कागजों पर बने ड्रेनेज-सीवरेज प्रोजेक्ट, 92 करोड़ का खेल: ईडी ने पूर्व इंजीनियर समेत 3 को दबोचा

ED की जांच में अब तक करीब 92 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेजी प्रमाण सामने आए हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि सरकारी धन की हेराफेरी कर अर्जित राशि से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में संपत्तियां खरीदी गईं। इसी के तहत 43 संपत्तियों को अटैच किया गया है।

कागजों पर बने ड्रेनेज-सीवरेज प्रोजेक्ट, 92 करोड़ का खेल: ईडी ने पूर्व इंजीनियर समेत 3 को दबोचा

इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाले में ED ने 3 आरोपी गिरफ्तार किए. 93 करोड़ की हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी.

इंदौर नगर निगम के कागजों पर बने ड्रेनेज-सीवरेज प्रोजेक्ट: 92 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में ईडी का शिकंजा, पूर्व इंजीनियर समेत 3 गिरफ्तार

इंदौर। मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराधों में शामिल इंदौर नगर निगम (आईएमसी) फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह मामला करोड़ों रुपये के फर्जी बिल, जाली वर्क ऑर्डर और कागजों पर दिखाए गए विकास कार्यों के जरिए सरकारी धन की कथित हेराफेरी से जुड़ा हुआ है। ईडी की जांच में अब तक करीब 92.76 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ईडी की इंदौर सब-जोनल कार्यालय की टीम ने 1 जून 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत पूर्व सहायक अभियंता अभय सिंह राठौर, ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा को गिरफ्तार किया। तीनों आरोपियों को विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में पेश किया गया, जहां से उन्हें आगे की पूछताछ के लिए 5 जून तक ईडी रिमांड पर भेज दिया गया।

कैसे सामने आया घोटाला?

यह मामला इंदौर नगर निगम के विभिन्न विकास कार्यों से जुड़ा है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि नगर निगम में ऐसे विकास कार्यों के नाम पर बिल लगाए गए, जो वास्तव में कभी किए ही नहीं गए। आरोपियों ने कथित रूप से फर्जी दस्तावेज, नकली माप पुस्तिकाएं, जाली वर्क ऑर्डर और बनावटी बिल तैयार कर सरकारी धन का भुगतान प्राप्त किया।

मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान कई दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की गई, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ।

119 करोड़ से अधिक के फर्जी बिल

ईडी की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच लगभग 119.53 करोड़ रुपये के फर्जी और जाली बिल नगर निगम में प्रस्तुत किए गए। इन बिलों में ड्रेनेज, सीवरेज, सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों का उल्लेख था, लेकिन जांच में पाया गया कि अधिकांश कार्य धरातल पर मौजूद ही नहीं थे।

इन फर्जी बिलों के आधार पर नगर निगम के खजाने से लगभग 86.54 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके अलावा वर्ष 2018 से पहले भी इसी प्रकार करीब 6.22 करोड़ रुपये की राशि का गबन किए जाने के प्रमाण मिले हैं। इस तरह कुल घोटाले की रकम लगभग 92.76 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ सरकारी धन की चोरी का मामला नहीं, बल्कि योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया एक संगठित वित्तीय अपराध है।

ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप

ईडी के अनुसार इस घोटाले को अंजाम देने में कुछ अधिकारियों और ठेकेदारों की सक्रिय भूमिका रही। आरोप है कि नगर निगम के भीतर बैठे कुछ जिम्मेदार लोगों ने फर्जी दस्तावेजों को मंजूरी दी और भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाया।

जांच में यह भी सामने आया कि ठेकेदार मोहम्मद जाकिर और राहुल बडेरा की फर्मों को लगभग 71.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह भुगतान उन्हीं फर्जी बिलों के आधार पर हुआ, जिनकी जांच वर्तमान में की जा रही है।

ईडी का दावा है कि दोनों ठेकेदारों ने न केवल फर्जी बिल तैयार करने और जमा कराने में भूमिका निभाई, बल्कि घोटाले से प्राप्त राशि को अन्य लाभार्थियों तक पहुंचाने में भी सहयोग किया। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का अंतिम लाभ किन लोगों को मिला।

मनी ट्रेल की जांच जारी

ईडी की जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अब मनी ट्रेल यानी धन के प्रवाह का पता लगाना है। एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि सरकारी खजाने से निकाली गई राशि आखिर किन-किन खातों में गई और बाद में उसका उपयोग कहां किया गया।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस धन का उपयोग अचल संपत्तियां खरीदने, निवेश करने या अन्य कारोबारों में लगाने के लिए किया गया था। यदि ऐसा पाया जाता है तो संबंधित संपत्तियों को अपराध से अर्जित संपत्ति मानते हुए जब्त या कुर्क किया जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार कई बैंक खातों, कंपनियों और फर्मों के वित्तीय लेनदेन की बारीकी से जांच की जा रही है। एजेंसी को आशंका है कि घोटाले का नेटवर्क प्रारंभिक अनुमान से कहीं अधिक बड़ा हो सकता है।

पहले भी हुई थी बड़ी कार्रवाई

इस मामले में ईडी पहले भी कई बार छापेमारी कर चुकी है। विभिन्न ठिकानों पर की गई तलाशी के दौरान एजेंसी ने लगभग 22.04 करोड़ रुपये की नकदी और अन्य कीमती वस्तुएं जब्त की थीं। यह बरामदगी जांच के दौरान सामने आए वित्तीय लेनदेन को लेकर महत्वपूर्ण मानी गई थी।

इसके अलावा जुलाई 2025 में ईडी ने लगभग 34 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। एजेंसी का मानना है कि ये संपत्तियां कथित तौर पर घोटाले से अर्जित धन से खरीदी गई थीं।

कुर्क की गई संपत्तियों में भूखंड, मकान, व्यावसायिक परिसंपत्तियां और अन्य निवेश शामिल बताए गए हैं। इन संपत्तियों की वास्तविक स्वामित्व संरचना की भी जांच की जा रही है।

और बढ़ सकता है जांच का दायरा

ईडी की मौजूदा कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी बिलों को मंजूरी देने, भुगतान जारी करने और रकम को ठिकाने लगाने में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

जांच के दायरे में कुछ अन्य अधिकारी, ठेकेदार, फर्म संचालक और कथित लाभार्थी भी आ सकते हैं। यदि पर्याप्त साक्ष्य मिले तो उनके खिलाफ भी पीएमएलए के तहत कार्रवाई संभव है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को भी उजागर करता है। जिन परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए गए, वे धरातल पर मौजूद नहीं थीं, जिससे सार्वजनिक धन के उपयोग पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

आगे क्या?

फिलहाल ईडी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और उनके बैंक खातों, कंपनियों, निवेशों तथा संपत्तियों की जांच जारी है। एजेंसी का उद्देश्य घोटाले की पूरी श्रृंखला का खुलासा करना और अपराध से अर्जित संपत्तियों का पता लगाना है।

इंदौर नगर निगम फर्जी बिल घोटाला प्रदेश के सबसे बड़े नगरीय वित्तीय घोटालों में गिना जा रहा है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में इस मामले में कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे घोटाले के पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।