शिवराज सिंह चौहान का सख्त संदेश: गेहूं खरीदी में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, व्यवस्थाओं में सुधार और बदलते राजनीतिक सुर

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा सहित रायसेन, सीहोर और देवास के कलेक्टरों व जनप्रतिनिधियो के साथ मैराथन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की।

शिवराज सिंह चौहान का सख्त संदेश: गेहूं खरीदी में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, व्यवस्थाओं में सुधार और बदलते राजनीतिक सुर

विदिशा में गेहूं खरीदी पर सख्त रुख: शिवराज सिंह चौहान का तल्ख संदेश, व्यवस्थाओं में सुधार के दावे और बदलते राजनीतिक सुर

विदिशा (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी व्यवस्था को लेकर सरकार पूरी तरह सक्रिय मोड में दिखाई दे रही है। इसी क्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री एवं विदिशा से सांसद Shivraj Singh Chouhan ने मंगलवार को विदिशा पहुंचकर खरीदी व्यवस्था की जमीनी हकीकत का विस्तार से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों की बैठक लेकर स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि किसी भी किसान की उपज बिना खरीदे वापस नहीं जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि गेहूं उपार्जन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह दौरा केवल प्रशासनिक समीक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि इसे राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि शिवराज सिंह चौहान स्वयं इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं और केंद्र सरकार में कृषि मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

तीसरी समीक्षा बैठक, व्यवस्थाओं पर कड़ी नजर

विदिशा कलेक्ट्रेट में आयोजित इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में गेहूं उपार्जन की पूरी प्रणाली—स्लॉट बुकिंग, परिवहन, बारदाना उपलब्धता और भुगतान व्यवस्था—पर विस्तृत चर्चा हुई। यह उनकी तीसरी समीक्षा बैठक थी। इससे पहले वे रायसेन और भोपाल जिलों में भी इसी तरह की समीक्षा कर चुके हैं।

बैठक में मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है—हर पात्र किसान से उसकी उपज की खरीद सुनिश्चित करना। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को किसी भी स्थिति में परेशान नहीं होना चाहिए।

शुरुआती समस्याओं को स्वीकार, अब सुधार का दावा

बैठक के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने यह स्वीकार किया कि उपार्जन प्रक्रिया के शुरुआती चरण में स्लॉट बुकिंग सिस्टम धीमा था, जिसके कारण किसानों को कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि अब व्यवस्था को तेज कर दिया गया है और प्रक्रिया काफी हद तक सुचारु हो चुकी है।

किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए कलेक्ट्रेट में एक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जहां किसान सीधे अपनी समस्याएं दर्ज करा सकते हैं। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यदि किसी किसान का सत्यापन लंबित है, तो पात्र पाए जाने पर उसे तत्काल मंजूरी दी जाए।

बारदाना संकट पर सरकार का जवाब

बैठक में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक बारदाना (जूट/पैकिंग सामग्री) की कमी का था। इस पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार बारदाने की आपूर्ति बढ़ा रही है और फिलहाल अगले तीन दिनों की खरीदी के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

उन्होंने यह भी बताया कि खरीदी की गति बढ़ाने के लिए तौल कांटों की संख्या में वृद्धि की गई है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 1000 क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा था, अब इसे बढ़ाकर 2250 क्विंटल प्रतिदिन कर दिया गया है। आवश्यकता वाले केंद्रों पर अतिरिक्त तौल कांटे लगाए जा रहे हैं ताकि किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े।

खरीदी में तेजी, लेकिन जमीन पर चुनौती बरकरार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, विदिशा जिले में गेहूं खरीदी ने अब गति पकड़ ली है। जिले में कुल 87,913 किसानों ने पंजीयन कराया था, जिनमें से 72,027 किसानों ने यानी लगभग 82 प्रतिशत ने स्लॉट बुक कर लिया है।

अब तक लगभग 36,442 किसानों से करीब 2 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। यह भी उल्लेखनीय है कि स्लॉट बुकिंग की प्रक्रिया अभी 23 मई तक जारी रहेगी, जिससे यह संख्या और बढ़ने की संभावना है।

हालांकि प्रशासनिक स्तर पर सुधार के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों की संतुष्टि, समय पर भुगतान और बिना बाधा बिक्री जैसी चुनौतियाँ अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

भाजपा नेताओं के बदले सुर

इस पूरे घटनाक्रम का एक दिलचस्प राजनीतिक पहलू भी सामने आया है। कुछ समय पहले तक स्थानीय स्तर पर भाजपा नेताओं द्वारा बारदाना की कमी, स्लॉट बुकिंग की धीमी प्रक्रिया और अन्य व्यवस्थागत खामियों को लेकर आलोचना की जा रही थी।

लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। बैठक में मौजूद कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने व्यवस्था की सराहना की। इनमें विधायक मुकेश टंडन, विधायक सूर्य प्रकाश मीणा, विधायक हरिसिंह सप्रे और विधायक हरिसिंह रघुवंशी शामिल रहे।

राजनीतिक हलकों में इसे “बदलते बयान” के रूप में देखा जा रहा है, जहां आलोचना से प्रशंसा की ओर रुख तेजी से बदला है।

कलेक्टरों को सख्त निर्देश

समीक्षा बैठक में मंत्री ने चारों जिलों के कलेक्टरों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बारदाना की उपलब्धता से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए।

कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने जिले की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें स्लॉट बुकिंग, खरीदी, परिवहन और भुगतान की स्थिति की जानकारी दी गई। रिपोर्ट के बाद मंत्री ने संतोष जताया कि स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है, लेकिन सुधार की गुंजाइश अभी भी बनी हुई है।

राजनीतिक संदेश भी साफ

इस पूरी समीक्षा यात्रा ने एक राजनीतिक संदेश भी दिया है। जब केंद्र और राज्य स्तर पर निगरानी बढ़ती है, तो स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्थाएं तेजी से सक्रिय हो जाती हैं। वहीं, राजनीतिक बयान भी परिस्थितियों के अनुसार बदलते दिखाई देते हैं।

विदिशा की यह स्थिति इस बात का संकेत देती है कि कृषि उपार्जन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार पूरी तरह सक्रिय है, लेकिन असली परीक्षा जमीन पर किसानों की संतुष्टि और व्यवस्था की स्थायित्व से होगी।

फिलहाल प्रशासन और सरकार दोनों इस प्रयास में जुटे हैं कि कोई भी किसान अपनी उपज बेचने से वंचित न रहे और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, तेज और बिना बाधा के पूरी हो।