मुख्यमंत्री की मौजूदगी में गोपाल भार्गव का बड़ा बयान,रहस मेले के मंच से- बोले,हम बुंदेलखंड के लोग गरीब हो सकते हैं, पर गद्दार नहीं": सियासी गलियारों में मची हलचल
गढ़ाकोटा में आयोजित 200 साल पुराने प्रसिद्ध रहस लोकोत्सव मेले में गुरुवार को सीएम डॉ. मोहन यादव ने विकास की अनेक योजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन किया।
गढ़ाकोटा के ऐतिहासिक मेले के मंच पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद थे. समारोह के दौरान अपने संबोधन में गोपाल भार्गव ने कहा, 'हम बुंदेलखंडी गरीब हो सकते हैं, लेकिन गद्दार नहीं... हमने हमेशा वफादारी निभाई है और आगे भी निभाते रहेंगे.'
मध्य प्रदेश के सागर जिले के गढ़ाकोटा में आयोजित करीब 200 साल पुराने रहस लोकोत्सव मेले में इस बार खास रौनक देखने को मिली. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहुंचे और कई विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमि पूजन किया. मंच से उन्होंने किसानों, मजदूरों और आम लोगों के लिए सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार हर वर्ग के साथ खड़ी है.
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के जरिए प्रदेश के 32.78 लाख से अधिक हितग्राहियों के खातों में 196.72 करोड़ रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की. इनमें सागर जिले के 2 लाख से ज्यादा पेंशन लाभार्थियों को भी करोड़ों रुपये की मदद दी गई.
'हम गरीब हो सकते हैं, गद्दार नहीं'- गोपाल भार्गव
मंच पर सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मंत्री और रहली विधायक गोपाल भार्गव के बयान की रही. उन्होंने बुंदेलखंड की मिट्टी और यहां के लोगों के स्वाभिमान की बात करते हुए कहा, “हम बुंदेलखंड के लोग हैं. हम गरीब हो सकते हैं, परेशान हो सकते हैं, लेकिन गद्दार नहीं हो सकते.”
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब भाजपा के सिर्फ दो सांसद थे, तब भी बुंदेलखंड की जनता ने उनका साथ दिया. उनके इस बयान पर पंडाल तालियों से गूंज उठा. भार्गव ने रहस मेले को बुंदेलखंड की पहचान और धरोहर बताया और कहा कि यह परंपरा आगे भी जारी रहेगी.
बुंदेली वीरता को सीएम का नमन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में बुंदेलखंड की वीर परंपरा को याद किया. उन्होंने प्रसिद्ध बुंदेली पंक्तियां दोहराते हुए यहां के शौर्य को प्रणाम किया. उन्होंने कहा कि गढ़ाकोटा आकर ऐसा लगा मानो सारे त्योहार एक साथ मन गए हों. लोगों का उत्साह और भागीदारी देखकर मन प्रसन्न हो गया.
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मेला नहीं, बल्कि रहस्य और इतिहास से जुड़ा आयोजन है. वीरों की इस भूमि को उन्होंने कोटिशः नमन किया.
किसानों के लिए 1 लाख करोड़ का सुरक्षा चक्र
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष राज्य सरकार किसानों के लिए एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट दे रही है. उनका साफ कहना था कि सरकार का लक्ष्य हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाना है. इससे प्रदेश में सिंचाई रकबे में बड़ी बढ़ोतरी होगी और किसान मजबूत होंगे. उन्होंने कहा कि अन्नदाता खुशहाल होगा तो प्रदेश भी आगे बढ़ेगा.
बीड़ी और तेंदूपत्ता उद्योग को बढ़ावा
बुंदेलखंड में बड़ी संख्या में लोग बीड़ी निर्माण और तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की रोजी-रोटी है. सरकार इन लघु उद्योगों को बढ़ावा देगी.
उन्होंने सुझाव दिया कि सांसद, विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधि मिलकर एक समिति बनाएं, जो बीड़ी मजदूरों और तेंदूपत्ता संग्रहकर्ताओं के हित में फैसले ले. सरकार ऐसे प्रस्तावों पर तुरंत कार्रवाई करेगी.साथ ही क्षेत्र के युवाओं के लिए खेल और स्टेडियम कॉम्प्लेक्स बनाने की भी घोषणा की गई.
गढ़ाकोटा का रहस मेला कोई सामान्य मेला नहीं है. इसकी शुरुआत सन 1809 में राजा मर्दन सिंह जूदेव के राज्यारोहण की स्मृति में हुई थी. कहा जाता है कि अंग्रेजी शासन के दौरान यह मेला व्यापार के साथ-साथ क्रांतिकारियों की गुप्त बैठकों का केंद्र भी था.
पशुओं की खरीद-बिक्री के बहाने रियासतों के राजा यहां जुटते और रणनीति बनाते थे. इसी रहस्यपूर्ण गतिविधियों के कारण इसका नाम रहस मेला पड़ा. आज यह आयोजन सांस्कृतिक परंपरा और जनकल्याण योजनाओं का मंच बन चुका है.
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी
कार्यक्रम में दमोह संसदीय क्षेत्र के सांसद राहुल सिंह लोधी, सागर संसदीय क्षेत्र की सांसद लता वानखेड़े, खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह समेत कई विधायक और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे. बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, महिलाएं और युवा भी कार्यक्रम में शामिल हुए.
बुंदेलखंड की अस्मिता का मंच
गढ़ाकोटा का रहस लोकोत्सव इस बार सिर्फ सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि विकास और राजनीतिक संदेश का मंच भी बन गया. एक तरफ मुख्यमंत्री ने योजनाओं की सौगात दी, तो दूसरी ओर गोपाल भार्गव के बयान ने बुंदेलखंड की निष्ठा और स्वाभिमान की चर्चा छेड़ दी.
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस