यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को उचित ठहराया: रत्नेश उपाध्याय

बजरंग सेवादल के राष्ट्रीय महासचिव रत्नेश उपाध्याय ने यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को उचित बताया। उन्होंने कहा कि इन नियमों से विश्वविद्यालयों में सामाजिक तनाव बढ़ा और यदि नियम लागू करने सेr पहले सभी पक्षों से संवाद किया जाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक को उचित ठहराया: रत्नेश उपाध्याय

सुप्रीम कोर्ट की रोक को उचित बताया – रत्नेश उपाध्याय ने कहा कि यूजीसी के नए नियमों से सामाजिक तनाव बढ़ा।

सभी पक्षों की भागीदारी जरूरी – नियम लागू करने से पहले संवाद और विश्वास कायम करने की आवश्यकता।

बजरंग सेवादल संगठन के राष्ट्रीय महासचिव रत्नेश उपाध्याय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक को उचित बताया है। उन्होंने कहा कि इन नियमों के कारण देश के विश्वविद्यालयों में सामाजिक तनाव और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हुई थी।

उपाध्याय ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने केवल रोक लगाई है, कानून को पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं किया गया है। हमें सुप्रीम कोर्ट के आगामी निर्णय का इंतजार करना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि नियम लागू करने से पहले सभी पक्षों को विश्वास में लिया जाता और व्यापक संवाद किया जाता, तो समाज में इस प्रकार का तनाव उत्पन्न नहीं होता।

उन्होंने बताया कि नियम बनाने की प्रक्रिया में न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी की गई, जिससे सवर्ण समाज और अन्य संगठनों में आक्रोश बढ़ा। रत्नेश उपाध्याय ने कहा, “शिक्षा देश का भविष्य तय करती है। कानून एक तरफा न होकर सभी के सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए बनना चाहिए। ऐसे नियमों से विभाजन और असंतोष बढ़ सकते हैं, जो देशहित में नहीं है।”

राष्ट्रीय महासचिव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में यूजीसी जैसे कानून बनाते समय सामाजिक सौहार्द और एकता को ध्यान में रखा जाएगा।