शराब कारोबार के आरोपों पर आमने-सामने आए MP के दो मंत्री, संपतिया उइके पर ‘भूमिगत’ होने के दावे से बढ़ा सियासी विवाद
जीतू पटवारी और उमंग सिंघार का आरोप है कि सीएम हाउस में हुई समीक्षा बैठक के दौरान एक महिला मंत्री ने दूसरे मंत्री को सरेआम शराब व्यापारी कह दिया।
मंत्री संपतिया ने संगठन के सामने मंत्री नागर सिंह के शराब कारोबार पर खुलेआम सवाल खड़े किए। वरिष्ठ नेताओं से साफ कह दिया कि नागर का शराब का कारोबार है, इसलिए समन्वय का सवाल ही नहीं.
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है, जिसने सत्ता और संगठन दोनों को असहज स्थिति में ला दिया है। प्रदेश सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों — संपतिया उइके और नागर सिंह चौहान — के बीच कथित टकराव ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि भाजपा संगठन की एक बंद कमरे में हुई समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री संपतिया उइके ने मंत्री नागर सिंह चौहान के कथित शराब कारोबार को लेकर सवाल उठाए, जिसके बाद मामला तूल पकड़ गया।
कांग्रेस नेताओं ने इस विवाद को मुद्दा बनाते हुए सरकार पर हमला तेज कर दिया है। वहीं दूसरी ओर भाजपा संगठन के भीतर भी यह सवाल उठने लगे हैं कि गोपनीय बैठक की बातें आखिर सार्वजनिक कैसे हुईं।
बंद कमरे की बैठक से बाहर आया विवाद
सूत्रों के अनुसार भाजपा संगठन की ओर से मंत्रियों के प्रदर्शन और समन्वय को लेकर वन-टू-वन बैठकें आयोजित की गई थीं। इन बैठकों में सीमित संख्या में लोग शामिल थे और स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि चर्चा की कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी।
बताया जा रहा है कि ऐसी ही एक बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके ने कथित तौर पर अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान को लेकर गंभीर टिप्पणी की। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि संपतिया ने बैठक में कहा कि नागर सिंह चौहान का शराब कारोबार से संबंध है और ऐसे में समन्वय का प्रश्न ही नहीं उठता।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामला सामने आने के बाद राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ गया।
नागर सिंह चौहान की नाराजगी, संगठन से शिकायत
मामले के सार्वजनिक होने के बाद मंत्री नागर सिंह चौहान ने नाराजगी जाहिर की है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने भाजपा संगठन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि उनके खिलाफ सुनियोजित तरीके से माहौल बनाया जा रहा है।
नागर सिंह चौहान ने संगठन से मांग की है कि उनके नाम से जो आरोप और चर्चाएं प्रचारित हो रही हैं, उन पर स्पष्ट स्थिति सामने लाई जाए। बताया जा रहा है कि उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि गोपनीय बैठक की जानकारी मीडिया तक कैसे पहुंची।
संगठन के सामने अब दोहरी चुनौती है — पहली, विवाद की सच्चाई सामने लाना और दूसरी, अंदरूनी चर्चा के लीक होने की जांच करना।
संपतिया उइके पर ‘भूमिगत’ होने के दावे
राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि विवाद सामने आने के बाद मंत्री संपतिया उइके सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आईं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि उन्होंने फोन कॉल रिसीव करना बंद कर दिया है और मीडिया से दूरी बना ली है।
इसी को लेकर विपक्ष ने आरोप लगाया कि सवाल उठाने के बाद मंत्री अब जवाब देने से बच रही हैं। हालांकि इस पूरे मामले में संपतिया उइके की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
उनके सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया न देने से अटकलों का दौर और तेज हो गया है।
पहले भी विवादों में रही हैं संपतिया उइके
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग संभाल रहीं संपतिया उइके पहले भी विपक्ष के निशाने पर रह चुकी हैं। उनके विभाग में वित्तीय अनियमितताओं और परियोजनाओं में कथित गड़बड़ियों के आरोप सामने आ चुके हैं।
विधानसभा में भी इस विषय पर सवाल उठे थे और विभागीय कामकाज को लेकर सरकार को जवाब देना पड़ा था। विपक्ष ने आरोप लगाया था कि योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां हैं। इतना ही नहीं, केंद्र स्तर पर वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठे थे।
हालांकि सरकार की ओर से समय-समय पर इन आरोपों का जवाब दिया जाता रहा है।
नागर सिंह चौहान भी रहे हैं विवादों में
वहीं मंत्री नागर सिंह चौहान भी पहले कई राजनीतिक विवादों के केंद्र में रहे हैं। प्रदेश सरकार में विभागों के बंटवारे के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया था जब कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए रामनिवास रावत को वन एवं पर्यावरण विभाग दिया गया था।
उस समय नागर सिंह चौहान की नाराजगी की खबरें भोपाल से लेकर दिल्ली तक चर्चा में रहीं।
इसके अलावा उनके भाई का जनपद पंचायत के सीईओ के साथ विवाद भी सुर्खियों में रहा था। हालांकि उस मामले में नागर सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा था कि उनके भाई की गतिविधियों से उनका कोई संबंध नहीं है।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
इस कथित विवाद के बाद कांग्रेस को सरकार पर हमला बोलने का नया मुद्दा मिल गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर सरकार को घेरा है।
पटवारी ने कहा कि मंत्रियों के प्रदर्शन का आकलन बंद कमरों में नहीं, बल्कि जनता की नाराजगी से होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के भीतर समन्वय की कमी साफ दिखाई दे रही है।
उन्होंने इंदौर के जल संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक तरफ मंत्री एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, दूसरी तरफ जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।
उमंग सिंघार का हमला
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाया।
उन्होंने लिखा कि भाजपा की समीक्षा बैठक प्रदर्शन मूल्यांकन का मंच बनने के बजाय आपसी आरोपों का केंद्र बन गई है। सिंघार ने सवाल किया कि यदि मंत्री एक-दूसरे पर शराब कारोबार जैसे आरोप लगा रहे हैं तो सरकार इस पर क्या कार्रवाई करेगी।
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रदेश में “माफिया राज” को संरक्षण दिया जा रहा है।
अलीराजपुर कनेक्शन से बढ़ी राजनीतिक संवेदनशीलता
इस विवाद को राजनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दोनों मंत्री अलीराजपुर जिले से जुड़े हैं। संपतिया उइके जिले की प्रभारी मंत्री हैं, जबकि नागर सिंह चौहान भी उसी क्षेत्र की राजनीति में प्रभाव रखते हैं।
ऐसे में इस कथित टकराव को केवल व्यक्तिगत मतभेद नहीं बल्कि स्थानीय राजनीतिक समीकरणों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
फिलहाल भाजपा संगठन पूरे मामले पर सार्वजनिक तौर पर चुप है। न तो आरोपों की पुष्टि की गई है और न ही खंडन सामने आया है। लेकिन बंद कमरे की बैठक से बाहर आए इस विवाद ने मध्यप्रदेश की राजनीति में नया सियासी भूचाल जरूर खड़ा कर दिया है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस