भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव: पीएम मोदी सहित 5708 मतदाताओं की सूची जारी, पहली बार वोट नहीं कर पाएंगे आडवाणी और जोशी

भारतीय जनता पार्टी ने संगठन पर्व-2024 के तहत नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है. चुनाव कार्यक्रम जारी कर दिया गया है. इलेक्टोरल कॉलेज से लेकर नामांकन, जांच, वापसी और संभावित मतदान तक पूरी प्रक्रिया तय कर दी गई है.

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव: पीएम मोदी सहित 5708 मतदाताओं की सूची जारी, पहली बार वोट नहीं कर पाएंगे आडवाणी और जोशी

19 जनवरी को उनका नामांकन होगा और 20 जनवरी को उनकी जीत की औपचारिक घोषणा की जाएगी। उनके नामांकन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह प्रस्तावक बनेंगे।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है. 1980 में बीजेपी की स्थापना के बाद से ही ऐसा पहली बार है, जब पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से शामिल लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी बीजेपी अध्यक्ष के निर्वाचन मंडल में शामिल नहीं हैं. आइए जानते हैं इसकी वजह क्या है?

भारतीय जनता पार्टी ने अपने अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह पूरी प्रक्रिया पार्टी के देशव्यापी संगठनात्मक अभियान ‘संगठन पर्व-2024’ के तहत कराई जा रही है. चुनाव कार्यक्रम को शुक्रवार को बीजेपी के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण ने अधिसूचित कर दिया है.

पार्टी संविधान के तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक तय प्रक्रिया के अनुसार होता है, जिसमें इलेक्टोरल कॉलेज, नामांकन, जांच, नाम वापसी और जरूरत पड़ने पर मतदान शामिल है.

भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन बन सकता है 

भाजपा के संविधान के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद डिफॉल्ट रूप से सांसदों, मंत्रियों या फिर वरिष्ठ नेताओं तक सीमित नहीं होता. दरअसल एक जमीनी स्तर का कार्यकर्ता भी चुनाव लड़ सकता है. लेकिन पात्रता की शर्तें इतनी ज्यादा कड़ी हैं कि पार्टी के अंदर का काफी छोटा समूह ही इसके लिए योग्य हो पाता है.

सबसे पहले उम्मीदवार को लंबे समय से भाजपा का सदस्य होना चाहिए. कम से कम 15 साल की पार्टी सदस्यता जरूरी है. इसके अलावा उस व्यक्ति ने कम से कम चार संगठनात्मक कार्यकाल के लिए सक्रिय सदस्य के रूप में काम किया हो. 

एक खास बात है कि 1980 में बीजेपी की स्थापना के बाद से ऐसा पहली बार हुआ है जब पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से शामिल लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी बीजेपी अध्यक्ष के निर्वाचन मंडल में शामिल नहीं हैं.

  दरअसल, निर्वाचन मंडल के गठन के लिए बीजेपी संविधान के अनुसार सबसे पहले बूथ स्तर, फिर मंडल, जिला और अंत में प्रदेश स्तर के अध्यक्षों का चुनाव होता है. इन चुनावों के बाद ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल तैयार होता है. इस निर्वाचन मंडल में राष्ट्रीय परिषद और प्रदेश परिषदों के सदस्य शामिल होते हैं. प्रदेश संगठन के चुनाव में परिषद के सदस्यों का चुनाव कराया जाता है.

बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में आडवाणी और जोशी हैं शामिल

महत्वपूर्ण बात यह है कि लाल कृष्ण आडवाणी लंबे समय तक गांधीनगर से सांसद होने के नाते गुजरात से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य निर्वाचित होते आए थे. 2021 में वे दिल्ली से परिषद के सदस्य हैं. इसी तरह मुरली मनोहर जोशी भी कानपुर से सांसद होने के नाते उत्तर प्रदेश से परिषद के सदस्य थे. बाद में सांसद न होने पर वे दिल्ली से परिषद के सदस्य निर्वाचित हुए थे. लेकिन अभी तक दिल्ली प्रदेश संगठन के चुनाव संपन्न नहीं हुए हैं. इसलिए दिल्ली से राष्ट्रीय परिषद के सदस्य निर्वाचित नहीं हो सके हैं. ऐसे हालात में आडवाणी और जोशी दोनों ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन मंडल में शामिल नहीं हो सके हैं. गौरतलब है कि इन दोनों ही शीर्ष नेताओं को बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया गया है.

क्या होती है प्रक्रिया 

भाजपा अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ना सिर्फ नामांकन फॉर्म भरने जितना आसान नहीं होता। पार्टी एक सामूहिक समर्थन प्रणाली का पालन करती है. योग्य होने के लिए एक उम्मीदवार को भाजपा के इलेक्टोरल कॉलेज से कम से कम 20 सदस्यों के द्वारा प्रस्तावित किया जाना चाहिए. इसी के साथ ये प्रस्तावक सभी एक ही क्षेत्र से नहीं हो सकते. उन्हें कम से कम पांच अलग-अलग राज्यों से संबंधित होना चाहिए जहां राज्य स्तर के संगठनात्मक चुनाव पहले ही पूरे हो चुके हैं.

भाजपा अध्यक्ष का चुनाव कौन करता है 

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव एक खास तौर से गठित इलेक्टोरल कॉलेज द्वारा किया जाता है, ना कि आम पार्टी सदस्यों या फिर जनता द्वारा. इस इलेक्टोरल कॉलेज में भाजपा राष्ट्रीय परिषद के सदस्य और राज्य परिषद के सदस्य जिनके आंतरिक चुनाव पूरे हो चुके हैं शामिल होते हैं. 

इसी के साथ एक और जरूरी शर्त यह है कि राष्ट्रपति चुनाव होने से पहले पार्टी के कम से कम 50% संगठनात्मक राज्यों में राज्य अध्यक्ष चुनाव पूरे होने चाहिए. 

कार्यकाल और कार्यकाल की सीमा 

भाजपा संविधान अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के कार्यकाल को साफ तौर से परिभाषित करता है. हर कार्यकाल 3 साल का होता है. इसी के साथ कोई भी व्यक्ति लगातार दो से ज्यादा कार्यकाल के लिए इस पद पर नहीं रह सकता. 

तो क्या कोई आम कार्यकर्ता सच में चुनाव लड़ सकता है 

कानूनी और संवैधानिक रूप से कोई आम कार्यकर्ता भी चुनाव लड़ सकता है. अगर बात करें व्यावहारिक रूप से तो सिर्फ दशकों के अनुशासित संगठनात्मक काम, व्यापक राष्ट्रीय समर्थन और नेतृत्व के समर्थन के बाद ही कोई आदमी चुनाव लड़ सकता है.