बेटी से छेड़छाड़ और धमकियों से परेशान मां-बेटी ने कलेक्टर से लगाई गुहार, सुरक्षा के लिए पैरों में गिरकर मांगी मदद

जबलपुर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला, जब एक महिला और उसकी बेटी न्याय की गुहार लगाते हुए कलेक्टर के पैरों में गिर पड़ीं

बेटी से छेड़छाड़ और धमकियों से परेशान मां-बेटी ने कलेक्टर से लगाई गुहार, सुरक्षा के लिए पैरों में गिरकर मांगी मदद

जबलपुर कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला, जब एक महिला और उसकी बेटी न्याय की गुहार लगाते हुए कलेक्टर के पैरों में गिर पड़ीं

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में एक मां और उसकी बेटी क्षेत्र के बदमाशों से कथित रूप से लगातार मिल रही प्रताड़ना और धमकियों से इतने परेशान हो गए कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए जिला कलेक्टर के सामने गुहार लगानी पड़ी। मामला घमापुर थाना क्षेत्र के शीतलामाई इलाके का है, जहां रहने वाली पूजा दुबे और उनकी बेटी ने मंगलवार को कलेक्टर राघवेंद्र सिंह से मुलाकात कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की।

घटना उस समय चर्चा का विषय बन गई जब मां-बेटी कलेक्टर के सामने भावुक हो गईं। बताया जा रहा है कि बेटी कलेक्टर के सामने घुटनों के बल बैठ गई और रोते हुए अपनी सुरक्षा की मांग करने लगी। पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

चार साल से प्रताड़ना झेलने का आरोप

पीड़िता पूजा दुबे का आरोप है कि उनका परिवार पिछले करीब चार वर्षों से क्षेत्र के रहने वाले हनी बेन और उसके परिवार की प्रताड़ना का सामना कर रहा है। उन्होंने बताया कि फरवरी 2022 में उनकी उस समय 14 वर्षीय नाबालिग बेटी से आरोपी ने कथित रूप से गलत पहचान बताकर दोस्ती की थी। बाद में वह बेटी को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया।

परिवार के अनुसार, बेटी के अचानक लापता होने के बाद उन्होंने पुलिस के कई चक्कर लगाए, लेकिन शुरुआत में उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली। काफी प्रयासों के बाद जानकारी मिली कि नाबालिग को सागर जिले के गढ़ाकोटा क्षेत्र में ले जाया गया है। इसके बाद परिवार ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की, तब पुलिस सक्रिय हुई और दो दिन बाद लड़की को बरामद कर परिवार को सौंप दिया गया।

परिजनों का कहना है कि उस समय आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी और उसका जुलूस भी निकाला गया था, लेकिन बाद में उसे न्यायालय से जमानत मिल गई। परिवार का आरोप है कि जमानत मिलने के बाद आरोपी और उसका परिवार लगातार उन्हें परेशान करता रहा।

होली के दौरान हुआ विवाद

पूजा दुबे के अनुसार, मार्च 2026 में होली के त्योहार के दौरान उनकी बड़ी बेटी रिश्तेदारों के साथ घर के बाहर रंग खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी वहां पहुंचा और जबरन रंग लगाने का प्रयास किया। विरोध करने पर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया।

पीड़िता का आरोप है कि विवाद बढ़ने पर आरोपी पक्ष ने मारपीट की। मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंची, लेकिन दोनों पक्षों को समझाइश देकर मामला शांत करा दिया गया। परिवार का कहना है कि यदि उस समय पुलिस ने सख्ती दिखाई होती तो बाद की घटनाएं नहीं होतीं।

क्रिकेट खेलने के दौरान शुरू हुआ नया विवाद

परिवार ने हाल ही में हुई एक और घटना का भी जिक्र किया है। पूजा दुबे के अनुसार, 14 जून को उनका 10 वर्षीय बेटा मोहल्ले में क्रिकेट खेल रहा था। खेलते समय गलती से बल्ला आरोपी पक्ष के रिश्तेदार की एक बुजुर्ग महिला को लग गया।

इस बात को लेकर विवाद बढ़ गया और आरोप है कि आरोपी पक्ष के लोगों ने मिलकर उनके पति रामचरण दुबे पर हमला कर दिया। परिवार का कहना है कि हमले में लोहे की रॉड और क्रिकेट बैट का इस्तेमाल किया गया। बीच-बचाव करने पहुंची उनकी दिव्यांग बेटी के साथ भी मारपीट की गई।

हमले में घायल हुए रामचरण दुबे को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया गया। घटना के बाद परिवार में भय का माहौल बना हुआ है।

छेड़छाड़ और धमकियों के आरोप

पीड़ित परिवार का आरोप है कि हालिया घटनाओं के बाद आरोपी पक्ष के हौसले और बढ़ गए हैं। परिवार का कहना है कि रास्ते में रोककर अभद्रता की जाती है, बेटियों के साथ छेड़छाड़ की जाती है और शिकायतें वापस लेने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है।

पूजा दुबे ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में अच्छी है और वह एसपी की पाठशाला में अध्ययन कर रही है। उसका सपना भविष्य में पुलिस विभाग में भर्ती होकर समाज की सेवा करना है। लेकिन लगातार विवाद और धमकियों के कारण उसका मानसिक तनाव बढ़ गया है।

परिवार का कहना है कि मोहल्ले का माहौल इतना खराब हो चुका है कि अब उनकी बेटियां अकेले घर से बाहर निकलने में भी डर महसूस करती हैं। इसका असर उनकी पढ़ाई और सामान्य जीवन पर भी पड़ रहा है।

राजनीतिक दबाव बनाने का भी आरोप

पीड़िता ने आरोप लगाया कि शिकायतों को वापस लेने के लिए उन पर विभिन्न स्तरों पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले में राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।

परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार पुलिस से शिकायत की, लेकिन उन्हें अपेक्षित सुरक्षा और न्याय नहीं मिला। इसी वजह से उन्हें प्रशासन के सर्वोच्च जिला अधिकारी के पास जाकर गुहार लगानी पड़ी।

कलेक्टर के सामने रो पड़ी मां-बेटी

मंगलवार को जब जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक गहलोत किसी बैठक के लिए निकल रहे थे, तभी मां-बेटी उनसे मिलने पहुंचीं। दोनों ने रोते हुए अपनी पूरी आपबीती सुनाई।

बताया जा रहा है कि इस दौरान बेटी भावुक होकर कलेक्टर के सामने घुटनों के बल बैठ गई और अपनी तथा परिवार की सुरक्षा की मांग करने लगी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद अधिकारी भी गंभीर हो गए।

मां-बेटी ने कलेक्टर से आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, सुरक्षा व्यवस्था और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो परिवार की सुरक्षा को खतरा बना रहेगा।

कलेक्टर ने दिए कार्रवाई के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल जानकारी ली। उन्होंने घमापुर थाना प्रभारी को मामले में आवश्यक और सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने परिवार को आश्वस्त किया कि उनकी शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि किसी भी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की ओर से परिवार को सुरक्षा और न्याय दिलाने का भरोसा दिया गया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस और प्रशासन आगे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को कितनी राहत मिलती है।

यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है, ताकि पीड़ित परिवारों का प्रशासन और पुलिस पर विश्वास बना रहे।