पीएचई अफसरों ने बनाया भुगतान के लिए गलत बिल : अब आरटीआई लगाने पर जानकारी देने की जगह आवेदक को दे रहे धमकी

: डॉ. नीता सिंह (भोपाल) ने 24 फरवरी 2025 को 56 लाख रुपये के लंबित भुगतान, निविदा अनुबंध संख्या 54/2022-23, कार्य आदेश और कथित गलत भुगतान बिलों की जानकारी के लिए आवेदन किया।

पीएचई अफसरों ने बनाया भुगतान के लिए गलत बिल : अब आरटीआई लगाने पर जानकारी देने की जगह आवेदक को दे रहे धमकी

पीएचई विभाग ने नहीं दी आरटीआई सूचना

गलत बिल तैयार करने और भुगतान में गड़बड़ी का आरोप

प्रथम अपील में तथ्यात्मक जानकारी का बहिष्कार

सूचना उपलब्ध कराने के बजाय धमकी का आरोप

भोपाल। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग देवास एक बार फिर सूचना के अधिकार अधिनियम के उल्लंघन के आरोपों के घेरे में आ गया है। देवास जिले से जुड़े लगभग 56 लाख रुपये के लंबित भुगतान से संबंधित आरटीआई प्रकरण में न तो मांगी गई सूचना उपलब्ध कराई गई और न ही प्रथम अपील में पारित आदेश को तथ्यात्मक रूप से सही बताया जा रहा है। अब यह मामला मप्र राज्य सूचना आयोग भोपाल तक पहुंच गया है।
भोपाल निवासी डॉ. नीता सिंह द्वारा 24 फरवरी 2025 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत आवेदन प्रस्तुत कर देवास जिले में संपादित कार्यों, भुगतान की स्थिति, निविदा अनुबंध संख्या 54/2022-23, कार्य आदेश दिनांक 7 अक्टूबर 2022, सीएम ऑनलाइन शिकायत तथा कथित गलत भुगतान बिलों से जुड़ी प्रमाणित जानकारी मांगी गई थी। यह आवेदन मुख्य अभियंता कार्यालय, भोपाल द्वारा 11 मार्च 2025 को कार्यकारी अभियंता, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी प्रभाग, देवास को हस्तांतरित किया गया।
आरोप है कि कानूनन निर्धारित समय-सीमा के भीतर कोई सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके विपरीत, प्रथम अपील की सुनवाई के दौरान लोक सूचना अधिकारी ने यह दावा किया कि संबंधित सूचना पहले ही किसी अन्य आरटीआई आवेदन के अंतर्गत दी जा चुकी है। डॉ. नीता सिंह ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि दोनों आरटीआई आवेदन विषयवस्तु में अलग-अलग हैं और उन्होंने कभी भी ऐसी किसी समानता पर सहमति नहीं दी।
मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि जिस पत्र के माध्यम से सूचना भेजे जाने का दावा किया गया, उसकी डाक रसीद अथवा कोई भी वैध प्रेषण प्रमाण आज तक प्रस्तुत नहीं किया गया। सुनवाई के दौरान लोक सूचना अधिकारी की व्यक्तिगत उपस्थिति के बाद भी उनके स्थान पर विभाग के बाबुओं के द्वारा जवाब दिया जाना भी सवालों के घेरे में है।

*पीएचई के अफसरों पर धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई हो :*

डॉ. नीता सिंह का आरोप है कि सूचना उपलब्ध न कराना, गलत तथ्यों के आधार पर आदेश पारित करना तथा सूचना के प्रेषण का कोई प्रमाण न देना, सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की मूल भावनापारदर्शिता और जवाबदेही का खुला उल्लंघन है। उन्होंने संबंधित लोक सूचना अधिकारी पर अधिनियम की धारा 20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई और संपूर्ण सूचना निःशुल्क उपलब्ध कराने की मांग की है। 

*जानकारी देने की जगह आवेदक के ही खिलाफ कार्रवाई की मांग :*

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग देवास के अधिकारी द्वारा अभी तक आवेदक  को जानकारी उपलब्ध कराने की जगह उन्हें डराया धमकाया जा रहा है और बार-बार यह कहा जा रहा है कि आपके द्वारा जानकारी मांगने पर आपके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए सूचना आयोग से निवेदन किया जाएगा।
अब यह पूरा प्रकरण राज्य सूचना आयोग, मध्यप्रदेश के समक्ष द्वितीय अपील के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जहां आयोग के निर्णय से यह तय होगा कि सूचना दबाने के आरोपों में विभाग की भूमिका क्या रही और जिम्मेदारी किसकी बनती है।