दाढ़ी वालों को देखते ही डर जाता हूं , पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का वीडियो वायरल,बयान पर सियासी चर्चा तेज
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने चूरू में साफ किया कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों की वजह से पद नहीं त्यागा था। कार्यकाल से 2 साल पहले इस्तीफा देने वाले धनखड़ ने 'दाढ़ी वालों से डर' संबंधी मजाकिया बयान देकर भी सियासी हलचल भी मचा दी है। आगे पढ़िए जगदीप धनखड़ की वो बातें जो अब सियासत में हलचल मचा रही है।
जगदीप धनखड़ ने अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति का पदभार संभाला था. उनका कार्यकाल 2027 तक था, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने अचानक इस्तीफा दे दिया दिया. उनके इस्तीफे को लेकर विपक्ष ने कई तरह के सवाल भी खड़े किए थे.
सादुलपुर/चूरू। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ गुरुवार को सादुलपुर के दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को लेकर आमजन से लेकर जनप्रतिनिधियों से खुलकर संवाद किया। उन्होंने कहा कि मुझे तो दाढ़ी वालों से बहुत डर लगता है। मेरा तो ओएसडी भी कई बार दाढ़ी बढ़ा लेता है।
पूर्व उपराष्ट्रपति के इस बयान की सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। धनखड़ यहां पूर्व सांसद रामसिंह कस्वा व पूर्व विधायक कमला कस्वा के स्वास्थ्य का हालचाल जानने पहुंचे थे। धनखड़ ने सांसद राहुल कस्वा के परिवार के सदस्यों के साथ रामा-श्यामा कर पुरानी यादें भी साझा कीं।
दाढ़ी' वाले बयान पर मजाकिया अंदाज या कुछ और?
चूरू के सादुलपुर में सांसद राहुल कस्वां के आवास पर स्वागत के दौरान एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ, जिसने सबको मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया। धनखड़ ने स्वागत करने आए एक व्यक्ति को देखकर हंसते हुए कहा, 'मैं दाढ़ी वालों को देखते ही डर जाता हूं।' इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी चुटकी को आगे बढ़ाते हुए यह भी कह दिया कि उनका अपना ओएसडी भी अपनी भारी दाढ़ी की वजह से उन्हें डराता है।
कार्यकाल खत्म होने से दो साल पहले ही ले लिया था इस्तीफा
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से 21 जुलाई 2025 को इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सौंपा, जिसे 22 जुलाई 2025 को स्वीकार कर लिया गया। उनका कार्यकाल अगस्त 2027 तक था, लेकिन उन्होंने इसे दो साल पहले ही समाप्त कर दिया। उनके इस्तीफे के बाद सी. पी. राधाकृष्णन को नया उपराष्ट्रपति चुना गया। हाल ही में चूरू में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे बीमार नहीं थे, बल्कि स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना चाहते थे।
मैंने कभी नहीं कहा कि बीमार हूं
धनखड़ ने कहा कि जब उन्होंने अपने पद का त्याग किया तो उन्होंने कभी नहीं कहा कि वह बीमार हैं। लक्ष्मी की अहमियत हर चीज में है, लेकिन आसानी से पचती नहीं है। किसी व्यापारी से पूछोगे कि बच्चा आइसीयू में भर्ती है, तो भी व्यापारी यही पूछेगा कि कितने टका सुधार है। मतलब लक्ष्मी की अहमियत हर चीज में है, लेकिन राजनीति में नहीं है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस