विवादों में घिरे संजय पाठक का बड़ा ऐलान: 51% जनसमर्थन नहीं मिला तो इस्तीफा दे देंगे-,जनता का रिपोर्ट कार्ड ही मेरा फैसला!”—घर-घर जाकर पूछूंगा विधायक बना रहूं या नहीं
कानूनी परेशानियों से घिरे कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से बीजेपी विधायक संजय पाठक ने कहा कि वे फिर ‘जनादेश’ कराएंगे। रविवार रात कैमोर नगर परिषद के कार्यक्रम में पाठक ने यह ऐलान किया।
कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से भाजपा विधायक संजय पाठक ने अपने कार्यकाल के ढाई साल पूरे होने पर एक बड़ा ऐलान किया है। कैमोर नगर परिषद के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वे फिर से जनता के बीच जाकर ‘जनादेश’ लेंगे। कानूनी मुश्किलों के बीच लिया गया यह फैसला सीधे तौर पर जनता का भरोसा और समर्थन परखने की पहल माना जा रहा है।
BJP MLA Sanjay Pathak: कानूनी मुश्किलों से घिरे कटनी जिले की विजयराघवगढ़ सीट से भाजपा विधायक संजय पाठक फिर ‘जनादेश’ कराएंगे। मौजूदा कार्यकाल के ढाई साल पूरे होने पर उन्होंने रविवार रात कैमोर नगर परिषद के कार्यक्रम में यह ऐलान किया।
संजय पाठक ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को समय-समय पर जनता के बीच अपनी उपयोगिता और लोकप्रियता का आकलन करना चाहिए। ‘जनादेश’ में 51 फीसदी से कम वोट मिलने पर वे पद से इस्तीफा देंगे।
विधायक पाठक ने कहा - 2023 में जब चुनाव होने थे, तब भी जनादेश कराया था, लोग बोले कि ये क्या कर रहे हो, मैंने कहा था कि मैं चुनाव लड़ने योग्य हूं कि नहीं। आप मुझे विधायक बनाना चाहते हो या नहीं। अगर आप लोग नहीं चाहेंगे और हम जबर्दस्ती टिकट लेकर बैठ जाएं, ये सही नहीं है। इसमें एक लाख 40 हजार वोट भी मिले।
बैठे–बैठे सोच रहा था कि दो साल से ज्यादा हो गया विधायक बने हुए, बने रहना चाहिए या नहीं, इसे चेक कर लेना चाहिए। जैसे जनादेश कराया था, वैसे ही मौका निकालेंगे। देखेंगे कि ढाई साल के कार्यकाल को जनता कितने नंबर देगी।
सोचा कि ऐसा करके देखा जाए कि मैं योग्य हूं कि नहीं आपकी सेवा करने के लिए। मई–जून में समय निकालेंगे। एक बार फिर से क्रॉस चेक करेंगे। जनता के कटघरे में आएंगे कि मैं विधायक बनूं या छोड़ दूं। मैं अपनी गलतियां और कमियां पूछने जाऊंगा। अगर 51 प्रतिशत से कम रहा, तो बजरंगबली की कसम, उसी दिन विधायकी छोड़ दूंगा। अगर ऊपर रहा, तो पांच साल तक सेवा करेंगे।
पिछले चुनाव से पहले भी करा चुके हैं जनादेश
यह पहली बार नहीं है जब संजय पाठक इस तरह का प्रयोग कर रहे हैं। इससे पहले, 2023 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले जून महीने में भी उन्होंने ऐसा ही 'जनादेश' कराया था। उस समय इस निजी चुनाव को बाकायदा चुनाव आयोग की तर्ज पर सैकड़ों कर्मचारियों की मदद से कराया गया था।
करीब 215 लोगों को इस काम में लगाया गया था
मतगणना के लिए 66 टेबल लगाई गई थीं और करीब 215 लोगों को इस काम में लगाया गया था। कुल 290 मतपेटियों की गिनती हुई थी। विजयराघवगढ़ क्षेत्र के कुल 2.33 लाख मतदाताओं में से 1 लाख 37 हजार 55 लोगों ने वोट डाले थे।
इसमें 1,03203(75 फीसदी से ज्यादा) लोगों ने उनके चुनाव लड़ने के पक्ष में यानी 'हां' में वोट दिया था, जबकि 30082 लोगों ने 'ना' पर मुहर लगाई थी। इस जनादेश में मिली हरी झंडी के बाद ही वे 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में उतरे थे।
संजय पाठक का नाम लगातार विवादों से जुड़ा रहा है
यह कवायद ऐसे समय हो रही है जब संजय पाठक का नाम लगातार विवादों से जुड़ रहा है और वे कानूनी मुश्किलों से घिरे नजर आ रहे हैं। उनके खिलाफ कई बड़े मामले चल रहे हैं, जो राजनीतिक भविष्य के लिए चुनौती हैं।
उन पर सहारा जमीन घोटाला और एक्सिस माइनिंग के गंभीर आरोप हैं। 443 करोड़ रुपए के जुर्माने का सरकारी शिकंजा है। हाईकोर्ट के जज को कथित फोन मामले में आपराधिक अवमानना का आदेश भी है।
दरअसल, गुरुवार (2 अप्रैल) को पाठक के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने नोटिस जारी कर पूछा कि आपके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
2025 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई, जांच आगे नहीं बढ़ी
कटनी निवासी आशुतोष मनु दीक्षित ने जून 2025 में हाईकोर्ट में याचिका लगाई। इसमें कहा कि पाठक परिवार की कंपनियों के अवैध खनन की शिकायतें ईओडब्ल्यू में की थीं। 6 महीने बाद भी जांच आगे नहीं बढ़ी।
केस में पाठक परिवार की कंपनियों ने इंटर विन एप्लीकेशन लगाई। इस बीच खनिज विभाग के प्रमुख सचिव ने इनके खिलाफ 443 करोड़ का जुर्माना लगाया।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस