भोपाल में सवा लाख अतिथि शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन: वादाखिलाफी के खिलाफ गरजे, 30 अप्रैल के बाद बेरोजगारी का अल्टीमेटम—मांगें नहीं मानीं तो उग्र होगा आंदोलन
शिक्षकों ने कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन: वादाखिलाफी पर सरकार घिरी, उग्र आंदोलन की चेतावनी
भोपाल, 29 अप्रैल 2026-मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मंगलवार को अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले हजारों अतिथि शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन सरकार द्वारा पूर्व में किए गए वादों को पूरा न करने के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदेशभर से पहुंचे शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी लंबित मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा।
वादाखिलाफी से नाराज शिक्षक
प्रदर्शन के दौरान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने अतिथि शिक्षकों के हित में कई बड़े वादे किए थे। इनमें गुरुजियों की तर्ज पर नीति लागू करना, सीधी भर्ती में बोनस अंक देना और वार्षिक अनुबंध के माध्यम से भविष्य सुरक्षित करना शामिल था।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि आज तक इन वादों पर कोई ठोस अमल नहीं हुआ है, जिससे प्रदेशभर के अतिथि शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
बड़े नेताओं के आश्वासन भी अधूरे
आंदोलन के दौरान शिक्षकों ने यह भी याद दिलाया कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा भी अतिथि शिक्षकों को न्याय दिलाने के आश्वासन दिए गए थे।
शिक्षकों का कहना है कि इन आश्वासनों के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है, जिससे उनकी निराशा और बढ़ गई है।
30 अप्रैल के बाद बेरोजगारी का खतरा
वरिष्ठ पदाधिकारी रामचंद्र नागर, प्रदेश अध्यक्ष के.सी. पवार और मीडिया प्रभारी सर्जन सिंह शिल्पकार ने बताया कि सरकार वार्षिक अनुबंध के वादे से पीछे हटती नजर आ रही है।
उनके अनुसार, यदि स्थिति नहीं सुधरी तो 30 अप्रैल के बाद लगभग सवा लाख अतिथि शिक्षक बेरोजगार हो सकते हैं। उन्होंने मांग की कि सीधी भर्ती, प्रमोशन और स्थानांतरण से प्रभावित अनुभवी अतिथि शिक्षकों को रिक्त पदों पर प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए।
ई-अटेंडेंस प्रणाली पर सवाल
प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने ई-अटेंडेंस प्रणाली में आ रही तकनीकी समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि कई बार तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिसके कारण शिक्षकों का मानदेय काट लिया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि कई शिक्षकों का सितंबर माह का मानदेय भी इसी कारण से लंबित है। मोर्चा ने मांग की कि तकनीकी समस्या की स्थिति में ऑफलाइन उपस्थिति को मान्य किया जाए और कटे हुए मानदेय का तुरंत भुगतान किया जाए।
भर्ती प्रक्रिया में विसंगतियों का आरोप
बी.एम. खान ने भर्ती प्रक्रिया में कई विसंगतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव का उचित लाभ नहीं मिल रहा है।
वर्तमान स्कोर कार्ड में केवल 5 वर्षों का अनुभव जोड़ा जाता है, जबकि इसे बढ़ाकर प्रतिवर्ष 10 अंक (अधिकतम 100 अंक) किया जाना चाहिए। इसके साथ ही 2008 और 2011 की पात्रता परीक्षाओं के अंकों को भी जोड़े जाने की मांग की गई।
अनुभव के आधार पर न्याय की मांग
प्रांत अध्यक्ष तूफान शर्मा ने कहा कि अतिथि शिक्षक सभी आवश्यक योग्यताओं को पूरा करते हैं, इसलिए उनके साथ अनुभव के आधार पर न्याय किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को प्राथमिकता दी जाए।
मुख्य मांगें
1. नियमितीकरण एवं संविदा
गुरुजियों की तर्ज पर नीति लागू की जाए
रिक्त पदों में न्यूनतम 30% पद अतिथि शिक्षकों के लिए आरक्षित हों
विशेष विभागीय पात्रता परीक्षा के माध्यम से नियमितीकरण
2. शिक्षक भर्ती
50% पद अतिथि शिक्षकों के लिए आरक्षित किए जाएं
प्रतिवर्ष 4 बोनस अंक (अधिकतम 20 अंक) दिए जाएं
पात्रता अंकों में 10% छूट दी जाए
3. स्कोर कार्ड सुधार
प्रतिवर्ष 10 अंक (अधिकतम 100 अंक) जोड़े जाएं
50 दिन कार्य पूर्ण होने पर अनुभव अंक मिले
2011 संविदा परीक्षा के अंक जोड़े जाएं
4. सेवा निरंतरता एवं समायोजन
12 माह का वार्षिक अनुबंध लागू किया जाए
कार्यमुक्त होने पर समायोजन सुनिश्चित किया जाए
5. सामाजिक सुरक्षा
बीमा, पीएफ और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं
13 आकस्मिक एवं 3 ऐच्छिक अवकाश दिए जाएं
6. ई-अटेंडेंस एवं मानदेय
ई-अटेंडेंस प्रणाली में सुधार
काटे गए मानदेय का भुगतान
तकनीकी समस्या में ऑफलाइन उपस्थिति मान्य
अन्य राज्यों के उदाहरण
अतिथि शिक्षकों ने अपने पक्ष को मजबूत करते हुए अन्य राज्यों के उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि हरियाणा में अतिथि शिक्षकों को अनुभव के आधार पर वरीयता दी जा रही है, जबकि छत्तीसगढ़ में संविदा शिक्षकों का नियमितीकरण किया जा चुका है।
शिक्षकों का कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार को भी इन राज्यों से सीख लेते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए।
आगे की रणनीति
प्रदर्शन के अंत में अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल शुरुआत है। यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
शिक्षकों ने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक संघर्ष जारी रखेंगे और जरूरत पड़ने पर राजधानी भोपाल में फिर से बड़े स्तर पर जुटान किया जाएगा।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस