कानून बेबस, गुंडे बेखौफ! शुजालपुर में फाइनेंस एजेंटों की दबंगई, किश्त के नाम पर दो सगे भाइयों पर चाकू से जानलेवा हमला
शुजालपुर सिटी में फाइनेंस एजेंटों की दबंगई एक बार फिर कानून-व्यवस्था पर भारी पड़ती दिखी। किश्त वसूली के नाम पर दो सगे भाइयों पर दिनदहाड़े चाकू से जानलेवा हमला किया गया। मंडावर निवासी श्रीपाल सिंह और संजय राजपूत गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पताल में भर्ती हैं।
अजय राज केवट माही
किश्त वसूली के नाम पर आतंक, भीड़भाड़ वाले इलाके में चाकूबाजी से मचा हड़कंप; दो भाई गंभीर, पुलिस संरक्षण पर सवाल
शुजालपुर सिटी में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बेअसर नजर आई, जब फाइनेंस की किश्त के नाम पर दिनदहाड़े दो सगे भाइयों पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया गया। भीड़भाड़ वाले इलाके में हुई इस वारदात ने साफ कर दिया है कि अपराधियों को न पुलिस का डर है, न प्रशासन का खौफ।
घटना में दोनों भाई गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
किश्त जमा, फिर भी चाकू—यह वसूली है या आतंक?
घायल श्रीपाल सिंह (32) और संजय राजपूत (27) निवासी मंडावर, पिता सूरज सिंह हैं। फरियादी संजय के अनुसार, 5 फरवरी को दोपहर करीब 12 बजे वह अपने भाई के साथ शुजालपुर सिटी बस स्टैंड स्थित मां भवानी दूध डेयरी से दूध के हिसाब के रुपए लेकर गांव लौट रहे थे।
पचोर रोड पर दरगाह के सामने पंकज परमार की फाइनेंस एजेंसी से जुड़े लोगों ने उनकी बाइक जबरन रुकवाई और किश्त बकाया होने का आरोप लगाया।
पीड़ितों ने स्पष्ट कहा कि किश्त पहले ही जमा हो चुकी है और थाने चलकर जांच करा ली जाए, लेकिन यह बात आरोपियों को नागवार गुज़री।
पीठ में घोंपा चाकू, सड़क पर छोड़कर फरार
आरोप है कि चेतन नामक आरोपी ने श्रीपाल की पीठ में चाकू घोंप दिया, जबकि उसके साथियों ने दोनों भाइयों को घेरकर बेरहमी से पीटा। खून से लथपथ हालत में दोनों को सड़क पर छोड़ दिया गया।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
यह वारदात सिर्फ एक हमला नहीं, बल्कि प्रशासन की नाकामी का आईना है। सवाल सीधे और कठोर हैं—
क्या शुजालपुर में फाइनेंस एजेंसियां कानून से ऊपर हो चुकी हैं?
क्या किश्त वसूली के नाम पर अब हत्या की कोशिश भी सामान्य हो गई है?
आखिर पुलिस और प्रशासन किस हादसे के इंतजार में हैं?
पुलिस ने 7 आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। जनता पूछ रही है—क्या सिर्फ केस दर्ज करना काफी है, या दोषियों पर त्वरित और सख्त कार्रवाई होगी?
अब यह मामला प्रशासन की परीक्षा है। अगर यहां भी ढिलाई बरती गई, तो यह संदेश जाएगा कि शुजालपुर में कानून नहीं, लाठी और चाकू का राज चलता है।
पहले भी पुलिस को गुमराह कर चुका पंकज परमार
शुजालपुर सिटी थाने पुलिस अपनी कुंठित बुद्धि का उपयोग कर हमेशा इस खुखार अपराधी को संरक्षण प्रदान करता आया है विगत वर्ष दिनांक 21,01,2025 को पुलिस प्रशासन से लेकर जिला प्रशसन को भी गुमराह कर अपनी किडनैपिंग की कहानी रच कई शुजालपुर के पत्रकार गोविंद सिंह जोनवाल व एक अन्य व्यक्ति को फसाने की साजिश रच कर अपने गायब होने की कहानी रच डाली थी जिसको लेकर पंकज परमार के चेले चपाटों ने शुजालपुर पचोर मार्ग पर जाम लगा कर पुलिस मुर्दा बाद के नारे लगाए थे मगर थाना प्रभारी प्रवीण कुमार पाठक ने अपनी दोहरी मंशा को लेकर न तो पंकज परमार पर कोई कार्यवाही की ओर न ही यातायात बाधित करने वाले पर बड़ा सवाल हे उठता हे कि क्या थाना प्रभारी प्रवीण कुमार पाठक ने पंकज परमार व उसके साथियों को अवैध वसूली के खुली चुनौती दे रखी हैं या फिर मोटे कमीशन के चक्कर में आशीर्वाद प्रदान किए बैठे हे
पंकज परमार के बैंक अकाउंट व संपति की हो जांच
उच्च अधिकारियों द्वारा पंकज परमार सवारियां एजेंसी व उसके साथियों के बैंक अकाउंट की भी जांच की जाए तो पता चलेगा कि कितने गरीबों का परेशान कर इन बदमाशों ने अपनी तिजोरियां भरी हे आय से अधिक संपति का मालिक हे पंकज परमार और उसके साथि इसकी भी जांच कर प्रशासन को सलाखों के पीछे भेजना चाहिए
क्या अब भी थाना प्रभारी प्रवीण कुमार पाठक निभाएंगे याराना
गुरुवार दोपहर हुए जानलेवा हमले को लेकर थाना प्रभारी ने अपराध तो पंजीबद्ध कर लिया गया मगर बड़ा सवाल हे उठता हे कि ये बदमाश जो पुलिस के करीबी माने जाते हे ये इनको पुलिस प्रशासन कब तक पकड़ कर सलाखों के पीछे भेजता हे या फिर जांच के नाम पर अपराधियों को खुलेआम छोड़ दिया जाएगा जैसे कि शाकिर पर जानलेवा हमले में अन्नू पठान से पुलिस प्रशासन ने मुखबरी का फायदा दिया गया हो
पंकज परमार को पकड़ने में पुलिस प्रशासन की नाकामी*
रात भर सीजिंग व गुंडों का एजेंट का फोन चालू रहा क्या पुलिस प्रशासन ने 307 जैसे हत्या के प्रयास के आरोपी की लोकेशन नहीं ली या पुलिस प्रशासन खुलेआम गुंडों को संरक्षण दे रहा है जिससे उच्च अधिकारियों की छबि धूमिल हो रही शेष खबर अगले अंक में लगातार,,,
इनका कहना है
जब एसडीओपी निमेष देशमुख फोन पर चर्चा की गई की थी पंकज परमार द्वारा पहले भी अपने अपहरण की कहानी रच पुलिस प्रशासन को गुमराह किया गया था जिस पर थाना प्रभारी प्रवीण कुमार पाठक द्वारा कोई कार्यवाही एसडीओपी निमेष देशमुख ने बताया कि इस प्रकरण में मुझे कोई जानकारी नहीं है में जानकारी लेकर ही बता पाऊंगा
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस