कांग्रेस का आरोप 'खंडवा DM ने AI से बनी तस्वीरें बनाकर राष्ट्रपति से ले लिया पुरस्कार':राष्ट्रीय अवॉर्ड के लिए अपलोड किए फर्जी आंकड़े और तस्वीरें

MP में राष्ट्रीय जल पुरस्कार को लेकर विवाद गहरा गया. कांग्रेस ने खंडवा प्रशासन पर एआई से बनी तस्वीरों के जरिए पुरस्कार लेने का आरोप लगाया है. वहीं जिला प्रशासन ने इन दावों को खारिज किया.

कांग्रेस का आरोप 'खंडवा DM ने AI से बनी तस्वीरें बनाकर राष्ट्रपति से ले लिया पुरस्कार':राष्ट्रीय अवॉर्ड के लिए अपलोड किए फर्जी आंकड़े और तस्वीरें

IAS ऋषव गुप्ता और IAS डॉ. नागार्जुन गौड़ा को मिले National Water Award को लेकर सोशल मीडिया पर AI फोटो और फर्जी आंकड़ों के आरोप सामने आए. खंडवा (Khandwa News) जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जल संचय, जनभागीदारी (JSJB 1.0) अभियान के तहत अपलोड की गई 1.29 लाख तस्वीरों का केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा सत्यापन हुआ था और वायरल दावों का पुरस्कार से कोई संबंध नहीं है.

खंडवा. जिले को मिले जल संरक्षण अवॉर्ड को लेकर विगत दिनों से लगातार सवाल उठ रहे हैं. सोशल मीडिया पर अवॉर्ड से जुड़े दावों को लेकर तरह-तरह की पोस्ट वायरल हो रही हैं. सवाल उठाए गए कि झूठ के सहारे राष्ट्रपति के हाथों अवॉर्ड लिया गया है. अब पूरे मामले में जिला प्रशासन ने अपना पक्ष रख है. उन्होंने स्थिति स्पष्ट की है और फेक न्यूज़ फैलाने का आरोप लगाया है.

खंडवा जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले को जल संचय जन भागीदारी (JSJB) कार्यक्रम के तहत देश में सर्वाधिक जल संरक्षण कार्यों के निर्माण के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. प्रशासन के मुताबिक, जल संचय जन भागीदारी कार्यक्रम के लिए एक अलग और समर्पित पोर्टल उपलब्ध था, जिस पर ब्लॉक स्तर और जिला स्तर पर गहन जांच के बाद केवल सत्यापित तस्वीरें ही अपलोड की गई थीं.

कैच द रेन नामक एक अलग पोर्टल

प्रशासन ने बताया कि JSJB के अंतर्गत खंडवा जिले में 1 लाख 25 हजार से अधिक जल संरक्षण कार्य किए गए, जिसके आधार पर यह सम्मान प्रदान किया गया. जिला प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि कैच द रेन नामक एक अलग पोर्टल है, जिस पर जल संरक्षण से संबंधित आईईसी यानी शैक्षणिक और प्रेरणात्मक तस्वीरें अपलोड की जाती हैं. प्रशासन के संज्ञान में आया है कि CTR पोर्टल पर लगभग 20 एआई द्वारा निर्मित तस्वीरें अपलोड की गई थीं.

क्या बोले अधिकारी?

खंडवा जिला पंचायत सीईओ डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा का कहना है कि इन एआई जनित तस्वीरों को अपलोड करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और इसकी जांच जारी है. प्रशासन ने दो टूक कहा है कि CTR पोर्टल और JSJB पोर्टल दोनों पूरी तरह अलग हैं. CTR पोर्टल पर अपलोड की गई शैक्षणिक तस्वीरों का JSJB पुरस्कार से कोई लेना-देना नहीं है और न ही इन्हें पुरस्कार के मूल्यांकन में शामिल किया गया था. जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की सही जानकारी अवश्य लें और भ्रामक खबरें फैलाने से बचें.