सीएम ने लिया सख्त एक्शन,मंदाकिनी दीक्षित निलंबित, ब्लैकमेलिंग से परेशान शराब ठेकेदार ने दी थी जान
सस्पेंशन लेटर में लिखा है कि "सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि जिला देवास के मदिरा ठेकेदार दिनेश मकवाना द्वारा आत्महत्या किये जाने के पूर्व एक वीडियो बनाया था. कथित वीडियो में जिले की प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित के विरूद्ध अवैध राशि की मांग का गंभीर आरोप लगाते हुये आत्महत्या करने की बात कही है."
शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना की आत्महत्या मामले में नया खुलासा हुआ है. घटना के 27 दिन बाद मृतक का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उसने असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं. मृतक ने यह वीडियो मरने से पहले रिकॉर्ड किया था. वीडियो वायरल होते ही हड़कंप मच गया है.
देवास में शराब ठेकेदार दिनेश मकवाना ने सुसाइड कर लिया था. इस मामले में बड़े एक्शन की खबर सामने आ रही है. सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित को मध्य प्रदेश सरकार ने सस्पेंड कर दिया है. इस निलंबन को सीएम मोहन यादव का कड़ा एक्शन माना जा रहा है. देवास जिले में अलग- अलग जगहों पर शराब के ठेके संचालित करने वाले इंदौर कनाड़िया के ठेकेदार दिनेश मकवाना ने 8 नवंबर को जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी. उसके बाद से इनका वीडियो भी वायरल हुआ.
पत्र में लिखा है कि "सोशल मीडिया एवं समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि जिला देवास के मदिरा ठेकेदार दिनेश मकवाना द्वारा आत्महत्या किये जाने के पूर्व एक वीडियो बनाया था. कथित वीडियो में जिले की प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित के विरूद्ध अवैध राशि की मांग का गंभीर आरोप लगाते हुये आत्महत्या करने की बात कही है. दीक्षित पर लगाये गये आरोप प्रथम दृष्टया अत्यन्त गंभीर श्रेणी के होकर, शासकीय सेवक के कर्तव्यों एवं दायित्वों के विपरीत होने से मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम -3 का स्पष्ट रूप से उल्लंघन है. अतएव राज्य शासन एतदद्वारा मंदाकिनी दीक्षित जिला आबकारी अधिकारी, जिला देवास को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित करता है. निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय कार्यालय आबकारी आयुक्त ग्वालियर रहेगा. मंदाकिनी दीक्षित को निलबंन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त करने की पात्रता होगी."
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस निर्णय को प्रशासन में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस