मानसून सत्र में विधानसभा में आएगा UCC विधेयक, दिवाली तक लागू करने की तैयारी: सीएम मोहन यादव

मध्यप्रदेश सरकार UCC के जरिए बड़ा सामाजिक और कानूनी बदलाव लाने की तैयारी में है. CM मोहन यादव ने कहा कि MP में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक मानसून सत्र में पेश होगा. जनजातीय समुदाय अलग रहेगा, कमेटी राय ले रही है.

मानसून सत्र में विधानसभा में आएगा UCC विधेयक, दिवाली तक लागू करने की तैयारी: सीएम मोहन यादव

एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यूसीसी को लेकर बड़ा अपडेट दिया है। सीएम यादव ने बुधवार को कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के लिए विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में विधेयक पेश किया जाएगा।

भोपाल। मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने घोषणा की है कि आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में UCC विधेयक पेश किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह विधेयक इसी सत्र में पारित हो जाएगा और राज्य सरकार दिवाली तक इसे पूरी तरह लागू करने की तैयारी कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार "एक देश, एक कानून" की भावना को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इसे सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि अलग-अलग समुदायों के लिए अलग-अलग नागरिक कानूनों की व्यवस्था अब समय की मांग के अनुरूप नहीं है। सरकार व्यापक जनसहभागिता और विशेषज्ञों की राय के आधार पर इस कानून को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

मानसून सत्र में पेश होगा विधेयक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार कई महत्वपूर्ण और समसामयिक विषयों के साथ विधानसभा के मानसून सत्र में प्रवेश कर रही है। इनमें समान नागरिक संहिता सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस कानून को लेकर पूरी तरह गंभीर है और इसकी तैयारी लगभग अंतिम चरण में है।

सीएम ने कहा कि देश में सभी नागरिकों के लिए समान कानून होना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है। विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों से जुड़े अलग-अलग कानूनों के स्थान पर एक समान व्यवस्था समाज में समानता को बढ़ावा देगी।

दिवाली तक लागू करने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने संकेत दिए कि यदि विधानसभा में विधेयक पारित हो जाता है तो सरकार दिवाली तक UCC को लागू करने की दिशा में तेजी से काम करेगी। इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विभिन्न विभागों को आवश्यक प्रक्रियाओं और नियमों के मसौदे तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार का मानना है कि समान नागरिक संहिता लागू होने से कानूनी प्रक्रियाएं सरल होंगी और नागरिकों को न्याय प्राप्त करने में आसानी होगी। इससे महिलाओं के अधिकारों को भी मजबूती मिलेगी और पारिवारिक विवादों के समाधान में एकरूपता आएगी।

तीन राज्यों का उदाहरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के कई राज्य इस दिशा में पहले ही कदम बढ़ा चुके हैं। उन्होंने बताया कि Uttarakhand, Gujarat और Assam जैसे राज्यों में UCC को लेकर पहल की जा चुकी है। मध्यप्रदेश भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और जल्द ही इस कानून को लागू करने वाले प्रमुख राज्यों में शामिल हो सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में समानता और न्याय आधारित व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है और मध्यप्रदेश सरकार भी उसी सोच के अनुरूप काम कर रही है।

उच्चस्तरीय समिति कर रही अध्ययन

समान नागरिक संहिता के मसौदे को तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता Justice Ranjana Desai कर रही हैं। समिति विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और कानूनी पक्षों का अध्ययन कर रही है।

समिति प्रदेश के अलग-अलग जिलों में जाकर नागरिकों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों से चर्चा कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानून लागू करने से पहले सभी पक्षों की राय को महत्व दिया जाए और व्यापक सहमति बनाई जा सके।

सरकार का कहना है कि UCC केवल कानूनी सुधार नहीं बल्कि सामाजिक सुधार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। इसलिए इसे जल्दबाजी में लागू करने के बजाय सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

जनजातीय समुदाय रहेगा अलग

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के जनजातीय समुदायों को UCC के दायरे से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी परंपराएं, रीति-रिवाज और सांस्कृतिक पहचान है, जिसका सम्मान करना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा जनजातीय समुदायों को मिले विशेष अधिकारों और सांस्कृतिक संरक्षण को किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाई जाएगी। इसलिए UCC लागू होने के बाद भी आदिवासी समुदाय अपनी पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार जीवनयापन कर सकेंगे।

यह प्रावधान उन राज्यों की तर्ज पर रखा जा रहा है जहां UCC लागू करने के दौरान जनजातीय समुदायों को विशेष छूट प्रदान की गई है।

सुझावों के लिए वेबसाइट शुरू

राज्य सरकार ने नागरिकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए एक विशेष वेबसाइट भी लॉन्च की है। इस वेबसाइट के माध्यम से प्रदेश का कोई भी नागरिक UCC से संबंधित अपने सुझाव, राय और सुझाव सरकार तक पहुंचा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून जनता के लिए बनाया जा रहा है, इसलिए जनता की भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे खुलकर अपने सुझाव दें ताकि एक संतुलित और प्रभावी कानून तैयार किया जा सके।

सरकार का मानना है कि जनभागीदारी से तैयार होने वाला कानून अधिक व्यावहारिक और स्वीकार्य होगा। इसी उद्देश्य से समिति भी प्रदेशभर में संवाद कार्यक्रम आयोजित कर रही है।

महिलाओं और समाज को मिलेगा लाभ

सरकार का दावा है कि समान नागरिक संहिता लागू होने से महिलाओं के अधिकारों को विशेष मजबूती मिलेगी। विवाह, तलाक, संपत्ति में अधिकार और भरण-पोषण जैसे मामलों में एक समान कानून होने से भेदभाव कम होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण कई बार कानूनी जटिलताएं उत्पन्न होती हैं। UCC लागू होने के बाद सभी नागरिकों के लिए समान नियम होने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बन सकती है।

नीट परीक्षा को लेकर भी दिए निर्देश

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने UCC के साथ-साथ आगामी NEET परीक्षा की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी परीक्षार्थी को असुविधा न हो। आवश्यकता पड़ने पर अधिकारी स्वयं अपने वाहनों से छात्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था करें।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है और परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार ने अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। मानसून सत्र में विधेयक पेश करने और दिवाली तक इसे लागू करने की तैयारी राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को दर्शाती है। हालांकि इस कानून को लेकर विभिन्न वर्गों की राय और बहस जारी है, लेकिन सरकार इसे सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रही है। अब सभी की नजरें विधानसभा के आगामी मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां UCC विधेयक प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श का केंद्र बनने जा रहा है।