MP में 65 हजार ट्राइबल शिक्षकों पर बड़ा संकट: दो साल में TET पास नहीं किया तो जाएगी नौकरी

मध्यप्रदेश में जनजातीय कार्य विभाग ने ट्राइबल के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अनिवार्य कर दी है। करीब 65 हजार शिक्षकों को दो साल के भीतर यह परीक्षा पास करनी होगी, नहीं तो उनकी नौकरी पर खतरा हो सकता है। यह फैसला Supreme Court of India के आदेश और Right to Education Act 2009 के तहत लिया गया है। जुलाई-अगस्त 2026 में विशेष परीक्षा आयोजित होगी। वहीं, शिक्षक संगठन इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की तैयारी में है, उनका कहना है कि इससे ट्राइबल क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी हो सकती है।

MP में 65 हजार ट्राइबल शिक्षकों पर बड़ा संकट: दो साल में TET पास नहीं किया तो जाएगी नौकरी

ट्राइबल शिक्षकों पर नया संकट: 65 हजार को देनी होगी पात्रता परीक्षा, दो साल में पास करना अनिवार्य

मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के बाद अब जनजातीय कार्य विभाग के शिक्षकों पर भी पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता लागू कर दी गई है। विभाग के इस आदेश से करीब 65 हजार ट्राइबल शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडराने लगा है।

जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त तरुण राठी द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा। इसके लिए अधिकतम दो वर्ष का समय दिया जाएगा। यह निर्णय Supreme Court of India के आदेश (सिविल अपील क्रमांक 1385/2025 सहित अन्य) के पालन में लिया गया है, साथ ही Right to Education Act 2009 के प्रावधानों के तहत लागू किया जा रहा है।

जुलाई-अगस्त 2026 में होगी विशेष परीक्षा

विभाग के अनुसार, जुलाई-अगस्त 2026 में विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने की योजना है। संभागीय और जिला स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शिक्षकों की परीक्षा में भागीदारी सुनिश्चित करें। आदेशों का सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया गया है।

शिक्षकों की नौकरी पर मंडराया खतरा

ट्राइबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन का दावा है कि प्रदेश में कुल 95 हजार ट्राइबल शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 65 हजार को यह परीक्षा देनी होगी। यदि शिक्षक निर्धारित समय में परीक्षा पास नहीं कर पाते हैं, तो उनकी नौकरी प्रभावित हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में जाएगी रिव्यू पिटीशन

एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डीके सिंगोर ने बताया कि इस फैसले के खिलाफ Supreme Court of India में रिव्यू पिटीशन दायर की जा रही है। संगठन का कहना है कि इस निर्णय से ट्राइबल क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी हो सकती है और शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

क्या हो सकता है असर?

अनुभवी शिक्षकों के बाहर होने का खतरा

ट्राइबल क्षेत्रों में शिक्षण व्यवस्था पर असर

अतिथि शिक्षकों पर निर्भरता बढ़ने की आशंका

यह मामला आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था और ट्राइबल क्षेत्रों की स्कूलिंग पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है