लगातार बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, मूंग की फसल पर मंडराया संकट
रायसेन जिले के बरेली क्षेत्र में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के कारण खेतों और खलिहानों में रखी मूंग की फसल के खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। पहले से खाद, बीज, डीएपी, यूरिया और डीजल की बढ़ती लागत से परेशान किसानों को अब फसल नुकसान की आशंका सताने लगी है। किसानों ने प्रशासन से फसल क्षति का सर्वे कराकर उचित मुआवजा और राहत देने की मांग की है। यदि जल्द मौसम साफ नहीं हुआ तो मूंग सहित अन्य फसलों को भी भारी नुकसान हो सकता है।
राजेन्द्र सिंह राजपूत
लगातार बारिश से भीगी मूंग की फसल, किसानों ने सर्वे और मुआवजे की मांग उठाई
बरेली (रायसेन)। क्षेत्र में पिछले तीन-चार दिनों से लगातार हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जहां एक ओर किसान पहले से ही खेती की बढ़ती लागत, खाद-बीज की महंगाई और डीजल की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर लगातार हो रही वर्षा ने उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। खेतों में खड़ी फसल, कटाई के बाद खेतों में पड़ी उपज तथा खलिहानों में रखी मूंग की फसल पर बारिश का सीधा असर पड़ रहा है। किसानों को आशंका है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो उनकी मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर सकता है।
क्षेत्र के अधिकांश किसानों ने इस वर्ष अच्छी पैदावार की उम्मीद के साथ मूंग की खेती की थी। मौसम अनुकूल रहने के कारण फसल भी अच्छी तैयार हुई थी और कई किसानों ने कटाई का कार्य शुरू कर दिया था। कुछ किसानों ने कटाई के बाद फसल को खेतों और खलिहानों में रखा हुआ था, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण फसल भीग गई है। इससे दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने और उत्पादन में कमी आने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि मूंग की फसल बारिश के प्रति काफी संवेदनशील होती है। कटाई के बाद यदि फसल लंबे समय तक भीगती रहे तो दानों का रंग बदल जाता है, अंकुरण की स्थिति बन जाती है और बाजार में उचित कीमत नहीं मिल पाती। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। कई किसानों ने बताया कि इस बार खेती में पहले ही काफी निवेश किया गया है। खाद, यूरिया, डीएपी, बीज और कीटनाशकों की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे खेती की लागत पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है।
डीजल की बढ़ती कीमतें भी किसानों की परेशानी का बड़ा कारण बनी हुई हैं। सिंचाई, ट्रैक्टर संचालन और कृषि उत्पादों के परिवहन के लिए डीजल की आवश्यकता होती है। किसानों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के साथ-साथ कई स्थानों पर डीजल की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है, जिससे कृषि कार्यों में बाधा आ रही है। ऐसे समय में लगातार बारिश ने उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है।
क्षेत्र के किसान बताते हैं कि मूंग की फसल की कटाई के बाद उसे सुखाना आवश्यक होता है, लेकिन लगातार बादल छाए रहने और बारिश होने के कारण फसल को पर्याप्त धूप नहीं मिल पा रही है। इससे दानों में नमी बनी हुई है और खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कई किसानों ने फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखने का प्रयास किया है, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण सभी किसानों के लिए ऐसा कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार वर्षा की स्थिति बनी रहने पर मूंग के अलावा अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। खेतों में जलभराव होने से फसलों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और रोगों के फैलने की संभावना भी बढ़ जाती है। इससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है और किसानों को अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के बीच चिंता का माहौल है। कई किसान दिन-रात मौसम पर नजर बनाए हुए हैं और बारिश रुकने की प्रार्थना कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक ओर प्राकृतिक आपदाएं और दूसरी ओर खेती की बढ़ती लागत ने कृषि को जोखिम भरा व्यवसाय बना दिया है। यदि फसल खराब होती है तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, जिससे परिवार का भरण-पोषण और आगामी कृषि कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं।
किसानों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कराया जाए और फसलों को हुए नुकसान का सही आकलन किया जाए। उनका कहना है कि जिन किसानों की फसल बारिश से प्रभावित हुई है, उन्हें शीघ्र राहत राशि और उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए ताकि वे आर्थिक संकट से उबर सकें। किसानों ने यह भी मांग की है कि कृषि विभाग के अधिकारी गांव-गांव जाकर स्थिति का निरीक्षण करें और किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं।
स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम साफ हो जाता है तो कुछ हद तक नुकसान को कम किया जा सकता है, लेकिन यदि वर्षा का सिलसिला जारी रहा तो मूंग सहित अन्य फसलों को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है। इससे न केवल किसानों की आय प्रभावित होगी बल्कि कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
फिलहाल लगातार हो रही बारिश के बीच किसान अपनी मेहनत की फसल को बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। खेतों और खलिहानों में रखी उपज को सुरक्षित करने की कोशिशें जारी हैं। वहीं किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि मौसम जल्द साफ होगा और उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सकेगी। आसमान की ओर टकटकी लगाए किसान अब प्रकृति की मेहरबानी और शासन से मिलने वाली सहायता का इंतजार कर रहे हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस