MLA दीपेश साहू की बारात में 'सारथी' बने छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव,हांकी बैलगाड़ी; बारिश में गद्दे और कुर्सियां बनीं सहारा, सामूहिक विवाह बना चर्चा का विषय

भारतीय राजनीति में पहली बार एक ऐसा अनोखा और ऐतिहासिक नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) अरुण साव, भाजपा विधायक दीपेश साहू की बैलगाड़ी पर निकली बारात के सारथी बने।

MLA दीपेश साहू की बारात में 'सारथी' बने छत्तीसगढ़ के डिप्टी सीएम अरुण साव,हांकी बैलगाड़ी; बारिश में गद्दे और कुर्सियां बनीं सहारा, सामूहिक विवाह बना चर्चा का विषय

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा से विधायक दीपेश साहू ने रविवार को बेहद सादगी से सामूहिक विवाह सम्मेलन में शादी की। उनकी बारात बैलगाड़ी से निकली। कार्यक्रम में कई नेता शामिल हुए।.

विधायक दीपेश साहू ने सामूहिक विवाह में रचाई शादी, बारिश बनी चुनौती; डिप्टी सीएम अरुण साव बने बारात के सारथी

बेमेतरा। छत्तीसगढ़ की राजनीति में सादगी और सामाजिक संदेश का एक अनूठा उदाहरण उस समय देखने को मिला जब बेमेतरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक दीपेश साहू ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में विवाह करने का निर्णय लिया। विधायक ने बीपीएल परिवार से आने वाली तरुणा साहू के साथ वैवाहिक जीवन की शुरुआत की। इस अवसर पर उनकी बारात बैलगाड़ी में निकाली गई, जिसकी कमान स्वयं प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने संभाली। कार्यक्रम में विधायक की सादगी और सामाजिक सोच की हर ओर चर्चा रही।

31 मई को आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह में कुल 12 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में विधायक दीपेश साहू भी आम लोगों की तरह शामिल हुए। उन्होंने किसी भव्य निजी समारोह की बजाय सरकारी योजना के अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह को चुना, जिससे समाज को सादगीपूर्ण विवाह का संदेश दिया जा सके।

समारोह की शुरुआत में सभी दूल्हे ई-रिक्शा के माध्यम से सर्किट हाउस पहुंचे। इसके बाद पारंपरिक तरीके से बैलगाड़ियों में बारात निकाली गई। भाजपा विधायक दीपेश साहू जिस बैलगाड़ी में सवार थे, उसके सारथी स्वयं उप मुख्यमंत्री अरुण साव बने। रायपुर से विशेष रूप से बेमेतरा पहुंचे अरुण साव ने बैलगाड़ी चलाकर बारात की अगुवाई की। इस दौरान पारंपरिक लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली और परी नृत्य ने समारोह को और आकर्षक बना दिया।

विधायक दीपेश साहू ने कहा कि वर्तमान समय में विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्च और दिखावे की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। इससे कई परिवार आर्थिक दबाव में आ जाते हैं। ऐसे में सामूहिक विवाह जैसी पहल समाज में समानता, सादगी और बचत का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि समाज को दिखावे की बजाय संस्कार और पारिवारिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

दीपेश साहू ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत उन्हें जो आर्थिक सहायता राशि मिलेगी, उसे वे अपने निजी उपयोग में नहीं लेंगे। उन्होंने बताया कि यह पूरी राशि मेधावी छात्राओं की शिक्षा पर खर्च की जाएगी, ताकि जरूरतमंद बेटियों को पढ़ाई में मदद मिल सके। उनकी इस घोषणा की भी लोगों ने सराहना की।

हालांकि समारोह के दौरान मौसम ने अचानक करवट ले ली। फेरों और अन्य वैवाहिक रस्मों के बीच तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचाव के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण दूल्हा-दुल्हनों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोग खुद को भीगने से बचाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते नजर आए।

बारिश के दौरान कई दूल्हे अपने सिर पर सेहरा लगाए हुए गद्दे और प्लास्टिक की कुर्सियां ओढ़कर बैठे दिखाई दिए। वहीं दुल्हनें भी अपने परिजनों के साथ बारिश से बचने के लिए उपलब्ध साधनों का सहारा लेती रहीं। कुछ लोगों ने तिरपाल और छातों का उपयोग किया, जबकि कई लोगों ने जमीन पर बिछाए गए गद्दों को ही सिर पर रख लिया। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और समारोह की चर्चा का प्रमुख कारण बन गया।

बारिश के बावजूद विवाह की रस्में पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुईं। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने मौसम की चुनौती के बीच भी समारोह को सफल बनाने में सहयोग किया। कई लोगों ने इसे यादगार और अनूठा आयोजन बताया।

विधायक दीपेश साहू का राजनीतिक और सामाजिक सफर भी काफी प्रेरणादायक माना जाता है। राजनीति में आने से पहले वे लगभग दस वर्षों तक सरकारी स्कूल में शिक्षक रहे। बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्णय लिया। भारतीय जनता पार्टी से जुड़ने के बाद उन्होंने पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष सहित कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं। हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में वे पहली बार बेमेतरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए।

उनकी पत्नी तरुणा साहू भी साधारण परिवार से आती हैं। तरुणा मूल रूप से दुर्ग जिले के बिरोदा गांव की निवासी हैं। उन्होंने एमए तक शिक्षा प्राप्त की है। उनके पिता देवनारायण साहू पेशे से ड्राइवर हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। वर्तमान में उनका परिवार बेमेतरा में निवास करता है। बीपीएल परिवार से आने वाली तरुणा और विधायक दीपेश साहू का यह विवाह सामाजिक समानता और सादगी का प्रतीक माना जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच इस विवाह की चर्चा लगातार बनी हुई है। एक ओर जहां विधायक ने सामूहिक विवाह में शामिल होकर सादगी का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर योजना से मिलने वाली राशि को छात्राओं की शिक्षा के लिए समर्पित करने की घोषणा ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव का बैलगाड़ी के सारथी बनना भी इस आयोजन की विशेषता रहा।

बारिश के कारण उत्पन्न अव्यवस्था और दूल्हा-दुल्हनों द्वारा कुर्सियां, गद्दे और तिरपाल ओढ़कर खुद को बचाने के दृश्य भले ही चर्चा का विषय बने हों, लेकिन पूरे आयोजन ने सामाजिक संदेश और सादगीपूर्ण विवाह की अवधारणा को नई पहचान दी है। विधायक दीपेश साहू का यह कदम उन परिवारों के लिए प्रेरणा माना जा रहा है जो विवाह समारोहों में बढ़ते खर्च और दिखावे से चिंतित रहते हैं।

इस अनोखे विवाह समारोह ने यह संदेश दिया कि सामाजिक प्रतिष्ठा का संबंध खर्च और भव्यता से नहीं, बल्कि संस्कार, सादगी और समाज के प्रति जिम्मेदारी से होता है।