सिंगरौली कोल ब्लॉक पर घमासान: सरकार पर गंभीर आरोप, जांच से बच रही सत्ता; कांग्रेस का सदन से वॉकआउट

विधानसभा के बजट सत्र का नौवां दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। सदन में प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले के धिरौली स्थित अडानी के कोल ब्लॉक का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक के लिए 8 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है और कलेक्टर की सूची के अनुसार 12,998 परिवार प्रभावित हैं। प्रभावित आदिवासी परिवारों को पूरा मुआवजा नहीं मिला है।

सिंगरौली कोल ब्लॉक पर घमासान: सरकार पर गंभीर आरोप, जांच से बच रही सत्ता; कांग्रेस का सदन से वॉकआउट

मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में सिंगरौली की कोल माइंस के लिए पेड़ों की कटाई पर तीखी बहस छिड़ गई। भाजपा विधायक रामनिवास शाह ने इसे विकास के लिए जरूरी बताया, जबकि कांग्रेस ने अडाणी समूह को खुली छूट देने का आरोप लगाया

विधानसभा के बजट सत्र का आज नौवां दिन है। सदन में प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सिंगरौली जिले के धिरौली स्थित अडानी के कोल ब्लॉक का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक के लिए 8 गांवों की जमीन अधिग्रहित की जा रही है और कलेक्टर की सूची के अनुसार 12,998 परिवार प्रभावित हैं।

Singrauli Coal Block Controversy: मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का नौवां दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। सिंगरौली जिले के धिरौली स्थित कोल ब्लॉक के अधिग्रहण और मुआवजे में कथित धांधली को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक हुई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रभावित आदिवासी परिवारों को छोड़, बाहरी लोगों और पुलिस अधिकारियों के परिजनों को लाखों का मुआवजा बांटा गया है। इस मुद्दे पर जांच समिति की मांग को लेकर विपक्ष ने सदन से वॉकआउट किया और कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। वहीं राजस्व मंत्री ने हर आदिवासी परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा दिलाने का वादा किया।

मुआवजे में धांधली पर मचा हंगामा

विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदन में सिंगरौली जिले के धिरौली स्थित अडानी के कोल ब्लॉक का मामला उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के नाम पर बड़ा खेल हुआ है। कलेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार 12,998 परिवार इस परियोजना से प्रभावित हैं, लेकिन मुआवजे की राशि उन तक पहुंचने के बजाय रसूखदारों की जेब में जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पूरा मुआवजा दिए ही खनन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 

पुलिस अधिकारियों के परिजनों को भुगतान

उमंग सिंघार ने सदन में आरोप लगाते हुए सनसनी फैला दी। उन्होंने बताया कि स्थानीय थाना प्रभारी जितेंद्र भदौरिया की पत्नी को ₹15,94,990 और यातायात प्रभारी दीपेंद्र सिंह कुशवाह की पत्नी स्वाति सिंह को ₹14,42,482 का मुआवजा दिया गया है।

विपक्ष ने सवाल उठाया कि जिन आदिवासियों की पुश्तैनी जमीनें ली गईं, वे आज भी खाली हाथ क्यों हैं और अधिकारियों के परिवारों को यह राशि किस आधार पर मिली? 

जांच की मांग पर अड़ा विपक्ष

कांग्रेस विधायक इस पूरे मामले की विधानसभा की विशेष समिति से जांच कराने की मांग पर अड़ गए। विधानसभा अध्यक्ष ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया, लेकिन विपक्ष तत्काल समिति गठित करने की मांग को लेकर नारेबाजी करता रहा। हंगामे के चलते कार्यवाही दो बार स्थगित हुई। अंततः सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया। 

सरकार का दावा: हर आदिवासी को मिलेंगे 50 लाख

राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि किसी भी आदिवासी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि प्रभावित होने वाले प्रत्येक आदिवासी परिवार को कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। मंत्री ने कहा कि यदि कहीं भी कोई विसंगति पाई जाती है, तो सरकार उसकी जांच कराएगी, लेकिन विपक्ष के आरोप पूरी तरह सही नहीं हैं।