आपका जीवन हमें सिखाता हे सच्ची सफलता पद में नही बल्कि सेवा व संस्कारों में होती है, सर्जन सिंह शिल्पकार 

भोपाल में आयोजित सेवानिवृत्ति समारोह में सर्जन सिंह शिल्पकार ने अपने गुरुदेव प्रो. रमेशचंद्र घावरी के जीवन को कर्तव्य, अनुशासन, सेवा और संस्कारों का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सच्ची सफलता पद से नहीं, बल्कि समाजसेवा और मूल्यों से मिलती है। कार्यक्रम में देश–प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आए पूर्व छात्र, सहपाठी, प्राध्यापक और परिजन उपस्थित रहे।

आपका जीवन हमें सिखाता हे सच्ची सफलता पद में नही बल्कि सेवा व संस्कारों में होती है, सर्जन सिंह शिल्पकार 

सेवानिवृत्ति पर प्रो रमेशचंद्र घावरी के जीवन को कर्तव्य , अनुशासन ओर समाजसेवा को समर्पित बताया

भोपाल, हर व्यक्ति का जीवन एक कहानी होता है लेकिन कुछ कहानी केवल व्यक्ति की नही होती वह समाज सेवा व संस्कारों की कहानी बन जाती है। गौरतलव हे कि सर्जन सिंह शिल्पकार सहपत्नी श्रीमती पूजा सिंह शिल्पकार सहित अपने गुरुदेव के सेवानिवृत्त कार्यक्रम व भोज में शामिल हुए इस दौरान श्री सिंह ने अपने गुरु प्रो रमेशचंद्र घावरी के जीवन पर विचार रखे बताया कि आपका जीवन हमें सिखाता हे सच्ची सफलता पद में नही बल्कि सेवा व संस्कारों में होती है। राजधानी स्थित कलश मैरिज गार्डन में सेवानिवृत्त पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व छात्र एवं सहपाठी प्राध्यापकगण छत्तीसगढ़ ,  बीनागंज, चांचौड़ा, धार से पधारे साथ ही परिवारजन मौजूद रहे। प्रोफेसर घावरी को आगंतुकों ने सॉल श्रीफल , पुष्पहार , पुष्पगुच्छ , स्मृति चिन्ह भेंट कर कहा मेहनत से आपने इतिहास रचाया है सम्मान और विश्वास कमाया है। रिटायर्डमेंट पर यही दुवा हमारी , जिंदगी हो अब सुकून से सारी। वक्ताओं ने कहा कि साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे घावरी ने बहुत कम उम्र में अपने जीवन के मूल्यों को समझ लिया साथ ही उच्च शिक्षा उपाधि अर्जित कर जनसेवा का दृढ़संकल्प कर शासकीय सेवा में कदम रखा जुलाई 1987 मध्य प्रदेश के दुर्ग जिले के बलोद में नियुक्त होकर समाजसेवा के प्रति उत्तरदायित्व की शुरुआत की। 
    आपके आपके पिता एवं दादाजी भारतीय सेना में रहे हे आपके पिता स्वर्गीय मोहनलाल घावरी ने सन् 1950 में कोरिया में शांति सेवा के लिए विशिष्ठ सेवा मेडल प्राप्त कर राष्ट्रसेवा की मिशाल कायम की थी। व्यक्तिगत जीवन में आपका विवाह सन् 1996 में स्वर्गीय मधु घावरी से संपन्न हुआ आज आप एक पुत्र आदर्श घावरी व पुत्री खुशी घावरी के पिता है। सन 2002 में राज्य विभाजन के दौरान स्थानांतरण चांचौड़ा - बीनागंज जिला गुना में हुआ जहां आपकी ईमानदारी व संवेदनशीलता आपकी पहचान बन गई इस कारण आपको नगर परिषद चांचौड़ा बीनागंज ने स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर बनाया। 27 सितंबर 2021 को महाराजा भोज स्नातकोत्तर महाविद्यालय धार में नियुक्त हुए वहां आपने जनता से सीधा संवाद स्थापित किया। राष्ट्रीय सेवा योजना राज्य स्तरीय मास्टर ट्रेनर और आपदा प्रबंधन जैसे 150 से अधिक आयोजनों का सफल संचालन किया। इसके अतिरिक्त 2500 से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दिया साथ ही 1500 से अधिक पौधों का संरक्षण सुनिश्चित किया। महाराजा भोज शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय धार का नाम प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में दर्ज होते ही प्रो घावरी ने नोडल अधिकारी का कार्यभार संभाला और दायित्व को सुचारु रूप से निभाते हुए महाविद्यालय को उत्कृष्टता कि ओर बढ़ाया। इस अवसर पर मुख्य रूप से कृष्णकांत चौहान, सुनील पथरोद, अजय त्रिवेदी, जवाहर त्रिवेदी, सर्जन सिंह शिल्पकार, पूजा सिंह शिल्पकार, मीरा बोहत, सुशीला, शीला, शर्मिला, मालती, सुनील घावरी, अनिल घावरी, आदर्श घावरी, खुशी घावरी, निशि चौहान, हर्ष चौहान, उदयराज, यशराज, मदनलाल चौहान, मुन्नालाल सियोते, सुरेश सियोते, मोहनलाल सियोते, विनय खोकर, नरेंद्र , नवीन उपस्थित रहे।