सीएम मोहन यादव का बड़ा एक्शन : देवास पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में SDM, नायब तहसीलदार और SDOP सस्पेंड

देवास पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में मुख्यमंत्री Mohan Yadav के निर्देश पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। लापरवाही के आरोप में एसडीएम संजीव सक्सेना, नायब तहसीलदार रवि शर्मा और एसडीओपी दीपा मांडवे को निलंबित कर दिया गया है। 14 मई को टोंकखुर्द स्थित फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 5 मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हैं। सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश भी दिए

सीएम मोहन यादव का बड़ा एक्शन : देवास पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में SDM, नायब तहसीलदार और SDOP सस्पेंड

मामले में अब प्रदेश शासन और उज्जैन संभाग आयुक्त ने बड़ा एक्शन लिया है। उज्जैन संभागायुक्त कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट मामले की मजिस्ट्रियल जांच की जाएगी।

मध्यप्रदेश के देवास जिले में हुए दर्दनाक पटाखा फैक्ट्री विस्फोट मामले में सरकार ने बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav के निर्देश के बाद उज्जैन संभाग प्रशासन और गृह विभाग ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में एसडीएम संजीव सक्सेना, नायब तहसीलदार रवि शर्मा और सोनकच्छ एसडीओपी दीपा मांडवे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

देवास जिले के टोंकखुर्द क्षेत्र स्थित पटाखा फैक्ट्री में 14 मई 2026 को भीषण विस्फोट हुआ था। इस हादसे में पांच मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। घायल मजदूरों का इलाज इंदौर के अस्पतालों में जारी है, जहां कई की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है। घटना के बाद से पूरे प्रदेश में प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे थे।

शनिवार दोपहर उज्जैन संभाग आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी आदेश में बताया गया कि टप्पा चिड़ावद तहसील टोंकखुर्द में पदस्थ नायब तहसीलदार रवि शर्मा ने विस्फोटक सामग्री से संबंधित निरीक्षण और निगरानी में गंभीर लापरवाही बरती। शासन द्वारा निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, जिसके चलते यह हादसा हुआ। इसी आधार पर उन्हें मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय देवास रहेगा।

इसके अलावा प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करते हुए एसडीएम संजीव सक्सेना पर भी कार्रवाई की गई। जांच में पाया गया कि फैक्ट्री संचालन और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी में आवश्यक सतर्कता नहीं बरती गई। अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण नहीं किए जाने से फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती रही, जिसका नतीजा इतना बड़ा हादसा बनकर सामने आया।

वहीं गृह विभाग ने सोनकच्छ एसडीओपी दीपा मांडवे को भी निलंबित कर दिया है। आदेश में कहा गया कि फैक्ट्री संचालन को लेकर जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद पुलिस स्तर पर निरीक्षण नहीं किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को कोई प्रतिवेदन भी प्रस्तुत नहीं किया गया। इसे कर्तव्य के प्रति गंभीर उदासीनता माना गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय पुलिस मुख्यालय भोपाल निर्धारित किया गया है।

घटना के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं इंदौर पहुंचे थे। उन्होंने चोइथराम अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात की और डॉक्टरों से उपचार की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने प्रशासन को घायलों के बेहतर इलाज और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायिक जांच आयोग का गठन भी कर दिया है। आयोग हादसे के कारणों, फैक्ट्री संचालन में हुई अनियमितताओं और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की जांच करेगा। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि फैक्ट्री में लंबे समय से सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही थी। मजदूरों के अनुसार परिसर में पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं थे और विस्फोटक सामग्री के भंडारण में भी नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। हादसे के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और लोग प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठा रहे हैं।

इस बड़ी कार्रवाई को सरकार का सख्त संदेश माना जा रहा है कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में और भी अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल प्रशासन हादसे के कारणों की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है और फैक्ट्री के लाइसेंस, सुरक्षा दस्तावेजों तथा निरीक्षण रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।