किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
भोपाल तक जुड़े होने का दावा
प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने दावा किया कि बाड़ी की जमीन का मामला केवल रायसेन जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी कड़ियां भोपाल तक जुड़ी हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों से जुड़े कई मामलों में प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए ताकि किसी भी प्रकार की शंका समाप्त हो सके। उनके अनुसार समाज के लोगों में इस मुद्दे को लेकर गहरी चिंता है और वे चाहते हैं कि वक्फ की संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
कांग्रेस नेता पर लगाए आरोप
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता इरफान दुर्रानी का नाम भी सामने आया। प्रदर्शनकारियों ने उन पर और कुछ अन्य नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए तथा मामले की जांच की मांग की। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित नेताओं की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि आरोपों की सत्यता की जांच होना आवश्यक है और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं बल्कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
एक दर्जन से अधिक नेताओं के नाम होने का दावा
मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस से जुड़े एक दर्जन से अधिक पुराने नेताओं और पदाधिकारियों के नामों का उल्लेख किया गया है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार ज्ञापन में कथित तौर पर कुछ नेताओं की संपत्तियों और वक्फ भूमि से जुड़े लेन-देन का भी विवरण दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जिन नामों का उल्लेख किया गया है उनमें शमशुल हसन द्वारा बताए गए कुछ राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा पूर्व अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रह चुके व्यक्तियों और अन्य पदाधिकारियों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद हैं।
वक्फ संपत्तियों को बताया समाज की अमानत
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि वक्फ की जमीनें धार्मिक संस्थानों, शिक्षा, गरीबों की सहायता और सामाजिक कल्याण के उद्देश्यों के लिए सुरक्षित रखी जाती हैं। इसलिए इन संपत्तियों का संरक्षण पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी इन जमीनों का दुरुपयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।
समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि प्रदेश सरकार वक्फ संपत्तियों का व्यापक सर्वे कराए और विवादित मामलों की स्वतंत्र जांच कराकर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखे। उनका कहना था कि इससे समाज में फैली आशंकाएं दूर होंगी और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी।
सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग
प्रदर्शन के अंत में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
फिलहाल 253 एकड़ वक्फ भूमि का यह विवाद राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और सरकार इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और आरोपों की जांच किस स्तर पर कराई जाती है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस