जनभागीदारी से सफल होगा महाअभियान, वृक्षारोपण से लेकर पर्यावरण संरक्षण तक डीएम के सख्त निर्देश
उरई में जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा समिति एवं जिला पर्यावरण समिति की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वृक्षारोपण अभियान को केवल पौधे लगाने तक सीमित न रखकर जनभागीदारी का अभियान बनाया जाए। उन्होंने पौधों के संरक्षण, जियो-टैगिंग, नियमित निगरानी तथा सभी विभागों को समयबद्ध तरीके से लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए।
वृक्षारोपण केवल लक्ष्य नहीं, जनभागीदारी का अभियान बने : जिलाधिकारी
उरई। पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जल स्रोतों के संवर्धन को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में विकास भवन स्थित रानी लक्ष्मीबाई सभागार में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला गंगा समिति एवं जिला पर्यावरण समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी वृक्षारोपण अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानते हुए जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाया जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को स्थायी रूप से प्राप्त किया जा सके।
बैठक में वर्ष 2026 के वृक्षारोपण अभियान, गंगा संरक्षण कार्यक्रमों तथा पर्यावरणीय गतिविधियों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि वृक्षारोपण का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं है, बल्कि उनका संरक्षण, संवर्धन और जीवित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि लगाए गए पौधों की उचित देखभाल नहीं होगी तो अभियान का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकेगा। इसलिए सभी विभाग पौधरोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण की प्रभावी कार्ययोजना भी तैयार करें।
उन्होंने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। प्रत्येक विभाग अपने आवंटित लक्ष्य के अनुसार गड्ढों की खुदाई, पौधों की उपलब्धता, रोपण स्थलों का चयन और अन्य तैयारियां समय से पूरी करे। जिन विभागों की प्रगति अपेक्षित स्तर पर नहीं है, वे तत्काल कार्ययोजना बनाकर अपनी गति बढ़ाएं और प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करें।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि वृक्षारोपण अभियान की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं मापी जाएगी, बल्कि लगाए गए पौधों के जीवित रहने की दर भी महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पौधों की नियमित निगरानी की जाए और उनकी सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय किए जाएं। ग्राम पंचायतों, स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए जाने वाले पौधों की जिम्मेदारी भी तय की जाए ताकि उनकी देखभाल सुनिश्चित हो सके।
बैठक के दौरान वन विभाग की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने प्रभागीय वनाधिकारी को निर्देश दिए कि सभी नर्सरियों में पर्याप्त संख्या में पौधे उपलब्ध रहें। पौध वितरण की व्यवस्था सुचारु एवं पारदर्शी हो तथा किसी भी विभाग को पौधों की कमी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि वन विभाग द्वारा स्थापित नियंत्रण कक्ष के माध्यम से सभी विभागों के साथ समन्वय बनाए रखा जाए और आवश्यकतानुसार त्वरित सहायता उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि सभी विभाग समय से अपनी पौध आवश्यकता की जानकारी वन विभाग को उपलब्ध कराएं ताकि वितरण प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। पौध वितरण से लेकर रोपण और संरक्षण तक की पूरी प्रक्रिया सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालित की जाए।
जिलाधिकारी ने इस वर्ष के वृक्षारोपण अभियान में जनसहभागिता को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। इसलिए विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, स्वयंसेवी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों को अभियान से जोड़ा जाए। यदि समाज के सभी वर्ग इसमें सक्रिय भूमिका निभाएंगे तो यह अभियान एक जनआंदोलन का रूप ले सकेगा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना बेहद आवश्यक है। विद्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर पौधरोपण के महत्व की जानकारी दी जाए और छात्रों को पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी सौंपी जाए। इससे उनमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।
बैठक में आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि लगाए जाने वाले प्रत्येक पौधे की जियो-टैगिंग सुनिश्चित की जाए। इससे पौधों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकेगा और उनकी निगरानी आसान होगी। उन्होंने कहा कि डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था के माध्यम से पौधों की वृद्धि और संरक्षण की नियमित समीक्षा की जाए ताकि अभियान के परिणाम प्रभावी और पारदर्शी बन सकें।
गंगा संरक्षण एवं पर्यावरणीय गतिविधियों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जल स्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना वृक्षारोपण। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों की साफ-सफाई के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही जल प्रदूषण रोकने के लिए जनजागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएं।
उन्होंने प्लास्टिक मुक्त वातावरण बनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के प्रयोग को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जाए। लोगों को पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके साथ ही हरित क्षेत्र के विस्तार, जैव विविधता संरक्षण और स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रमों को भी अभियान के रूप में संचालित किया जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण वैश्विक आवश्यकता बन चुका है। बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण को देखते हुए सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। वृक्षारोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता जैसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला हैं। इसलिए प्रत्येक विभाग अपनी जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा और गंभीरता से निर्वहन करे।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी केके सिंह, अपर जिलाधिकारी (नमामि गंगे) प्रेमचंद मौर्य, प्रभागीय वनाधिकारी प्रदीप यादव, परियोजना निदेशक अखिलेश तिवारी, जिला विकास अधिकारी प्रशांत पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने अभियान को सफल बनाने के लिए समन्वित रूप से कार्य करने का भरोसा दिलाया।
जिला प्रशासन की इस पहल से यह स्पष्ट है कि आगामी वृक्षारोपण अभियान को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखकर पर्यावरण संरक्षण के व्यापक जनआंदोलन में परिवर्तित करने की तैयारी की जा रही है। यदि प्रशासनिक प्रयासों के साथ आम जनता की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो जिले में हरित क्षेत्र के विस्तार, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ वातावरण के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सकेगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस