गरजे बाबा बागेश्वर,पेपर लीक हो जाते हैं, पर कभी चुनाव लीक नहीं होते:NEET मामले पर बागेश्वर बाबा का बयान, बोले- सिस्टम को सजा मिलनी चाहिए
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने "एक देश, एक चुनाव" की वकालत करते हुए कहा है कि भारत को बार-बार होने वाले चुनावों से मुक्ति मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पंच, सरपंच, पार्षद, मेयर, विधायक और सांसद तक के चुनाव एक साथ होने से हजारों करोड़ रुपये की बचत होगी. साथ ही प्रशासनिक संसाधनों और समय का बेहतर उपयोग हो सकेगा.
नीट पेपर लीक पर बाबा बागेश्वर का बड़ा बयान: छात्रों के दर्द को समझने की जरूरत
बाबा बागेश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने नीट पेपर लीक को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि जब सिस्टम की लापरवाही से पेपर लीक होता है, तो अगली बार की फीस माफ होनी चाहिए ताकि सिस्टम को अपनी गलती का अहसास हो.
बद्रीनाथ धाम। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है। बद्रीनाथ धाम में आयोजित सत्यनारायण कथा के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं लाखों छात्रों और उनके परिवारों के सपनों को तोड़ देती हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों में प्रभावित विद्यार्थियों को राहत दी जानी चाहिए और उनकी अगली परीक्षा की फीस माफ की जानी चाहिए।
कथा के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने उन छात्रों और अभिभावकों की पीड़ा का उल्लेख किया जो वर्षों की मेहनत और उम्मीदों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले कई छात्र उनसे मिलने आए थे, जो नीट पेपर लीक प्रकरण से बेहद निराश और दुखी थे। जब उन्होंने छात्रों से उनकी उदासी का कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो गया है और उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है।
युवाओं को हिम्मत देते हुए बाबा बागेश्वर ने एक प्रसिद्ध चौपाई सुनाई— "हारियो न हिम्मत, बिसारियो न नाम।" उन्होंने कहा कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आती हैं, लेकिन उनसे हार नहीं माननी चाहिए। भगवान और सफलता दोनों उन्हें मिलते हैं जो अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित होकर डूब जाते हैं। उन्होंने कहा कि असफलता या विपरीत परिस्थितियां किसी व्यक्ति की अंतिम मंजिल तय नहीं करतीं, बल्कि संघर्ष ही सफलता का रास्ता बनाता है।
अपने संबोधन में उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं पर कटाक्ष भी किया। उन्होंने कहा, "पेपर लीक हो जाते हैं, लेकिन कभी चुनाव लीक नहीं होते।" इस टिप्पणी पर कथा में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का माहौल बन गया। उन्होंने आगे मजाकिया अंदाज में कहा कि काश कभी नेताओं के वोट भी लीक हो जाएं, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ सके। हालांकि उनका मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करना था।
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की कठिनाइयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के लाखों माता-पिता अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर या अन्य बड़े पदों पर देखने का सपना संजोते हैं। इसके लिए वे खेती करते हैं, मजदूरी करते हैं, कर्ज लेते हैं और अपनी जरूरतों में कटौती कर बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। ऐसे में जब कोई परीक्षा पेपर लीक होता है, तो केवल परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीदों और वर्षों की मेहनत को गहरा आघात पहुंचता है।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं का असर केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी बहुत गंभीर होता है। छात्र तनाव, निराशा और असुरक्षा का सामना करते हैं। कई बार उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत का कोई मूल्य नहीं रह गया है। ऐसे माहौल में युवाओं का मनोबल बनाए रखना और उन्हें न्याय दिलाना बेहद आवश्यक है।
बाबा बागेश्वर ने इस पूरे मामले में विद्यार्थियों को दोषी ठहराने की प्रवृत्ति का विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इसमें छात्रों की कोई गलती नहीं है। अगर परीक्षा प्रणाली में खामियां हैं और प्रश्नपत्र लीक हो रहा है तो इसकी जिम्मेदारी व्यवस्था और संबंधित तंत्र की है। उन्होंने कहा कि जब गलती सिस्टम की है तो उसका दंड भी सिस्टम को ही भुगतना चाहिए।
इसी संदर्भ में उन्होंने सुझाव दिया कि जिन छात्रों की परीक्षा पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण प्रभावित हुई है, उनकी अगली परीक्षा की फीस पूरी तरह माफ कर दी जानी चाहिए। उनके अनुसार यह कदम एक प्रकार का मुआवजा होगा और इससे छात्रों को कुछ राहत मिलेगी। साथ ही इससे प्रशासन और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं पर भी जिम्मेदारी तय होगी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अधिक प्रभावी कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि जब तक व्यवस्था खुद नुकसान नहीं उठाएगी, तब तक उसे अपनी गलतियों का वास्तविक एहसास नहीं होगा। इसलिए सुधार की दिशा में ठोस कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने सरकार और संबंधित एजेंसियों से परीक्षा प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी तथा तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की अपील की।
अंत में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने छात्रों से निराश न होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कठिनाइयां जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन मेहनत और धैर्य का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने युवाओं से अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने और संघर्ष जारी रखने का संदेश दिया। उनका मानना है कि ईमानदारी और निरंतर प्रयास करने वाले विद्यार्थियों की मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती।
नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर दिया गया उनका यह बयान सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोगों ने छात्रों के हित में दिए गए उनके सुझावों का समर्थन किया है, जबकि कुछ लोग परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग को और अधिक महत्वपूर्ण बता रहे हैं। फिलहाल यह मुद्दा देशभर में शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर बहस का केंद्र बना हुआ है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस