सीएम मोहन यादव का बड़ा फैसला: उत्कृष्ट खिलाड़ियों को अब मध्यप्रदेश पुलिस में मिलेगी सीधी नौकरी, खेल कोटे से हर साल होगी भर्ती

एमपी सरकार ने मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों को बड़ी सौगात दी है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सीधी नौकरी मिलेगी। इसके लिए मध्य प्रदेश पुलिस नियम,2021 में संशोधन हुए हैं।

सीएम मोहन यादव का बड़ा फैसला: उत्कृष्ट खिलाड़ियों को अब मध्यप्रदेश पुलिस में मिलेगी सीधी नौकरी, खेल कोटे से हर साल होगी भर्ती

मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव ने बड़ा ऐलान किया है। अब मध्यप्रदेश के खिलाड़ी भी खेल कोटे से मध्यप्रदेश पुलिस की भर्ती में शामिल हो सकते हैं। इसे लेकर जरूरी संशोधन भी किए जा चुके हैं।

भोपाल। मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी और ऐतिहासिक घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए पुलिस विभाग में सीधी भर्ती का रास्ता फिर से खोल दिया है। गृह विभाग द्वारा "मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021" में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं, जिनकी अधिसूचना 15 जून को जारी कर दी गई है। नए नियमों के तहत अब राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मध्यप्रदेश पुलिस में उप निरीक्षक (SI) और आरक्षक (Constable) पदों पर सीधी नियुक्ति का अवसर मिलेगा।

सरकार का मानना है कि यह फैसला न केवल खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि प्रदेश में खेल संस्कृति को भी नई दिशा देगा। लंबे समय से खिलाड़ियों की ओर से यह मांग उठाई जा रही थी कि उन्हें खेल उपलब्धियों के आधार पर सरकारी सेवाओं में अवसर दिए जाएं। अब सरकार ने इस दिशा में ठोस कदम उठाते हुए भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है।

हर साल होगी खेल कोटे से भर्ती

नए संशोधित नियमों के अनुसार मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय हर वर्ष खेल कोटे के तहत भर्ती प्रक्रिया आयोजित करेगा। इसके अंतर्गत पुलिस विभाग में 10 उप निरीक्षक और 50 आरक्षक पदों पर उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी नियुक्ति की जाएगी। इससे खिलाड़ियों को नियमित और स्थायी अवसर प्राप्त होंगे तथा उन्हें नौकरी के लिए अन्य राज्यों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।

सरकार का कहना है कि अब खिलाड़ी खेल के साथ-साथ अपने करियर को लेकर भी निश्चिंत रह सकेंगे। रोजगार की चिंता कम होने से वे अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।

खिलाड़ियों को मिलेगी बड़ी राहत

संशोधित नियमों में खिलाड़ियों को कई महत्वपूर्ण छूट भी प्रदान की गई हैं। उत्कृष्ट खिलाड़ियों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और शारीरिक मापदंडों, विशेष रूप से ऊंचाई संबंधी मानकों में छूट दी जाएगी। इसके अलावा उन्हें पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा तथा शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) से भी मुक्त रखा जाएगा।

सरकार का तर्क है कि जिन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रदर्शन से राज्य और देश का नाम रोशन किया है, उनकी खेल उपलब्धियां ही उनकी योग्यता का प्रमाण हैं। इसलिए उन्हें अतिरिक्त परीक्षाओं से गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी।

कौन-कौन से खिलाड़ी होंगे पात्र

नियमों में स्पष्ट किया गया है कि केवल उन्हीं खेल विधाओं को मान्यता दी जाएगी जो पिछले तीन ओलंपिक खेलों में शामिल रही हों। इससे चयन प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और निष्पक्ष बनेगी।

खिलाड़ियों की पात्रता तय करते समय उनके प्रदर्शन, प्रतियोगिता के स्तर और उपलब्धियों को आधार बनाया जाएगा। ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप और विश्व चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

उप निरीक्षक पद के लिए पात्रता

उप निरीक्षक (SI) पद पर सीधी नियुक्ति के लिए केवल उत्कृष्ट खिलाड़ियों को ही पात्र माना जाएगा। इसके लिए खिलाड़ी का ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप या विश्व चैंपियनशिप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में सहभागिता होना आवश्यक होगा।

इन प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के साथ-साथ उनमें भाग लेने वाले खिलाड़ी भी पात्र माने जाएंगे। सरकार का मानना है कि इन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचना ही किसी खिलाड़ी की उच्च क्षमता और प्रतिभा का प्रमाण है।

आरक्षक पद के लिए पात्रता

आरक्षक (Constable) पद के लिए पात्रता का दायरा अपेक्षाकृत व्यापक रखा गया है। उप निरीक्षक पद के लिए पात्र सभी खिलाड़ी स्वतः आरक्षक पद के लिए भी पात्र होंगे।

इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय खेलों में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ी तथा अधिकृत राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक हासिल करने वाले खिलाड़ी भी आरक्षक पद के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे राज्य के अधिक से अधिक खिलाड़ियों को सरकारी सेवा का अवसर मिलेगा।

मेरिट निर्धारण की नई व्यवस्था

संशोधित नियमों में मेरिट तैयार करने की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। यदि दो खिलाड़ियों के अंक समान होते हैं तो वरिष्ठता का निर्धारण प्रतियोगिता के स्तर के आधार पर किया जाएगा।

इसमें ओलंपिक खेलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप और अन्य प्रतियोगिताओं को क्रमवार महत्व मिलेगा। यदि इसके बाद भी स्थिति समान रहती है तो अधिक आयु वाले खिलाड़ी को प्राथमिकता दी जाएगी।

खिलाड़ियों को नहीं जाना पड़ेगा दूसरे राज्यों में

अब तक कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में दूसरे राज्यों की पुलिस, रेलवे या अन्य सरकारी सेवाओं में आवेदन करते थे। मध्यप्रदेश में सीमित अवसर होने के कारण उन्हें अपने राज्य से बाहर जाना पड़ता था।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद खिलाड़ियों को अपने ही राज्य में सम्मानजनक सरकारी नौकरी मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे प्रतिभाओं का पलायन भी रुकेगा और राज्य के खेल ढांचे को मजबूती मिलेगी।

खेल संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह फैसला खेल जगत के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। जब खिलाड़ियों को यह भरोसा होगा कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर उन्हें सरकारी नौकरी मिल सकती है, तो युवाओं का खेलों के प्रति आकर्षण बढ़ेगा।

ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ी भी अधिक उत्साह के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी कर सकेंगे। इससे मध्यप्रदेश को भविष्य में अधिक पदक विजेता खिलाड़ी मिलने की संभावना बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री की पहल को मिली सराहना

खेल संगठनों और खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय खिलाड़ियों के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया है। इससे प्रदेश के युवाओं को खेलों में करियर बनाने की नई प्रेरणा मिलेगी।

मध्यप्रदेश सरकार का यह कदम खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ पुलिस विभाग में अनुशासित और सक्षम खिलाड़ियों की भागीदारी भी सुनिश्चित करेगा। विशेषज्ञ इसे राज्य में खेल और रोजगार को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय मान रहे हैं।